नई दिल्ली,7 अप्रैल (युआईटीवी)- प्रवासी मजदूरों की रोजमर्रा की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा और राहतभरा फैसला लिया है। सरकार ने राज्यों में प्रवासी श्रमिकों के लिए उपलब्ध 5 किलो के फ्री ट्रेड एलपीजी (एफटीएल) सिलेंडरों की रोजाना आपूर्ति को दोगुना करने का निर्णय लिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े दबावों के बीच आम लोगों,खासकर कमजोर वर्गों को राहत देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन में बताया गया है कि सिलेंडरों की बढ़ी हुई आपूर्ति का निर्धारण राज्यों में पहले से हो रही औसत दैनिक वितरण के आधार पर किया जाएगा। यानी जिन राज्यों में जितनी मांग और सप्लाई पहले थी,उसी अनुपात में अब सिलेंडरों की संख्या बढ़ाकर उपलब्ध कराई जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जरूरतमंद प्रवासी मजदूरों तक समय पर और पर्याप्त मात्रा में एलपीजी पहुँच सके।
सरकार का यह निर्णय पहले लागू की गई 20 प्रतिशत की आपूर्ति सीमा से भी आगे जाता है। इसका मतलब है कि अब पहले की तुलना में कहीं अधिक संख्या में 5 किलो के एफटीएल सिलेंडर उपलब्ध होंगे। इस कदम से खासतौर पर उन मजदूरों को राहत मिलेगी,जो अस्थायी रूप से शहरों में रहकर काम करते हैं और जिनके पास बड़े घरेलू गैस कनेक्शन की सुविधा नहीं होती।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अतिरिक्त सिलेंडरों की आपूर्ति राज्य सरकारों और उनके खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभागों के माध्यम से की जाएगी। इनका वितरण केवल प्रवासी मजदूरों के लिए निर्धारित रहेगा। इस पूरी प्रक्रिया में ऑयल मार्केटिंग कंपनियाँ भी सक्रिय भूमिका निभाएँगी,ताकि वितरण में किसी तरह की बाधा न आए और पारदर्शिता बनी रहे।
केंद्र सरकार पहले ही यह संकेत दे चुकी थी कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए पेट्रोल,डीजल और एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। सरकार ने लोगों से अपील की थी कि वे घबराहट में अनावश्यक खरीदारी न करें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। इस नई व्यवस्था से यह संदेश भी जाता है कि सरकार आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को लेकर पूरी तरह सतर्क और सक्रिय है।
एलपीजी वितरण को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने डिजिटल माध्यमों को अपनाने पर भी जोर दिया है। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे गैस बुकिंग के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग करें और अनावश्यक रूप से गैस एजेंसी या डिस्ट्रीब्यूटर के पास जाने से बचें। इससे न केवल समय की बचत होगी,बल्कि वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ेगी।
सरकार ने घरेलू एलपीजी और पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की आपूर्ति को प्राथमिकता देने का भी निर्णय लिया है,खासकर अस्पतालों,शैक्षणिक संस्थानों और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ऊर्जा की आपूर्ति में कोई कमी न आए,ताकि जरूरी सेवाएँ बिना किसी बाधा के जारी रह सकें।
इसके साथ ही,सरकार ने रिफाइनरियों में उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं,ताकि बढ़ती माँग को पूरा किया जा सके। शहरी क्षेत्रों में एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के बीच का अंतर 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन तक निर्धारित किया गया है,जिससे अनावश्यक स्टॉकिंग को रोका जा सके और अधिक से अधिक लोगों तक गैस पहुँच सके। इसके अलावा,माँग को संतुलित करने के लिए केरोसिन और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधनों की उपलब्धता भी बढ़ाई जा रही है।
सरकारी आँकड़ों के अनुसार,प्रवासी मजदूरों के लिए एलपीजी सप्लाई में अब तक कोई बड़ी बाधा नहीं आई है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक,लगभग 51 लाख घरेलू एलपीजी सिलेंडर वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा,ऑनलाइन बुकिंग का प्रतिशत 95 फीसदी तक पहुँच गया है,जो डिजिटल अपनाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।
डिलीवरी ऑथेंटिकेशन सिस्टम के जरिए गैस वितरण में भी सुधार हुआ है। इस तकनीक के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सिलेंडर सही व्यक्ति तक पहुँचे और किसी प्रकार की गड़बड़ी या कालाबाजारी पर रोक लगाई जा सके। इससे उपभोक्ताओं का भरोसा भी मजबूत हुआ है।
केंद्र सरकार का यह कदम प्रवासी मजदूरों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। यह न केवल उनकी दैनिक जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा,बल्कि ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। आने वाले समय में इस योजना के प्रभाव का आकलन करना महत्वपूर्ण होगा,लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट है कि सरकार ने कमजोर वर्गों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए एक ठोस और प्रभावी कदम उठाया है।
