अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (तस्वीर क्रेडिट@lramkrishna59)

मिनियापोलिस गोलीकांड पर भड़के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस,मीडिया पर लगाया “सच्चाई को तोड़ने-मरोड़ने” का आरोप

वाशिंगटन,9 जनवरी (युआईटीवी)- अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में हुए एक घातक गोलीकांड को लेकर देश की राजनीति और मीडिया जगत में तीखी बहस छिड़ गई है। इस मामले में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कई प्रमुख समाचार संस्थानों की रिपोर्टिंग पर खुलकर नाराजगी जताई है। इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (आईसीई) के एक अधिकारी से जुड़े इस घटनाक्रम को लेकर वेंस ने मीडिया की भूमिका को “पूरी तरह शर्मनाक” बताया और कहा कि इस तरह की रिपोर्टिंग न केवल सच्चाई से भटकाती है,बल्कि हर दिन कानून प्रवर्तन अधिकारियों की जान को खतरे में डालती है।

मिनियापोलिस में हुई इस घटना में एक महिला की मौत हो गई थी,जिसके बाद कई मीडिया रिपोर्ट्स और हेडलाइंस सामने आईं। इन्हीं में से एक हेडलाइन का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति वेंस ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने बताया कि उन्हें सीएनएन की एक हेडलाइन की तस्वीर दिखाई गई,जिसमें लिखा था, “मिनियापोलिस में आईसीई अधिकारी द्वारा अमेरिकी नागरिक की हत्या के बाद आक्रोश।” इस हेडलाइन को जोर से पढ़ने के बाद वेंस ने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा, “इसे कहने का यह भी एक तरीका हो सकता है,” लेकिन तुरंत ही उन्होंने आरोप लगाया कि इस एक पंक्ति में कई अहम तथ्यों को जानबूझकर छिपाया गया है।

वेंस के मुताबिक,इस घटना को एक “हत्या” के रूप में पेश करना न केवल भ्रामक है,बल्कि यह पूरे मामले की प्रकृति को गलत तरीके से दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य घटना नहीं थी,बल्कि संघीय कानून लागू करने वाले अधिकारियों पर किया गया हमला था। वेंस ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “यह संघीय कानून लागू करने वाले अधिकारियों पर हमला था। यह कानून और व्यवस्था पर हमला था। यह अमेरिकी जनता पर हमला था।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वह “हमला” शब्द का इस्तेमाल पूरी जिम्मेदारी और सोच-समझकर कर रहे हैं।

उपराष्ट्रपति ने कॉर्पोरेट मीडिया के एक बड़े हिस्से पर आरोप लगाया कि उन्होंने इस घटना को गलत तरीके से पेश किया और संदर्भ से बाहर दिखाया। वेंस का कहना था कि जिस हेडलाइन पर इतना आक्रोश फैलाया गया,उसमें यह तथ्य शामिल ही नहीं किया गया कि वही आईसीई अधिकारी छह महीने पहले एक अलग घटना में गंभीर रूप से घायल हो चुका था। वेंस के अनुसार,उस अधिकारी को पहले एक कार से घसीटा गया था,जिसमें उसकी टांग में 33 टांके आए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी व्यक्ति को पहले इस तरह की जानलेवा स्थिति का सामना करना पड़ा हो,तो क्या यह स्वाभाविक नहीं है कि वह अगली बार ज्यादा सतर्क रहेगा?

वेंस ने मीडिया की रिपोर्टिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि हेडलाइन में यह भी नहीं बताया गया कि जिस महिला की मौत हुई,वह एक वैध कानून प्रवर्तन अभियान में हस्तक्षेप कर रही थी। उनके मुताबिक,महिला उस समय अमेरिका में चल रहे एक कानूनी ऑपरेशन में बाधा डालने के लिए वहाँ मौजूद थी। वेंस ने कहा, “हेडलाइन यह नहीं बताती कि वह महिला अमेरिका में एक वैध कानून प्रवर्तन अभियान में दखल दे रही थी।” उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी घटना को रिपोर्ट करते समय संदर्भ और पृष्ठभूमि को नजरअंदाज करना जनता को गुमराह करने जैसा है।

इस मुद्दे पर सवाल-जवाब के दौरान जब पत्रकारों ने यह कहा कि मामले की जाँच अभी जारी है और सभी तथ्यों का सामने आना बाकी है,तो वेंस ने इस तर्क का भी कड़ा विरोध किया। उन्होंने तीखे लहजे में कहा, “माफ कीजिए,यह क्या हो रहा है? आप लोगों का काम सच्चाई बताना है। आपने खुद को कट्टरपंथी प्रचार का माध्यम कैसे बना लिया,जो हमारे लिए कानून लागू करना और मुश्किल बना रहा है?” उनके इस बयान ने यह साफ कर दिया कि वह मीडिया की निष्पक्षता और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

वेंस ने यह भी कहा कि किसी घटना में शामिल लोगों के इरादों को लेकर बहस करना और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना,ये दोनों अलग बातें हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि किसी के दिल या दिमाग में क्या चल रहा था,यह जानना आसान नहीं होता,लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस मामले में इतना स्पष्ट है कि कानून का उल्लंघन हुआ था और उस आईसीई अधिकारी के पास यह मानने का पूरा कारण था कि उसे चोट लग सकती है या उसकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। वेंस के शब्दों में, “मुझे यह नहीं पता कि किसी के दिल या दिमाग में क्या था,लेकिन मुझे इतना पक्का पता है कि उसने कानून तोड़ा था और उस अधिकारी के पास यह सोचने का हर कारण था कि उसकी जान खतरे में है।”

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मीडिया द्वारा यह नैरेटिव फैलाना कि एक “निर्दोष महिला” को एक आईसीई एजेंट ने “मार डाला”, न केवल गलत है बल्कि खतरनाक भी है। वेंस के अनुसार,अगर लोग यह चर्चा करना चाहते हैं कि उस महिला की भूमिका क्या थी और वह वास्तव में क्या कर रही थी,तो यह एक वैध और जरूरी बातचीत हो सकती है,लेकिन बिना पूरे तथ्य सामने लाए,किसी अधिकारी को हत्यारा बताना पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना है।

उपराष्ट्रपति वेंस ने यह भी कहा कि आलोचना का निशाना कानून लागू करने वाले अधिकारी नहीं,बल्कि चुने हुए नेता होने चाहिए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “मुझ पर हमला करो,अमेरिका के राष्ट्रपति पर हमला करो,लेकिन हमारे कानून प्रवर्तन अधिकारियों पर हमला मत करो।” उनके मुताबिक,ये अधिकारी वही काम कर रहे हैं,जिसकी माँग अमेरिकी जनता ने की है और जिसके लिए उन्हें सशक्त बनाया गया है।

जब उनसे पूछा गया कि वह इस तनावपूर्ण माहौल में अमेरिकियों को जोड़ने और हालात को शांत करने का क्या संदेश देना चाहेंगे,तो वेंस ने एक बार फिर मीडिया की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मौजूदा तनाव का एक बड़ा कारण खुद मीडिया की रिपोर्टिंग है। वेंस के अनुसार, “इस मामले की रिपोर्टिंग मीडिया के सबसे बड़े घोटालों में से एक है। मैंने कभी नहीं देखा कि किसी घटना को इतना गलत तरीके से पेश किया गया हो।”

वेंस ने यह भी दावा किया कि कानून प्रवर्तन को मजबूत करना और अधिकारियों को उनके काम के लिए समर्थन देना समाज में स्थिरता लाने में मदद करता है। उन्होंने आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले एक साल में हिंसक अपराधों में 20 प्रतिशत की कमी आई है और इसका मुख्य कारण यही है कि कानून लागू करने वाले अधिकारियों को अपने कर्तव्यों को निभाने के लिए सशक्त किया गया है। उनके मुताबिक,कानून और व्यवस्था मजबूत होने से राजनीतिक और सामाजिक तनाव भी कम होता है।

अपने बयान के अंत में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने देश को “सच्चाई बताने वाले मीडिया” की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य तथ्यों को सही संदर्भ में पेश करना है,न कि सनसनी फैलाना। वेंस ने मीडिया से अपील की कि वे रिपोर्टिंग में ज्यादा सावधानी बरतें और यह संकेत न दें कि एक ऐसा व्यक्ति,जिसने खुद को कार से कुचले जाने से बचाया,वह हत्या का दोषी है। उन्होंने कहा, “यह बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। कृपया थोड़ा ज़्यादा सावधान रहें।”

मिनियापोलिस की इस घटना और उस पर हुई राजनीतिक प्रतिक्रिया ने एक बार फिर अमेरिका में मीडिया,कानून प्रवर्तन और राजनीतिक नेतृत्व के बीच के तनाव को उजागर कर दिया है। जहाँ एक ओर मीडिया स्वतंत्रता और जाँच की जरूरत की बात कर रहा है,वहीं दूसरी ओर सरकार के शीर्ष पदों पर बैठे नेता यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या रिपोर्टिंग के नाम पर सच्चाई से समझौता किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले की जाँच के नतीजे और मीडिया की आगे की कवरेज यह तय करेगी कि यह बहस किस दिशा में जाती है,लेकिन फिलहाल यह मुद्दा अमेरिकी सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में बना हुआ है।