जी20 समिट में मोदी–कार्नी मुलाकात (तस्वीर क्रेडिट@Indianinfoguide)

जी20 समिट में मोदी–कार्नी मुलाकात: भारत-कनाडा रिश्तों में नई रफ़्तार,2030 तक 50 अरब डॉलर द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य

जोहान्सबर्ग,24 नवंबर (युआईटीवी)- जोहान्सबर्ग में जी20 समिट के अवसर पर रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई,जिसने दोनों देशों के बीच संबंधों में नई ऊर्जा भर दी है। हाल के वर्षों में कई उतार-चढ़ाव देखने वाले भारत-कनाडा रिश्तों में यह मुलाकात एक सकारात्मक मोड़ मानी जा रही है। बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने विचार साझा किए और बताया कि दोनों देशों ने आपसी संबंधों को और व्यापक,मजबूत और भविष्य-उन्मुख बनाने पर सहमति जताई है।

मोदी ने लिखते हुए बताया कि जी7 समिट के दौरान कुछ महीने पहले कनाडा में हुई पिछली मुलाकात के बाद से भारत-कनाडा संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि जोहान्सबर्ग की यह बातचीत उस रफ़्तार को आगे बढ़ाने में निर्णायक साबित होगी। दोनों नेताओं ने व्यापार,निवेश,टेक्नोलॉजी,इनोवेशन,ऊर्जा, शिक्षा,रक्षा और अंतरिक्ष जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की। मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग की अपार संभावनाएँ हैं,जिन्हें आने वाले समय में नई ऊँचाइयों तक ले जाया जा सकता है।

इस मुलाकात का सबसे अहम हिस्सा वह घोषणा रही,जिसमें भारत ने 2030 तक कनाडा के साथ द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य न केवल दोनों अर्थव्यवस्थाओं को नई गति देगा,बल्कि उन निवेशकों के लिए भी बड़े अवसर खोलेगा जो भारत जैसे तेजी से उभरते बाज़ार में दीर्घकालिक साझेदारी बनाना चाहते हैं। बैठक में यह भी सामने आया कि कनाडाई पेंशन फंड लगातार भारतीय कंपनियों में निवेश को लेकर गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। हाल के वर्षों में भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि,इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और स्थिर नीति-ढाँचे ने विदेशी संस्थागत निवेशकों को आकर्षित किया है और कनाडा भी इसमें किसी से पीछे नहीं है।

टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में भी दोनों देशों की आकांक्षाएँ एक-दूसरे से मेल खाती हैं। भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था,स्टार्ट-अप इकोसिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,क्वांटम कंप्यूटिंग तथा साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में शोध और नवाचार के अवसरों पर विस्तृत बातचीत की गई। दोनों पक्षों का मानना है कि इन क्षेत्रों में संयुक्त पहल से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल की जा सकती है। ऊर्जा क्षेत्र में भी सहयोग का बड़ा स्कोप है,चाहे वह स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन हो,ग्रीन हाइड्रोजन पर शोध या न्यूक्लियर एनर्जी से जुड़े प्रयास। बैठक के दौरान इन्हीं सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

रक्षा और अंतरिक्ष सहयोग पर भी बैठक में विशेष ध्यान दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री कार्नी ने इन क्षेत्रों में अभी तक अनदेखी संभावनाओं को “अनलॉक” करने पर सहमति जताई। भारत के रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भर बनने के प्रयास और कनाडा के तकनीकी विशेषज्ञता के मेल से दोनों देशों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं। अंतरिक्ष अनुसंधान और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी सहयोग भविष्य में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर,कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद और दोनों देशों के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे,जिसने मुलाकात को और अधिक व्यापक और प्रभावी बनाया। अधिकारियों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि बातचीत केवल औपचारिकता नहीं,बल्कि ठोस नीतिगत दिशा तय करने की मंशा से की गई थी।

भारत-कनाडा संबंधों में यह गर्माहट ऐसे समय आई है,जब कुछ वर्ष पहले दोनों देशों के बीच कुछ राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव पैदा हो गए थे। जून की शुरुआत में कनाडा के कनानास्किस में आयोजित जी7 समिट के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात ने इन तनावों को कम करने और संबंधों को सामान्य करने की दिशा में पहला बड़ा कदम उठाया था। उसी मुलाकात के बाद दोनों देशों ने नए हाई कमिश्नरों की नियुक्ति की। क्रिस्टोफर कूटर को नई दिल्ली में कनाडा का दूत और दिनेश के. पटनायक को ओटावा में भारत का उच्चायुक्त बनाया गया। यह कदम संबंधों की वापसी का स्पष्ट संकेत माना गया था।

जोहान्सबर्ग की इस मुलाकात ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का काम किया है। दोनों पक्षों ने भरोसा जताया कि यह सहयोग आने वाले समय में और गहरा होगा तथा दोनों देशों के नागरिकों,उद्योगों और शिक्षा जगत को इसका लाभ मिलेगा। भारत और कनाडा के बीच जैसे-जैसे नए क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ेगी,वैसे-वैसे दोनों देशों की वैश्विक भूमिका भी अधिक समन्वित और प्रभावशाली दिखाई देगी।

जी20 समिट में मोदी-कार्नी मुलाकात भारत-कनाडा संबंधों को एक नई दिशा देने वाली साबित हुई है,जहाँ पुराने मतभेदों के बादल छंटते दिख रहे हैं और भविष्य की संभावनाएँ स्पष्ट रूप से चमकती नजर आ रही हैं।