नई दिल्ली,26 फरवरी (युआईटीवी)- बिजनेस जगत से जुड़ी बड़ी खबर में उद्योगपति अनिल अंबानी गुरुवार 26 फरवरी 2026 को कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दूसरे दौर की पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश हुए। 66 वर्षीय अंबानी सुबह करीब 10:30 बजे केंद्रीय दिल्ली स्थित ईडी मुख्यालय पहुँचे,जहाँ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत उनका बयान दर्ज किया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, यह पूछताछ उनकी समूह कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) से जुड़े कथित 40,000 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक लोन फ्रॉड की जाँच का हिस्सा है। जाँच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि बैंकों से लिए गए ऋण का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप किया गया था या नहीं। आरोप है कि लोन राशि के इस्तेमाल में गंभीर अनियमितताएँ हुईं और धन के डायवर्जन के संकेत मिले हैं।
बताया जा रहा है कि इससे पहले अगस्त 2025 में भी अनिल अंबानी से इस मामले में लंबी पूछताछ की गई थी। अब दूसरे दौर की पूछताछ में एजेंसी वित्तीय लेनदेन,फंड फ्लो,संबंधित कंपनियों के खातों और समूह की अन्य इकाइयों के बीच हुए ट्रांजैक्शनों पर स्पष्टीकरण चाह रही है। ईडी के सूत्रों के मुताबिक,कई दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
इस मामले में ईडी ने हाल ही में एक विशेष जाँच दल (एसआईटी) का गठन किया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद उठाया गया बताया जा रहा है। एजेंसी ने अदालत को सूचित किया है कि अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (एडीएजी) से जुड़े बैंक लोन फ्रॉड और अन्य वित्तीय अनियमितताओं की जाँच के लिए तीन अलग-अलग मनी लॉन्ड्रिंग मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में कथित तौर पर विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लिए गए ऋण और उनकी वापसी से जुड़े पहलुओं की जाँच की जा रही है।
ईडी की कार्रवाई केवल पूछताछ तक सीमित नहीं रही है। एक दिन पहले ही एजेंसी ने मुंबई स्थित अनिल अंबानी के आलीशान आवास ‘अबोड’ को एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत अस्थायी रूप से अटैच कर लिया। लगभग 3,716 करोड़ रुपये मूल्य की यह 17 मंजिला इमारत मुंबई के पाली हिल इलाके में स्थित है और इसकी ऊँचाई करीब 66 मीटर बताई जाती है। रिपोर्ट्स के अनुसार,यह प्रॉपर्टी वर्ष 2000 के आसपास खरीदी गई थी।
अटैचमेंट की इस कार्रवाई को जाँच प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है,जिसका उद्देश्य कथित रूप से अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को सुरक्षित करना है,ताकि यदि अदालत में आरोप सिद्ध होते हैं,तो उन्हें जब्त किया जा सके। हालाँकि,अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला भारतीय कॉरपोरेट जगत में वित्तीय पारदर्शिता और बैंकिंग व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है। 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अनियमितताओं की जाँच न केवल संबंधित कंपनियों के लिए,बल्कि बैंकिंग क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ईडी की जाँच में इस बात पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि क्या ऋण राशि का उपयोग निर्धारित परियोजनाओं और कारोबारी गतिविधियों के लिए किया गया था या उसे अन्य कंपनियों और निवेशों की ओर मोड़ा गया। एजेंसी संबंधित बैंक अधिकारियों, ऑडिट रिपोर्ट और आंतरिक दस्तावेजों की भी समीक्षा कर रही है।
अनिल अंबानी या उनके समूह की ओर से इस ताजा पूछताछ पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालाँकि,इससे पहले समूह ने विभिन्न मंचों पर यह कहा है कि वह कानून का पालन करता है और जाँच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने कॉरपोरेट और वित्तीय जगत में हलचल पैदा कर दी है। बड़े कारोबारी घरानों से जुड़े मामलों में प्रवर्तन एजेंसियों की सक्रियता यह संकेत देती है कि वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सख्ती बरती जा रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि जाँच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या कोई ठोस कानूनी कार्रवाई सामने आती है। फिलहाल,एजेंसी दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की गहन जाँच में जुटी हुई है,जबकि अनिल अंबानी से पूछताछ का दौर जारी है।
