तेहरान, 13 मार्च (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और हालिया सैन्य घटनाओं के बीच ईरान ने देश के भीतर एकजुटता को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद-रेज़ा आरिफ ने घोषणा की है कि प्रशासन ने अगले सप्ताह को “ईरान के लिए राष्ट्रीय एकता और एकजुटता सप्ताह” घोषित किया है। ईरानी समाचार एजेंसी इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी (आईआरएनए) के अनुसार यह फैसला देश में एकजुटता और राष्ट्रीय भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है।
मोहम्मद-रेजा आरिफ ने कहा कि यह निर्णय ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के पहले संदेश से प्रेरित है। इस संदेश में ईरानी जनता से राष्ट्रीय एकता बनाए रखने और देश की सुरक्षा के लिए एकजुट रहने की अपील की गई थी। अंतर्राष्ट्रीय समाचार एजेंसी शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार यह संदेश दिन के दौरान जारी किया गया,जिसमें ईरान के सामने मौजूद चुनौतियों के बीच जनता की सक्रिय भागीदारी और एकजुटता को सबसे महत्वपूर्ण बताया गया।
आरिफ ने अपने बयान में कहा कि सर्वोच्च नेता के विचारों के अनुसार देश की शक्ति और सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार जनता की सक्रिय मौजूदगी और राष्ट्रीय एकता है। उनके अनुसार ऐसे समय में जब क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की चुनौतियाँ सामने हैं,तब देश के भीतर एकजुटता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य इस सप्ताह के माध्यम से पूरे देश में एकता,सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना है।
इसी दौरान अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी ईरान ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने कहा कि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में शांति और सुरक्षा बनाए रखना ईरान का “जन्मजात अधिकार” है। उन्होंने यह बयान पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया और कहा कि ईरान समुद्री कानून के तहत नौवहन की स्वतंत्रता के सिद्धांत का सम्मान करता है।
इरावानी ने स्पष्ट किया कि ईरान अंतर्राष्ट्रीय समुद्री नियमों के प्रति प्रतिबद्ध है और इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता का समर्थन करता है। हालाँकि,उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात को समझने के लिए क्षेत्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है। उनके अनुसार ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ समेत पूरे इलाके में जो तनाव पैदा हुआ है,वह ईरान की किसी कार्रवाई का परिणाम नहीं बल्कि बाहरी शक्तियों की गतिविधियों का नतीजा है।
ईरानी प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि अमेरिका की नीतियाँ इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से की जा रही गतिविधियाँ न केवल ईरान के खिलाफ हैं,बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर कर रही हैं। उनके अनुसार ईरान के पास अपने बचाव के लिए अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत कदम उठाने का अधिकार है और यदि जरूरत पड़ी तो वह इस अधिकार का उपयोग करेगा।
इस बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने भी ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि इस जलडमरूमध्य को बंद रखने का तरीका लगातार इस्तेमाल किया जाना चाहिए। खामेनेई के इस बयान को क्षेत्रीय राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
दरअसल हालिया तनाव की पृष्ठभूमि 28 फरवरी को हुई उन घटनाओं से जुड़ी है,जब इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान के कई शहरों पर हमला किया था। इन हमलों में राजधानी तेहरान सहित कई स्थानों को निशाना बनाया गया था। रिपोर्टों के अनुसार इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और नागरिकों की मौत हो गई थी।
इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया था। ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला बताया और इसका जवाब देने की चेतावनी दी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और मध्य पूर्व में अमेरिका के कई ठिकानों और संपत्तियों को निशाना बनाया। ईरानी सेना की ओर से किए गए इन हमलों में मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
विश्लेषकों का मानना है कि इन घटनाओं के बाद मध्य पूर्व की स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है। एक ओर ईरान अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा की बात कर रहा है,वहीं दूसरी ओर अमेरिका और उसके सहयोगी देश भी क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं। ऐसे में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का मुद्दा वैश्विक स्तर पर भी चिंता का विषय बन गया है क्योंकि यहाँ किसी भी तरह का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।
ईरान के भीतर “राष्ट्रीय एकता सप्ताह” की घोषणा को भी इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि बाहरी चुनौतियों का सामना करने के लिए देश के भीतर एकजुटता और सामूहिक संकल्प बेहद जरूरी है। यही कारण है कि प्रशासन जनता को एक साथ लाने और राष्ट्रीय भावना को मजबूत करने के लिए इस तरह के कदम उठा रहा है।
फिलहाल क्षेत्र की स्थिति पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। कूटनीतिक हल और बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिशें भी जारी हैं,लेकिन मौजूदा हालात यह संकेत देते हैं कि मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर संघर्ष अभी भी जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में ईरान,अमेरिका और इजरायल के बीच संबंध किस दिशा में जाते हैं,यह वैश्विक राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
