ज्यूरिख,29 अगस्त (युआईटीवी)- भारत के स्टार भाला फेंक खिलाड़ी और ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने एक बार फिर अपने दमदार खेल से देश का नाम रोशन किया। गुरुवार देर रात स्विट्ज़रलैंड के ज्यूरिख स्थित लेट्ज़िग्रुंड स्टेडियम में खेले गए प्रतिष्ठित डायमंड लीग फाइनल में नीरज ने उपविजेता का स्थान हासिल किया। हालाँकि,वह खिताब अपने नाम नहीं कर पाए और जर्मनी के शीर्ष एथलीट जूलियन वेबर ने 91.37 मीटर के शानदार थ्रो के साथ बाजी मार ली।
हरियाणा के पानीपत के रहने वाले नीरज चोपड़ा ने मुकाबले की शुरुआत मजबूत की थी। अपने पहले ही प्रयास में उन्होंने 84.35 मीटर का थ्रो फेंका,जिसने उन्हें शुरुआती दौर में शीर्ष दावेदारों की सूची में ला खड़ा किया,लेकिन तभी जर्मनी के जूलियन वेबर ने अपने पहले ही प्रयास में 91.37 मीटर का थ्रो करते हुए सबको चौंका दिया और सीधे शीर्ष पर पहुँच गए। उस वक्त नीरज तीसरे स्थान पर खिसक गए।
दूसरे प्रयास में नीरज ने 84 मीटर का थ्रो किया,जबकि तीसरे,चौथे और पाँचवें प्रयास में वह फाउल कर बैठे। इन लगातार फाउल्स ने उनके लिए दबाव और बढ़ा दिया। ज्यूरिख की ठंडी शाम और बड़े मंच के बावजूद उन्होंने अपने धैर्य को बनाए रखा और आखिरी,यानी छठे प्रयास में 85.1 मीटर का थ्रो फेंकने में सफल रहे। इस थ्रो ने उन्हें दूसरा स्थान दिलाया और उन्होंने प्रतियोगिता को उपविजेता के तौर पर समाप्त किया।
इस फाइनल में त्रिनिदाद एंड टोबैगो के अनुभवी खिलाड़ी और 2012 लंदन ओलंपिक चैंपियन केशोर्न वालकॉट ने 84.95 मीटर के थ्रो के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। गौरतलब है कि नीरज लगातार तीसरी बार डायमंड लीग फाइनल में उपविजेता रहे हैं। पिछले वर्ष ब्रुसेल्स में हुए फाइनल में भी उन्हें बेहद करीबी अंतर से हार का सामना करना पड़ा था,जब ग्रेनेडा के एंडरसन पीटर्स ने उन्हें सिर्फ एक सेंटीमीटर से पीछे छोड़ दिया था।
Relentless consistency! 💪
Javelin G.O.A.T Neeraj Chopra finishes 2nd for the 3rd time in a row at the #DiamondLeagueFinal 2025 in Zurich🇨🇭 with a best throw of 85.01m, underlining once again his place among the world’s best.
Good effort, Neeraj👏🏻#IndianAthletics… pic.twitter.com/nzVlDDA036
— SAI Media (@Media_SAI) August 28, 2025
नीरज चोपड़ा का यह प्रदर्शन उनके करियर की निरंतरता और दृढ़ता का प्रतीक है। वर्ष 2022 में उन्होंने डायमंड लीग चैंपियन बनकर इतिहास रचा था और किसी भी प्रतियोगिता में यह खिताब जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने थे। संयोग से वह फाइनल भी ज्यूरिख में ही खेला गया था। इसके बाद 2023 और 2024 के संस्करणों में वह क्रमशः यूजीन और ब्रुसेल्स में फाइनल तक पहुँचे,लेकिन दोनों ही मौकों पर उन्हें उपविजेता रहना पड़ा। इस बार भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा,परंतु जूलियन वेबर की अप्रत्याशित लंबी दूरी का थ्रो उनके लिए बड़ी चुनौती साबित हुआ।
ज्यूरिख फाइनल इस साल के डायमंड लीग सीजन का समापन था। दो दिवसीय इस फाइनल से पहले कुल 14 नियमित चरण खेले गए थे। 27 वर्षीय नीरज ने इस सीजन में दो प्रमुख प्रतियोगिताओं में भाग लिया। दोहा में उन्होंने 90.23 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाते हुए दूसरा स्थान हासिल किया,जबकि पेरिस चरण में 88.16 मीटर का थ्रो कर उन्होंने खिताब जीता। इसके बाद उन्होंने सिलेसिया और ब्रुसेल्स चरणों से खुद को बाहर रखा और सीधा फाइनल की तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया।
फाइनल में कुल सात खिलाड़ी शामिल हुए,जिनमें से छह एथलीट दुनिया की शीर्ष 10 रैंकिंग में शामिल थे। इस प्रतियोगिता में विश्व के 43वें नंबर के खिलाड़ी साइमन वीलैंड भी मेजबान देश स्विट्ज़रलैंड की ओर से शामिल हुए। वहीं,जूलियन वेबर और नीरज चोपड़ा के बीच प्रतिस्पर्धा को खासतौर पर देखा जा रहा था,क्योंकि इस सीजन की शुरुआत में दोहा में भी वेबर ने नीरज को पीछे छोड़ा था।
नीरज की यात्रा इस मायने में और भी खास रही कि उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार भारत को मजबूत उपस्थिति दिलाई है। 2018 एशियन गेम्स,2018 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2020 टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले नीरज भारत के उन दुर्लभ खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं,जिनकी पहचान अब वैश्विक स्तर पर एक सच्चे चैंपियन के रूप में है। भाला फेंक में उनकी तकनीक,शारीरिक क्षमता और मानसिक संतुलन ने उन्हें हर मंच पर प्रतिस्पर्धी बनाए रखा है।
ज्यूरिख फाइनल के बाद अब उनकी नजरें सितंबर 2025 में टोक्यो में होने वाली विश्व चैंपियनशिप पर टिक गई हैं। यह चैंपियनशिप उनके लिए बेहद अहम होगी क्योंकि वे अपने खिताब की रक्षा करने के लिए उतरेंगे। ज्यूरिख फाइनल ने उनके लिए एक आदर्श अभ्यास मंच का काम किया है,जहाँ उन्होंने दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा की और अपने खेल में कमजोरियों और मजबूती दोनों को महसूस किया।
नीरज की यह उपलब्धि भारतीय खेलों के लिए भी एक बड़ा संदेश है। एथलेटिक्स,जो लंबे समय तक भारतीय खेलों में अपेक्षाकृत हाशिए पर रहा,अब नीरज जैसे खिलाड़ियों की बदौलत देश के प्रमुख खेलों में शुमार हो रहा है। हरियाणा के छोटे से गाँव से निकलकर विश्व मंच पर भारत का झंडा ऊँचा करने वाले नीरज आज करोड़ों युवाओं के प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं।
हालाँकि,इस बार वह विजेता नहीं बन पाए,लेकिन उनका दूसरा स्थान हासिल करना भी कम बड़ी उपलब्धि नहीं है। खासकर तब,जब प्रतियोगिता में शामिल लगभग सभी खिलाड़ी विश्व स्तर पर शीर्ष स्थानों पर काबिज हैं। जूलियन वेबर की 91.37 मीटर की थ्रो वर्तमान समय में भाला फेंक की दुनिया का एक बड़ा मील का पत्थर है और उसके बाद दूसरे स्थान पर रहना भी नीरज की निरंतरता और क्लास का परिचायक है।
भारतीय खेल प्रेमियों की उम्मीदें अब टोक्यो विश्व चैंपियनशिप पर टिकी हैं। वहाँ नीरज से फिर से गोल्डन थ्रो की उम्मीद की जा रही है। यदि वह अपनी फॉर्म को बरकरार रखते हैं,तो निस्संदेह वह एक बार फिर इतिहास रच सकते हैं। फिलहाल,ज्यूरिख की यह रात भारतीय एथलेटिक्स के लिए गौरव और उम्मीद दोनों लेकर आई है।