इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (तस्वीर क्रेडिट@DhruvMishra1607)

नेतन्याहू की ‘मौत’ की अफवाहों पर विराम: वीडियो जारी कर खुद सामने आए इजरायली प्रधानमंत्री

यरुशलम,17 मार्च (युआईटीवी)- इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर बीते कुछ दिनों से चल रही अफवाहों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी थी। सोशल मीडिया और कुछ विदेशी मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह दावा किया जा रहा था कि नेतन्याहू अब जीवित नहीं हैं या लंबे समय से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आ रहे हैं। हालाँकि,इन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए खुद नेतन्याहू ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए वीडियो जारी कर इन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

ताजा वीडियो में नेतन्याहू को यरुशलम हिल्स के इलाके में आम लोगों के बीच सहज अंदाज में घूमते,मुस्कुराते और बातचीत करते हुए देखा जा सकता है। लगभग 90 सेकंड की इस वीडियो क्लिप के साथ उन्होंने एक संदेश भी साझा किया है,जिसमें उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी सकारात्मक बने रहने और सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया है। वीडियो के साथ लिखा गया संदेश—“दिशानिर्देशों का पालन करें और मिलकर जीतें”—साफ तौर पर मौजूदा हालात में जनता का मनोबल बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

वीडियो में बेंजामिन नेतन्याहू को खुले वातावरण में लोगों से बातचीत करते हुए देखा जा सकता है। वह वहाँ मौजूद लोगों से न केवल सामान्य बातचीत करते हैं,बल्कि उनसे यह भी पूछते हैं कि निकटतम शेल्टर कहाँ स्थित है। यह सवाल मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों की ओर इशारा करता है,जहाँ इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर बना हुआ है। इस दौरान नेतन्याहू लोगों को ताजी हवा लेने,धूप में समय बिताने और मानसिक रूप से मजबूत बने रहने की सलाह भी देते नजर आते हैं।

वीडियो में कुछ महिलाएँ भी दिखाई देती हैं,जो प्रधानमंत्री के साथ तस्वीरें खिंचवाती नजर आती हैं। यह दृश्य इस बात का संकेत देता है कि नेतन्याहू आम लोगों के बीच सामान्य रूप से मौजूद हैं और उनकी सुरक्षा तथा गतिविधियाँ सामान्य बनी हुई हैं। पूरे वीडियो का माहौल काफी सहज और सकारात्मक नजर आता है,जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि हालात चाहे कितने भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों,जीवन को सामान्य बनाए रखना जरूरी है।

दरअसल, इससे एक दिन पहले भी बेंजामिन नेतन्याहू ने एक वीडियो जारी किया था,जिसमें उन्होंने अपनी मौत की अफवाहों का मजाक उड़ाया था। उस वीडियो में वह एक रेस्तरां में कॉफी ऑर्डर करते हुए नजर आए थे और उन्होंने हँसते हुए अपनी दस उंगलियाँ गिनकर यह दिखाया था कि वह पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित हैं। उन्होंने वहाँ मौजूद एक कर्मचारी से इन अफवाहों के बारे में भी पूछा और हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “मुझे कॉफी पसंद है,मुझे अपना देश पसंद है।”

इन अफवाहों की शुरुआत तसनीम न्यूज़ एजेंसी की एक रिपोर्ट से हुई थी,जिसमें दावा किया गया था कि नेतन्याहू काफी समय से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। इसी आधार पर उनकी मौत को लेकर अटकलें लगाई जाने लगीं। एजेंसी ने यह भी दावा किया था कि नेतन्याहू का एक वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किया गया है। इसके समर्थन में उन्होंने यह तर्क दिया था कि वीडियो में नेतन्याहू के एक हाथ में छह उंगलियाँ दिखाई दे रही हैं,जो कथित तौर पर एआई जनरेटेड कंटेंट का संकेत है।

हालाँकि, विशेषज्ञों और कई अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषकों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि यह एक भ्रामक प्रचार अभियान का हिस्सा हो सकता है। उनका मानना है कि वर्तमान में इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते सूचना युद्ध (इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर) भी तेज हो गया है,जहाँ दोनों पक्षों से जुड़ी खबरों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।

इसी संदर्भ में जारी किए गए नए वीडियो को एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है,जिसके जरिए बेंजामिन नेतन्याहू ने न केवल अपनी मौजूदगी साबित की है,बल्कि जनता के बीच विश्वास भी कायम करने की कोशिश की है। इस वीडियो में उनका आत्मविश्वास और सहजता साफ झलकती है,जो इन अफवाहों को पूरी तरह खारिज करने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी देश के शीर्ष नेता को लेकर इस तरह की अफवाहें फैलना न केवल उस देश की आंतरिक स्थिरता के लिए खतरा होता है,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इसका असर पड़ता है। खासकर तब,जब क्षेत्र पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहा हो। ऐसे में नेतन्याहू का सार्वजनिक रूप से सामने आना और सीधे जनता से संवाद करना एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि डिजिटल युग में फर्जी खबरें कितनी तेजी से फैल सकती हैं और किस तरह वे बड़े राजनीतिक मुद्दों को जन्म दे सकती हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव के बीच यह चुनौती और भी गंभीर हो गई है कि सही और गलत जानकारी के बीच अंतर कैसे किया जाए।

फिलहाल,नेतन्याहू द्वारा जारी किए गए वीडियो ने उनकी मौत से जुड़ी सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है। इसके साथ ही यह भी साफ हो गया है कि वह पूरी तरह सक्रिय हैं और देश की बागडोर सँभाले हुए हैं। हालाँकि,इस घटना ने यह जरूर दिखा दिया है कि सूचना के इस दौर में अफवाहें कितनी खतरनाक हो सकती हैं और उनका समय रहते खंडन करना कितना जरूरी है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस तरह की अफवाहों पर रोक लगाने के लिए वैश्विक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं और किस तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अधिक जिम्मेदार बनाया जाता है,ताकि इस तरह की भ्रामक खबरों से बचा जा सके।