नई दिल्ली,18 मार्च (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बड़ा और विवादित दावा करते हुए कहा है कि इजरायल ने पिछले 24 घंटों में ईरान के दो प्रमुख सैन्य नेताओं को मार गिराया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो साझा कर इस ऑपरेशन की जानकारी दी,जिसमें उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई ईरान की सत्ता संरचना को कमजोर करने और वहाँ के लोगों को स्वतंत्र रूप से अपना भविष्य तय करने का अवसर देने के उद्देश्य से की गई है।
नेतन्याहू के अनुसार, इस ऑपरेशन में जिन लोगों को निशाना बनाया गया,उनमें अली लारिजानी का नाम भी शामिल है,जिन्हें उन्होंने ईरान की सत्ता का एक अहम स्तंभ बताया। इसके साथ ही उन्होंने बासिज के कमांडर घोलमरेजा सुलेमानी के मारे जाने का भी दावा किया। नेतन्याहू ने अपने बयान में कहा कि ये वही लोग हैं,जो ईरान के शहरों में आम नागरिकों को डराने और नियंत्रण में रखने का काम कर रहे थे।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में नेतन्याहू अपने रक्षा मंत्री, चीफ ऑफ स्टाफ, मोसाद प्रमुख और वायुसेना प्रमुख के साथ नजर आए। उन्होंने कहा, “पिछले 24 घंटों में हमने इस अत्याचार के दो सबसे बड़े आतंकवादी सरगनाओं को मार गिराया है। हमारा उद्देश्य ईरान के बहादुर लोगों को नवरोज जैसे पवित्र त्योहार को स्वतंत्र रूप से मनाने का अवसर देना है। इसलिए जश्न मनाइए और नवरोज मुबारक हो। हम ऊपर से नजर बनाए हुए हैं।”
इससे पहले 17 मार्च को भी नेतन्याहू ने एक पोस्ट के जरिए इस ऑपरेशन का संकेत दिया था। उन्होंने कहा था कि इजरायली बलों ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाते हुए अली लारिजानी को खत्म कर दिया है। उन्होंने रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को वह संगठन बताया “जो वास्तव में ईरान को चला रहा है।” हालाँकि,इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है और ईरान की ओर से भी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
नेतन्याहू ने अपने बयान में यह भी कहा कि इजरायल की यह रणनीति केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका उद्देश्य ईरान के वर्तमान शासन को कमजोर करना है। उन्होंने कहा कि “हम इस शासन को कमजोर कर रहे हैं,ताकि ईरानी जनता को इसे हटाने का अवसर मिल सके। यह प्रक्रिया तुरंत पूरी नहीं होगी और आसान भी नहीं होगी,लेकिन अगर हम लगातार प्रयास करते रहे,तो ईरान के लोगों को अपनी किस्मत खुद तय करने का मौका मिलेगा।”
इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका की भूमिका का भी जिक्र करते हुए नेतन्याहू ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की है। उन्होंने कहा कि इजरायल और अमेरिका के बीच सैन्य और रणनीतिक स्तर पर गहरा सहयोग है। आगे उन्होंने कहा कि,“हम अपने अमेरिकी मित्रों के साथ मिलकर खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए काम कर रहे हैं। हमारी वायुसेना और नौसेना के बीच तालमेल है और उच्च स्तर पर भी लगातार संवाद बना हुआ है।”
नेतन्याहू ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में और भी बड़ी कार्रवाइयाँ देखने को मिल सकती हैं। उन्होंने कहा, “रणनीतियों के जरिए ही युद्ध जीता जाता है। हम अपनी सारी योजनाएँ सार्वजनिक नहीं कर सकते,लेकिन हमारे पास कई ऐसी रणनीतियाँ हैं,जो सही समय पर सामने आएँगी। आने वाले समय में और भी चौंकाने वाली घटनाएँ हो सकती हैं।”
विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू के ये बयान न केवल ईरान के साथ तनाव को और बढ़ा सकते हैं,बल्कि पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता को जन्म दे सकते हैं। पहले से ही इजरायल और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष संघर्ष जारी है,जिसमें दोनों देश एक-दूसरे पर साइबर हमलों,खुफिया ऑपरेशनों और प्रॉक्सी युद्धों के जरिए दबाव बनाते रहे हैं।
इस बीच,अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं। अगर नेतन्याहू के दावे सही साबित होते हैं,तो यह क्षेत्रीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। वहीं, अगर इन दावों की पुष्टि नहीं होती है,तो यह भी सवाल उठेगा कि क्या यह बयान महज मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
फिलहाल,स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और सभी पक्षों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रियाओं का इंतजार किया जा रहा है। मध्य पूर्व में बढ़ते इस तनाव के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में घटनाक्रम किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या यह टकराव किसी बड़े संघर्ष का रूप लेता है।
