प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

भारत–यूएई संबंधों में नई ऊँचाई : 2032 तक 200 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य,निवेश से लेकर ऊर्जा और एआई तक व्यापक साझेदारी

नई दिल्ली,20 जनवरी (युआईटीवी)- भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई रणनीतिक ऊँचाई पर ले जाते हुए वर्ष 2032 तक आपसी व्यापार को दोगुना कर 200 अरब डॉलर तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच सोमवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में की गई। दोनों नेताओं ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि बीते वर्षों में भारत–यूएई संबंध केवल कूटनीतिक नहीं,बल्कि आर्थिक,रणनीतिक और तकनीकी साझेदारी के रूप में विकसित हुए हैं।

संयुक्त बयान में कहा गया कि वर्ष 2022 में व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) पर हस्ताक्षर के बाद से दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। इसी का परिणाम है कि वित्त वर्ष 2024–25 में भारत–यूएई द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के आँकड़ें तक पहुँच गया है। यह उपलब्धि दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है,क्योंकि यह दर्शाती है कि मुक्त व्यापार और पारस्परिक सहयोग से कितनी तेज गति से आर्थिक संबंध मजबूत हो सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद ने सितंबर 2025 में आयोजित 13वीं उच्चस्तरीय निवेश टास्क फोर्स, दिसंबर 2025 में हुई 16वीं भारत–यूएई संयुक्त आयोग बैठक और पाँचवीं रणनीतिक वार्ता के सकारात्मक परिणामों का स्वागत किया। इन मंचों के माध्यम से व्यापार,निवेश,ऊर्जा,अवसंरचना और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को दिशा मिली है। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि इन संवादों को नियमित और परिणामोन्मुख बनाए रखना दोनों देशों के साझा हित में है।

दोनों देशों ने सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई को आपस में जोड़ने को भविष्य की साझेदारी का एक अहम स्तंभ बताया। इस दिशा में संबंधित टीमों को ‘भारत मार्ट’, ‘वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर’ और ‘भारत–अफ्रीका सेतु’ जैसी पहलों को शीघ्र लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इन पहलों का उद्देश्य भारत और यूएई के एमएसएमई उत्पादों को मध्य पूर्व,पश्चिम एशिया,अफ्रीका और यूरेशिया के बाजारों तक पहुँच देना है,जिससे छोटे और मध्यम उद्यमों को वैश्विक मूल्य शृंखला से जोड़ा जा सके।

निवेश के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच भरोसा लगातार मजबूत हुआ है। नेताओं ने 2024 में हस्ताक्षरित द्विपक्षीय निवेश संधि को एक महत्वपूर्ण कदम बताया,जिससे दोनों देशों में विभिन्न क्षेत्रों में निवेश प्रवाह को सुरक्षा और स्थिरता मिलेगी। इस संदर्भ में गुजरात के धोलेरा में विशेष निवेश क्षेत्र के विकास के लिए संभावित यूएई साझेदारी पर हुई चर्चाओं का भी स्वागत किया गया। धोलेरा को भारत के सबसे महत्वाकांक्षी स्मार्ट औद्योगिक शहरों में से एक माना जाता है और इसमें यूएई की भागीदारी दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक लाभकारी साबित हो सकती है।

प्रस्तावित साझेदारी के तहत धोलेरा में अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा,पायलट प्रशिक्षण स्कूल, मेंटेनेंस–रिपेयर–ओवरहॉल सुविधा,ग्रीनफील्ड बंदरगाह,स्मार्ट शहरी टाउनशिप, रेलवे कनेक्टिविटी और ऊर्जा अवसंरचना जैसे रणनीतिक ढाँचों के विकास की परिकल्पना की गई है। इन परियोजनाओं से न केवल क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी, बल्कि रोजगार सृजन और तकनीकी हस्तांतरण को भी बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने पहले नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत स्थापित इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की सफलता को रेखांकित करते हुए यूएई के सॉवरेन वेल्थ फंड्स को 2026 में प्रस्तावित दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि भारत में अवसंरचना विकास के लिए दीर्घकालिक और स्थिर पूँजी की आवश्यकता है,जिसमें यूएई की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकती है।

वित्तीय सहयोग के क्षेत्र में भी दोनों देशों के संबंध नई मजबूती की ओर बढ़ रहे हैं। नेताओं ने गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी यानी गिफ्ट सिटी में डीपी वर्ल्ड और फर्स्ट अबू धाबी बैंक की शाखाओं की स्थापना का स्वागत किया। विशेष रूप से एफएबी की गिफ्ट सिटी शाखा को भारतीय कंपनियों और निवेशकों के लिए जीसीसी,मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के बाजारों से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण सेतु बताया गया।

खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भारत–यूएई सहयोग को और मजबूत करने पर भी सहमति बनी। नेताओं ने कहा कि सतत आपूर्ति शृंखलाएँ,सार्वजनिक–निजी भागीदारी,नवाचार और ज्ञान के आदान–प्रदान की भूमिका राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत,जो कृषि उत्पादन में विश्व के अग्रणी देशों में है और यूएई,जो खाद्य आयात पर निर्भर है,इस क्षेत्र में एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं।

ऊर्जा क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग पर संतोष व्यक्त करते हुए दोनों नेताओं ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा में यूएई के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और एडीएनओसी गैस के बीच हुए 10 वर्षीय एलएनजी आपूर्ति समझौते का स्वागत किया,जिसके तहत वर्ष 2028 से प्रति वर्ष 0.5 मिलियन टन एलएनजी की आपूर्ति की जाएगी। यह समझौता भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि दोनों देश उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों में साझेदारी की संभावनाएँ तलाशेंगे। इसमें बड़े परमाणु रिएक्टरों के साथ-साथ स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स शामिल हैं,जिन्हें भविष्य की स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा समाधान के रूप में देखा जा रहा है। इसके साथ ही सीमा-पार भुगतान को तेज,सस्ता और अधिक प्रभावी बनाने के लिए राष्ट्रीय भुगतान प्लेटफॉर्म को आपस में जोड़ने पर भी सहमति बनी,जिससे व्यापार और निवेश को और सुगमता मिलेगी।

अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग को गहराने पर भी दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की। संयुक्त भारत–यूएई अंतरिक्ष मिशनों को सक्षम बनाने,वाणिज्यिक सेवाओं के विस्तार और अनुसंधान में साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसके अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने,भारत में सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर और डेटा सेंटर स्थापित करने की संभावनाओं पर भी सकारात्मक चर्चा हुई।

यह बैठक भारत और यूएई के बीच बहुआयामी साझेदारी को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। 2032 तक 200 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य के साथ दोनों देशों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आने वाले दशक में यह संबंध केवल क्षेत्रीय ही नहीं,बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक मजबूत आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी के रूप में उभरेंगे।