नई दिल्ली,9 अगस्त (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से टेलीफोन पर महत्वपूर्ण बातचीत की,जिसमें यूक्रेन संकट से जुड़े हालिया घटनाक्रम,द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती और आने वाले उच्च-स्तरीय दौरों पर चर्चा हुई। बातचीत के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को यूक्रेन से जुड़े ताज़ा घटनाक्रम और चल रही वार्ताओं की विस्तृत जानकारी दी। इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने उनका आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत की स्थायी नीति यह रही है कि किसी भी संघर्ष का समाधान केवल शांतिपूर्ण संवाद और कूटनीतिक प्रयासों से ही निकाला जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंसा और युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी हल नहीं हैं और वैश्विक शांति व स्थिरता के लिए सभी पक्षों को आपसी समझ और सहयोग की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
दोनों नेताओं ने भारत-रूस के विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की मजबूती पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे और आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने आपसी द्विपक्षीय एजेंडे की प्रगति की समीक्षा की और व्यापार,ऊर्जा,रक्षा, विज्ञान-तकनीक,अंतरिक्ष और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देने पर चर्चा की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है,जब antaपरिदृश्य लगातार बदल रहा है और वैश्विक राजनीति में नए समीकरण बन रहे हैं। इस परिप्रेक्ष्य में भारत और रूस के बीच मजबूत और भरोसेमंद साझेदारी का महत्व और बढ़ जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को इस वर्ष के अंत में भारत आने के लिए आमंत्रित किया, जब 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। यह सम्मेलन दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय संवाद और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने का अवसर होगा। मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भी बातचीत की जानकारी साझा करते हुए लिखा, “मेरे मित्र राष्ट्रपति पुतिन से बहुत ही अच्छी और विस्तृत बातचीत हुई। यूक्रेन को लेकर हालिया घटनाक्रम साझा करने के लिए उनका आभार व्यक्त किया। हमने द्विपक्षीय एजेंडे की प्रगति की समीक्षा की और भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस वर्ष के अंत में भारत में राष्ट्रपति पुतिन की मेजबानी की प्रतीक्षा है।”
राष्ट्रपति पुतिन की पिछली भारत यात्रा 6 दिसंबर 2021 को हुई थी, जब वह 21वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली आए थे। उस समय दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौते हुए थे। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष रूस के दो अहम दौरे किए। जुलाई 2024 में उन्होंने 22वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया, जबकि अक्टूबर 2024 में वह कजान में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। इन दौरों के दौरान भी दोनों नेताओं ने कई बार आमने-सामने बैठकर द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और रूस के बीच यह लगातार उच्च-स्तरीय संपर्क इस बात का प्रमाण है कि दोनों देश न केवल पारंपरिक मित्र हैं, बल्कि बदलते वैश्विक हालात में भी एक-दूसरे के रणनीतिक हितों को समझते और सहयोग करते हैं। रूस, भारत के लिए ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत है, जबकि भारत, रूस के लिए एशिया में एक भरोसेमंद और प्रभावशाली साझेदार है। यूक्रेन संकट के बीच भी भारत ने संतुलित रुख अपनाते हुए संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता दी है, जिसने उसे वैश्विक स्तर पर एक जिम्मेदार शक्ति के रूप में स्थापित किया है।
शुक्रवार की बातचीत में, दोनों नेताओं ने न केवल मौजूदा मुद्दों पर विचार-विमर्श किया, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि आने वाले समय में द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा किया जाए। यह स्पष्ट है कि भारत-रूस संबंध सिर्फ औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समय की कसौटी पर खरे उतरे एक गहरे और स्थायी विश्वास पर आधारित हैं। इस वर्ष के अंत में होने वाला 23वां वार्षिक शिखर सम्मेलन न केवल दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा का संचार करेगा, बल्कि यह संदेश भी देगा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद मित्रता और रणनीतिक सहयोग को कायम रखा जा सकता है।
भारत और रूस के रिश्तों की यह निरंतर प्रगति यह दर्शाती है कि आने वाले वर्षों में भी यह साझेदारी वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी। दोनों देशों के नेतृत्व की प्रतिबद्धता और जनता के बीच ऐतिहासिक मित्रता इस संबंध को और मजबूत करने की आधारशिला है। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की शुक्रवार की बातचीत एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी, जो भविष्य की दिशा तय करेगी।
