वाशिंगटन,8 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी के नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। अमेरिकी सीनेट ने सर्जियो गोर को भारत में नया अमेरिकी राजदूत नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नामांकित सर्जियो गोर अब भारत में अमेरिका के शीर्ष राजनयिक के रूप में कार्यभार संभालेंगे। इस नियुक्ति के साथ ही गोर न केवल भारत-अमेरिका संबंधों के नए युग के प्रतीक बनेंगे,बल्कि 38 वर्ष की आयु में वह भारत में अब तक के सबसे कम उम्र के अमेरिकी राजदूत भी बन गए हैं।
सर्जियो गोर का नाम अमेरिका की सीनेट में कुल 107 उम्मीदवारों में शामिल था,जिनमें से गोर को बहुमत के साथ मंजूरी दी गई। उनका नामांकन ट्रंप ने इसी वर्ष अगस्त में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर किया था। इस पोस्ट में राष्ट्रपति ट्रंप ने लिखा था, “दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले क्षेत्र में अमेरिका के प्रतिनिधि के रूप में मुझे एक ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता है,जिस पर मैं पूर्ण विश्वास कर सकूँ और जो मेरे एजेंडे को आगे बढ़ाने में सक्षम हो। सर्जियो गोर एक अद्भुत राजदूत साबित होंगे।”
राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान से यह स्पष्ट था कि गोर न केवल उनके करीबी सहयोगी हैं,बल्कि उनकी प्रशासनिक नीतियों के भी दृढ़ समर्थक हैं। सर्जियो गोर व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति कार्मिक कार्यालय के निदेशक के रूप में कार्य कर चुके हैं,जहाँ उन्हें ट्रंप सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान लगभग 4,000 से अधिक पदों की जाँच और नियुक्ति की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस भूमिका में गोर ने अपनी संगठनात्मक दक्षता,रणनीतिक सोच और राजनीतिक सूझबूझ का परिचय दिया था,जिसने उन्हें ट्रंप के सबसे भरोसेमंद सलाहकारों में शामिल कर दिया।
गोर को केवल राजनयिक अनुभव के आधार पर नहीं,बल्कि उनकी राजनीतिक समझ और प्रशासनिक कुशलता के लिए भी जाना जाता है। जनवरी 2025 में उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के साथ ग्रीनलैंड का दौरा किया था,जहाँ अमेरिकी प्रशासन डेनमार्क के स्वामित्व वाले क्षेत्र पर अमेरिकी रणनीतिक उपस्थिति को लेकर समर्थन जुटा रहा था। यह यात्रा उनके अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक कौशल का प्रमाण थी।
सितंबर में अपनी पुष्टिकरण सुनवाई के दौरान सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी की आधारशिला” बताया। उन्होंने कहा, “भारत की भौगोलिक स्थिति,आर्थिक प्रगति और सैन्य क्षमताएँ इसे क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि का स्तंभ बनाती हैं। यह हमारे साझा सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाने और एशिया में संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।”
गोर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के साथ अमेरिका के संबंध सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता तक सीमित नहीं रहेंगे,बल्कि यह साझेदारी रक्षा,व्यापार,ऊर्जा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में और गहराई तक जाएगी। उन्होंने कहा, “मैं भारत के साथ रक्षा सहयोग को प्राथमिकता दूँगा। इसमें संयुक्त सैन्य अभ्यासों का विस्तार,रक्षा प्रणालियों के सह-विकास और सह-उत्पादन को बढ़ावा देना और महत्वपूर्ण रक्षा सौदों को अंतिम रूप देना शामिल होगा।”
उनके इस बयान को भारतीय रणनीतिक हलकों में अत्यंत सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि गोर का दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की अमेरिकी नीति से मेल खाता है। भारत और अमेरिका के बीच पहले से ही क्वाड मंच पर मजबूत सहयोग है और गोर की नियुक्ति इस साझेदारी को और मज़बूत करेगी।
इसके अलावा गोर ने आर्थिक और तकनीकी सहयोग पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत की 1.4 अरब की जनसंख्या और तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग अमेरिकीनिवेश के लिए विशाल अवसर प्रदान करता है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,फार्मास्यूटिकल्स और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा, “भारत न केवल एक बड़ा बाजार है,बल्कि वैश्विक नवाचार और आपूर्ति श्रृंखला का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। हमें मिलकर काम करना चाहिए,ताकि दोनों देशों को अधिकतम आर्थिक लाभ मिल सके।”
गोर ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान न्यूयॉर्क में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से भी मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद अमेरिकी विदेश विभाग के दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के ब्यूरो ने बयान जारी करते हुए कहा था कि दोनों नेता भारत-अमेरिका संबंधों की सफलता को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
अमेरिकी प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि गोर दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के लिए विशेष दूत के रूप में भी कार्य करेंगे। इसका अर्थ यह है कि वे न केवल भारत बल्कि पाकिस्तान,अफगानिस्तान,बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल जैसे देशों में भी अमेरिकी नीति समन्वय में भूमिका निभाएँगे। इस दृष्टि से गोर की भूमिका सिर्फ एक राजदूत की नहीं बल्कि पूरे क्षेत्रीय कूटनीतिक रणनीति के प्रमुख चेहरे की होगी।
भारत और अमेरिका के बीच हाल के वर्षों में जो संबंध विकसित हुए हैं,वे रक्षा, व्यापार,तकनीकी नवाचार और आपसी विश्वास के स्तंभों पर आधारित हैं। दोनों देशों ने कई संयुक्त परियोजनाओं पर काम शुरू किया है,जैसे रक्षा उपकरणों का सह-उत्पादन,सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग सहयोग और स्वच्छ ऊर्जा तकनीक में साझेदारी। सर्जियो गोर की नियुक्ति इन पहलों को गति देने में अहम साबित हो सकती है।
ट्रंप प्रशासन के तहत,अमेरिका का फोकस “अमेरिका फर्स्ट” नीति पर रहा है,परंतु सर्जियो गोर के वक्तव्यों से यह संकेत मिलता है कि वह भारत के साथ साझेदारी को प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग की दृष्टि से देखते हैं। उन्होंने कहा था, “भारत और अमेरिका के साझा हित केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं,बल्कि यह लोकतंत्र,स्वतंत्रता और समानता जैसे मूल्यों पर आधारित हैं। हमें मिलकर यह सुनिश्चित करना है कि एशिया और विश्व में स्थिरता बनी रहे।”
विश्लेषकों का मानना है कि भारत में सर्जियो गोर की नियुक्ति आने वाले वर्षों में भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देगी। एक ओर जहाँ उनका ट्रंप से करीबी संबंध उन्हें नीति-निर्माण के केंद्र में रखेगा,वहीं दूसरी ओर भारत के साथ उनके सकारात्मक दृष्टिकोण से द्विपक्षीय सहयोग और भी मजबूत होगा।
38 वर्षीय सर्जियो गोर की कहानी इस बात का उदाहरण है कि किस तरह युवा और ऊर्जावान नेतृत्व अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति को नई परिभाषा दे सकता है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह भारत में अपने कार्यकाल को किस दिशा में ले जाते हैं — क्या वह पारंपरिक राजनयिक रवैये को बदलकर भारत-अमेरिका संबंधों में नई ऊर्जा का संचार कर पाएँगे।
फिलहाल इतना तय है कि सर्जियो गोर की नियुक्ति दोनों देशों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है,अमेरिका के लिए दक्षिण एशिया में अपना प्रभाव बढ़ाने का मौका और भारत के लिए एक भरोसेमंद साझेदार के साथ वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को और मजबूत करने का अवसर।
