न्यूयॉर्क,2 जनवरी (युआईटीवी)- नए साल के पहले ही दिन न्यूयॉर्क शहर ने इतिहास रचते हुए अपने नए मेयर के रूप में भारतीय मूल के जोहरान ममदानी का स्वागत किया। यह क्षण न केवल अमेरिकी राजनीति के लिए महत्वपूर्ण रहा,बल्कि दक्षिण एशियाई समुदाय के लिए भी गर्व का विषय बन गया। जोहरान ममदानी ने सिटी हॉल में कुरान पर हाथ रखकर शपथ ली और इस तरह वे न्यूयॉर्क शहर के पहले मुस्लिम और दक्षिण एशियाई मूल के मेयर बन गए। उनकी प्रतिक्रिया,भाषण और समारोह के विभिन्न क्षणों ने दिखाया कि यह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं,बल्कि सामाजिक समावेशन और सांस्कृतिक विविधता का उत्सव भी है।
शपथग्रहण समारोह में उनके पारिवारिक संबंधों और सांस्कृतिक जड़ों की झलक स्पष्ट दिखाई दी। जोहरान ने अपने संबोधन की शुरुआत माता-पिता और परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए की। उन्होंने कंपाला से लेकर दिल्ली तक अपने परिवार के सदस्यों को धन्यवाद दिया और कहा कि जो कुछ भी वे आज हैं,वह अपने माता-पिता और दादा-दादी के मार्गदर्शन का परिणाम है। शपथ लेते समय उन्होंने तीन कुरान का इस्तेमाल किया,जिनमें से दो उनके दादा-दादी की थीं। यह पल उनके लिए भावनात्मक और प्रतीकात्मक दोनों था—यह दर्शाता हुआ कि राजनीति में आगे बढ़ते हुए भी वे अपनी विरासत से गहराई से जुड़े हुए हैं।
समारोह की सबसे खास बात यह रही कि मंच पर अलग-अलग धर्मों के प्रतिनिधि एक साथ खड़े दिखाई दिए। एक हिंदू नेता,एक सिख प्रतिनिधि,ईसाई और यहूदी धर्मगुरु—सभी ने उपस्थिति दर्ज कराई। न्यूयॉर्क से आए एक इमाम ने प्रार्थना में अल्लाह का नाम लिया। यह दृश्य अपने आप में अमेरिकी समाज की बहुलवादी पहचान का प्रतीक था,जहाँ विभिन्न संस्कृतियाँ और आस्थाएँ समान सम्मान के साथ साथ-साथ चलती हैं।
जोहरान ममदानी ने अपने भाषण में इस विविधता को ही न्यूयॉर्क की असली ताकत बताया। उन्होंने कहा कि यह शहर उन लोगों से बनता है,जो रोज मेहनत करते हैं,जो मजदूर हैं,टैक्सी चलाते हैं,भोजन परोसते हैं और सपने देखते हैं। उन्होंने खास तौर पर उन समुदायों का ज़िक्र किया,जो परदेश में रहकर अपनी परंपराओं को संजोए रखते हैं और साथ ही शहर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मज़दूरों और छोटे वर्ग के कामगारों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आगामी कार्यकाल में वे ऐसा न्यूयॉर्क बनाना चाहते हैं,जहाँ हर व्यक्ति सम्मान और सुरक्षा के साथ जी सके।
इस समारोह में सांस्कृतिक रंग भी खूब दिखा। पंजाबी-इंग्लिश फ्यूज़न गानों के लिए मशहूर कलाकार बब्बुलिशियस ने स्टेज पर ऊर्जावान प्रस्तुति दी। गुलाबी पगड़ी पहने बब्बुलिशियस जब ‘गड्डी रेड चैलेंजर’ पर झूमे,तो दर्शकों के साथ-साथ स्वयं मेयर ममदानी भी तालियों से उनका उत्साह बढ़ाते नज़र आए। सोशल मीडिया पर साझा किए गए उनके वीडियो ने पूरे इंटरनेट पर हलचल पैदा कर दी और दक्षिण एशियाई समुदाय ने इसे अपने लिए एक प्रतीकात्मक उपलब्धि के रूप में देखा।
जोहरान ममदानी की निजी यात्रा भी उतनी ही दिलचस्प रही है। उनका जन्म युगांडा में हुआ। शुरुआती पाँच साल वहीं बिताए,फिर वे दक्षिण अफ्रीका चले गए,जहाँ उनके पिता,प्रख्यात प्रोफेसर महमूद ममदानी,विश्वविद्यालय में अध्यापन कर रहे थे। सात वर्ष की आयु में वे न्यूयॉर्क पहुँचे,जहाँ उन्होंने शिक्षा प्राप्त की और धीरे-धीरे सामाजिक सक्रियता की ओर बढ़े। उनके माता-पिता—फिल्म निर्माता मीरा नायर और विद्वान महमूद ममदानी ने हमेशा उन्हें सामाजिक न्याय,समानता और संवाद के मूल्यों से परिचित कराया। यही कारण है कि आज उनकी राजनीतिक सोच में बहुसांस्कृतिकता और सामाजिक न्याय प्रमुख स्थान रखते हैं।
रोचक बात यह भी है कि उनका पूरा नाम क्वामे जोहरान ममदानी है। यह नाम घाना के पूर्व राष्ट्रपति क्वामे नक्रूमा के सम्मान में रखा गया था,जो अफ्रीकी स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। इस नाम से उनकी अफ्रीकी जड़ों और वैश्विक दृष्टि—दोनों की झलक मिलती है। उनकी पत्नी रमा सवाफ दुवाजी सीरियाई मूल की कलाकार हैं। अमेरिका में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने अपना बचपन खाड़ी देशों में बिताया,जिससे परिवार की सांस्कृतिक विविधता और व्यापक हो जाती है।
अपने भाषण के दौरान ममदानी ने उस समय का भी जिक्र किया,जब समीना नाम की एक पाकिस्तानी महिला ने उनसे कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा ने लोगों के दिल बदल दिए हैं। उन्होंने इसे इस बात का संकेत बताया कि जब राजनीति में संवेदना,संवाद और बराबरी की भावना शामिल होती है,तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे सत्ता के बजाय सेवा की राजनीति में विश्वास रखते हैं और आने वाले समय में जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करेंगे।
इस पूरे आयोजन ने एक व्यापक संदेश दिया कि दुनिया के सबसे प्रभावशाली शहरों में से एक के नेतृत्व में अब वह व्यक्ति खड़ा है,जिसकी पहचान एक ही देश या एक ही संस्कृति से नहीं बँधी। वह कई संस्कृतियों का संगम है,जिसने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहकर जीवन को समझा है और अब उसी अनुभव के साथ शहर का नेतृत्व करने जा रहा है।
न्यूयॉर्क जैसे विशाल शहर की चुनौतियाँ कम नहीं हैं—आवास,महँगाई,रोजगार,अपराध और प्रवासी आबादी के प्रश्न हमेशा चर्चा में रहते हैं,लेकिन ममदानी ने अपने पहले ही संबोधन में यह साफ कर दिया कि वे इन मुद्दों को नीतिगत संवेदनशीलता और सामुदायिक भागीदारी के साथ हल करना चाहते हैं। उनका मानना है कि यदि निर्णय-निर्माण में समुदाय की आवाज़ सुनी जाए,तो समाधान टिकाऊ और न्यायपूर्ण बन सकते हैं।
शपथ ग्रहण के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें बधाइयाँ दीं। कई दक्षिण एशियाई और मुस्लिम नागरिकों ने लिखा कि वे खुद को न्यूयॉर्क की मुख्यधारा का हिस्सा महसूस कर रहे हैं। वहीं,कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी जीत वैश्विक आप्रवासी राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत है,जहाँ पहचान और नीतियों के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिश दिखाई देती है।
जोहरान ममदानी का मेयर बनना केवल एक राजनीतिक घटना नहीं,बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक बदलाव का संकेत भी है। यह इस बात का प्रमाण है कि मेहनत,शिक्षा और सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण—व्यक्ति को सीमाओं से परे पहचान दिला सकते हैं। अब देखना होगा कि वे अपने इस ऐतिहासिक अवसर को कैसे काम में लाते हैं और न्यूयॉर्क को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं,लेकिन इतना तय है कि उनकी शपथ-ग्रहण की यह घड़ी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
