न्यूयॉर्क,1 जनवरी (युआईटीवी)- अमेरिका के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय तब जुड़ गया,जब डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट नेता जोहरान ममदानी ने गुरुवार सुबह न्यूयॉर्क शहर के 112वें मेयर के रूप में शपथ ली। नवंबर 2025 के चुनावों में उन्होंने पहली बार चुनाव लड़ते हुए जीत दर्ज की थी और इसी के साथ वे न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर बनने का गौरव भी प्राप्त कर चुके थे। नए साल की शुरुआत के अवसर पर आयोजित इस शपथ ग्रहण ने न केवल शहर की राजनीति बल्कि अमेरिकी सामाजिक संरचना में भी प्रतीकात्मक बदलाव का संदेश दिया है।
शपथग्रहण समारोह अपेक्षाकृत सादा और सीमित रखा गया,हालाँकि शाम को एक बड़े सार्वजनिक समारोह का आयोजन प्रस्तावित है। विशेष बात यह रही कि ममदानी ने कुरान हाथ में रखकर शपथ ली—यह न्यूयॉर्क के किसी मेयर द्वारा ऐसा पहली बार किया जाना है। इस प्रतीकात्मक क्षण ने विविधता,प्रतिनिधित्व और धार्मिक स्वतंत्रता की अमेरिकी अवधारणा को नई अभिव्यक्ति दी। ममदानी ने शपथ के बाद कहा कि यह उनके जीवन का बड़ा सम्मान व सौभाग्य है और वे इस विश्वास के साथ कार्यभार संभाल रहे हैं कि न्यूयॉर्क को और अधिक समानता व अवसरों वाला शहर बनाया जा सकता है।
जोहरान ममदानी की कहानी केवल राजनीतिक उपलब्धि तक सीमित नहीं है,बल्कि यह बहु-सांस्कृतिक विरासत की भी कहानी है। उनका जन्म 18 अक्टूबर 1991 को युगांडा के कंपाला शहर में हुआ। उनके पिता महमूद ममदानी युगांडा के जाने-माने शिया मुस्लिम शिक्षाविद हैं,जिनकी जड़ें भारत से जुड़ी हैं,जबकि उनकी माँ मशहूर भारतीय फिल्म निर्माता मीरा नायर हैं,जो हिंदू परिवार से आती हैं। इस तरह उनका बचपन ही विविध संस्कृतियों,भाषाओं और परंपराओं के बीच गुजरा।
युगांडा से दक्षिण अफ्रीका और फिर न्यूयॉर्क तक का सफर तय करते हुए ममदानी ने अपनी शिक्षा और विचारधारा को गढ़ा। उन्होंने अमेरिका में बैंक स्ट्रीट स्कूल फॉर चिल्ड्रन और ब्रोंक्स हाई स्कूल ऑफ साइंस में पढ़ाई की और आगे चलकर 2014 में बॉडॉइन कॉलेज से अफ्रीकाना स्टडीज में डिग्री हासिल की। यही वह दौर था,जब उन्होंने सामाजिक न्याय,नस्लीय समानता और श्रमिक अधिकारों के मुद्दों पर गहन रुचि विकसित की। 2017 में वे “डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका” से जुड़े और यहीं से उनके संगठित राजनीतिक सफर की वास्तविक शुरुआत हुई।
शपथ ग्रहण के स्थान ने भी इस आयोजन को खास बना दिया। ममदानी ने मैनहट्टन के सिटी हॉल पार्क के नीचे स्थित पुराने सिटी हॉल सबवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर शपथ ली—एक ऐसा स्टेशन,जो 1945 में बंद कर दिया गया था और आज भी आम जनता के लिए बंद रहता है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार,यह स्टेशन न्यूयॉर्क के शुरुआती 28 सबवे स्टेशनों में से एक था और 1904 में खुलने के बाद शहर के विकास और आधुनिकीकरण का प्रतीक माना गया। इस ऐतिहासिक और लंबे समय से निष्क्रिय स्थान पर शपथ लेकर ममदानी ने जैसे यह संदेश दिया कि अब शहर के पुराने ढाँचे में भी नए विचार और नई दिशाएँ जोड़ी जाएँगी।
शपथग्रहण के दौरान उनके परिवार के सबसे करीबी सदस्य मौजूद थे। उनकी पत्नी और कलाकार रमा दुवाजी,उनकी माँ मीरा नायर और पिता महमूद ममदानी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। शपथ दिलाने का दायित्व न्यूयॉर्क स्टेट अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स ने निभाया,जिन्हें ममदानी अपनी राजनीतिक प्रेरणा बताते हैं। यह दृश्य इस बात का प्रतीक बना कि परिवार,समुदाय और लोकतांत्रिक संस्थाएँ कैसे मिलकर सार्वजनिक जीवन में नई धारा का निर्माण कर सकती हैं।
न्यूयॉर्क जैसे बहु-जातीय और बहु-धार्मिक शहर में एक मुस्लिम मेयर का चुनाव अपने आप में सामाजिक स्वीकार्यता और राजनीतिक परिपक्वता का संकेत माना जा रहा है। ममदानी की जीत को प्रवासी समुदायों,युवाओं और श्रमिक वर्ग के बड़े हिस्से का समर्थन मिला। चुनाव के दौरान उन्होंने किफायती आवास,बेहतर सार्वजनिक परिवहन,पुलिस सुधार,जलवायु अनुकूल नीतियों और आय असमानता घटाने जैसी प्राथमिकताओं पर जोर दिया। अब पद सँभालने के साथ ही उन पर इन वादों को नीतिगत परिणामों में बदलने की जिम्मेदारी आ गई है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि ममदानी का कार्यकाल कई मायनों में चुनौतीपूर्ण भी रहेगा। न्यूयॉर्क महामारी के बाद की आर्थिक पुनर्बहाली,बढ़ती जीवन-यापन लागत और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे मुद्दों से जूझ रहा है। इसके साथ ही शहर की जटिल प्रशासनिक संरचना और विभिन्न हित समूहों के बीच संतुलन बनाना किसी भी नए मेयर के लिए आसान कार्य नहीं होता,लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममदानी का ग्रासरूट्स अनुभव और समुदाय-आधारित राजनीति उन्हें इन मुश्किलों से निपटने का एक अलग दृष्टिकोण दे सकता है।
भारत के साथ उनके संबंधों की बात करें तो यह जुड़ाव सांस्कृतिक और भावनात्मक दोनों स्तरों पर दिखाई देता है। मीरा नायर की फिल्मों को भारतीय सिनेमा में सामाजिक यथार्थ और अंतर्राष्ट्रीय पहचान के लिए जाना जाता है। ‘सलाम बॉम्बे’, ‘मानसून वेडिंग’, ‘द नेमसेक’, ‘कामसूत्र: द टेल ऑफ लव’ और ‘मिसिसिपी मसाला’ जैसी फिल्मों ने भारतीय समाज,प्रवासी जीवन और सांस्कृतिक टकरावों को दुनिया के सामने रखा। इस पृष्ठभूमि ने ममदानी को भी विविधता में एकता और सामाजिक न्याय की दृष्टि दी,जिसका प्रभाव उनकी राजनीति में स्पष्ट दिखाई देता है।
शपथ लेने के तुरंत बाद ममदानी ने कहा कि यह अवसर न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है,बल्कि उन सभी लोगों की जीत है,जिन्होंने न्यूयॉर्क को हर व्यक्ति के लिए अवसरों का शहर बनाने का सपना देखा है। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश होगी कि शहर के निर्णयों में आम नागरिकों की आवाज और अधिक मजबूत तरीके से शामिल हो। उनका यह संदेश खासकर उन समुदायों के लिए उम्मीद लेकर आया है,जो अक्सर खुद को निर्णय-प्रक्रिया से बाहर महसूस करते थे।
जैसे-जैसे शाम के सार्वजनिक समारोह की तैयारी होती रही,शहर में चर्चा का विषय यही रहा कि अब न्यूयॉर्क किस दिशा में आगे बढ़ेगा। क्या सामाजिक न्याय और आर्थिक समानता पर आधारित मॉडल वास्तव में धरातल पर उतर पाएगा? क्या विविधता और प्रतिनिधित्व के इस प्रतीकात्मक क्षण को नीतियों और कार्यक्रमों के जरिए स्थायी रूप दिया जा सकेगा? इन सभी सवालों के जवाब समय के साथ सामने आएँगे।
फिलहाल इतना तय है कि जोहरान ममदानी ने शपथ लेकर इतिहास रचा है—न केवल इसलिए कि वे न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर या सबसे कम उम्र के मेयर बने, बल्कि इसलिए भी कि उन्होंने शहर की राजनीति में नई ऊर्जा और नए संवाद के द्वार खोले हैं। उनका कार्यकाल यह साबित करेगा कि क्या यह बदलाव स्थायी दिशा लेता है या केवल एक ऐतिहासिक क्षण बनकर रह जाता है।
