डी. गुकेश (तस्वीर क्रेडिट@BansuriSwaraj)

नॉर्वे शतरंज 2025: डी. गुकेश ने कार्लसन को हराकर दर्ज की ऐतिहासिक जीत,प्रधानमंत्री मोदी ने की गुकेश प्रशंसा

नई दिल्ली,3 जून (युआईटीवी)- नॉर्वे में चल रहे प्रतिष्ठित नॉर्वे शतरंज 2025 टूर्नामेंट में भारत के किशोर शतरंज खिलाड़ी डी. गुकेश ने एक ऐतिहासिक जीत हासिल की है। 19 वर्षीय गुकेश ने टूर्नामेंट के छठे दौर में विश्व नंबर एक और पाँच बार के विश्व चैंपियन मैग्नस कार्लसन को हराकर न केवल एक व्यक्तिगत मील का पत्थर हासिल किया,बल्कि भारतीय शतरंज के लिए भी एक गौरवपूर्ण क्षण प्रस्तुत किया।

गुकेश की इस शानदार जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी खुशी व्यक्त की और गुकेश की प्रशंसा करते हुए उन्होंने लिखा, “गुकेश की असाधारण उपलब्धि! उन्हें सर्वश्रेष्ठ पर विजय पाने के लिए बधाई। नॉर्वे शतरंज 2025 के राउंड 6 में मैग्नस कार्लसन के खिलाफ उनकी पहली जीत उनकी प्रतिभा और समर्पण को दर्शाती है। आगे की यात्रा में उनकी निरंतर सफलता की कामना करता हूँ।”


प्रधानमंत्री के इस संदेश से यह स्पष्ट है कि देश को अपने युवा खिलाड़ी की इस जीत पर गर्व है और पूरा भारत इस उपलब्धि को राष्ट्रीय गौरव के रूप में देख रहा है।

स्टावेंगर, नॉर्वे में आयोजित हो रहे इस टूर्नामेंट में गुकेश ने कार्लसन के खिलाफ खेलते हुए अपनी मानसिक दृढ़ता और खेल रणनीति का अद्भुत परिचय दिया।

शुरुआत में कार्लसन पूरी तरह हावी नजर आ रहे थे और लगातार दबाव बना रहे थे। ऐसा लग रहा था कि वह गुकेश पर क्लासिकल प्रारूप में लगातार दूसरी जीत दर्ज कर अपनी स्थिति को मजबूत कर लेंगे,लेकिन जैसे-जैसे समय कम होता गया,गुकेश ने सूझबूझ और साहस के साथ बोर्ड पर ऐसे चालें चलनी शुरू कीं,जिससे कार्लसन दबाव में आ गए।

अंत में कार्लसन ने समय की कमी के कारण एक बड़ी चूक कर दी,जिसका गुकेश ने भरपूर फायदा उठाया और जीत को अपने नाम किया।

गुकेश ने खेल के बाद अपनी प्रतिक्रिया में कहा, “मैं ज्यादा कुछ नहीं कर सकता था, मुझे बस इसका पूरा फायदा उठाना था। मैं ऐसे मूव बना रहा था,जो उसके लिए मुश्किल थे और सौभाग्य से वह समय की कमी में फँस गया।”

उन्होंने यह भी कहा कि इस टूर्नामेंट ने उन्हें सिखाया कि समय का सही प्रबंधन कितना आवश्यक है। उन्होंने कहा, “इस टूर्नामेंट से मैंने एक बात सीखी है कि समय की कमी नियंत्रण से बाहर हो सकती है।”

गुकेश ने इस जीत को अपने कोच ग्रेजगोरज गजेवस्की के साथ शांति से मनाई। दोनों ने अपनी रणनीति और धैर्य का जश्न एक शांत लेकिन संतोषजनक तरीके से मनाया।

इस हार के बाद कार्लसन काफी निराश नजर आए। उन्होंने गुस्से में टेबल पर मुक्का मारा और बोर्ड को पटक दिया। इसके बाद वह आयोजन स्थल से हताश होकर बाहर निकल गए।

गुकेश ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह समझ में आता है। मैंने भी अपने करियर में बहुत सी टेबलों पर मुक्का मारा है!”उनका यह बयान उनकी ईमानदारी और खेल भावना को दर्शाता है। गुकेश जानते हैं कि हार किसी भी खिलाड़ी के लिए कितनी भावनात्मक हो सकती है,खासकर जब वह दुनिया का नंबर एक खिलाड़ी हो।

नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट एक डबल राउंड-रॉबिन प्रारूप में खेला जाता है,जिसमें छह शीर्ष खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। हर खिलाड़ी एक-दूसरे के खिलाफ दो-दो बार खेलता है,एक बार सफेद मोहरों से और एक बार काले मोहरों से।

इस जीत ने न केवल गुकेश के टूर्नामेंट अभियान को गति दी है,बल्कि उन्हें बाकी खिलाड़ियों के बीच एक मजबूत दावेदार के रूप में भी स्थापित कर दिया है।

यह गुकेश की क्लासिकल प्रारूप में मैग्नस कार्लसन पर पहली जीत है। यह उस समय आई है,जब गुकेश मौजूदा विश्व चैंपियन भी हैं। उन्होंने हाल ही में कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतकर यह मुकाम हासिल किया था।

यह जीत उस खिलाड़ी के खिलाफ है,जिसे “सर्वकालिक महानतम शतरंज खिलाड़ी ” माना जाता है।

गुकेश की यह ऐतिहासिक जीत न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है,बल्कि यह भारतीय शतरंज की विश्व स्तर पर स्थिति को और मजबूत करती है। यह दिखाता है कि भारत अब केवल शतरंज में उभरती ताकत नहीं,बल्कि एक स्थायी शक्ति बन चुका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे राष्ट्रीय नेताओं की ओर से मिली सराहना से यह भी साफ है कि भारत में खेलों को लेकर एक नई सोच विकसित हो रही है,जहाँ युवा खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर सम्मान और समर्थन मिल रहा है।

गुकेश की यह जीत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है और यह संदेश देती है कि धैर्य,समर्पण और रणनीति से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है,चाहे सामने दुनिया का नंबर एक खिलाड़ी ही क्यों न हो।