नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई)

आईपीओ से पहले एनएसई के मुनाफे में गिरावट,तीसरी तिमाही में 2,408 करोड़ रुपये रहा शुद्ध लाभ

नई दिल्ली,7 फरवरी (युआईटीवी)- इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी आईपीओ की तैयारी कर रही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी किए,जिनमें कंपनी के मुनाफे में सालाना आधार पर बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अक्टूबर से दिसंबर 2025 की अवधि में एनएसई का शुद्ध लाभ 37 प्रतिशत घटकर 2,408 करोड़ रुपये रह गया,जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 3,834 करोड़ रुपये था। हालाँकि,तिमाही-दर-तिमाही आधार पर कंपनी के प्रदर्शन में सुधार देखने को मिला है और सितंबर तिमाही के मुकाबले मुनाफा करीब 15 प्रतिशत बढ़ा है।

कंपनी के अनुसार,वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर में एनएसई का मुनाफा 2,098 करोड़ रुपये था,जो दिसंबर तिमाही में बढ़कर 2,408 करोड़ रुपये पर पहुँच गया। इससे संकेत मिलता है कि सालाना तुलना में भले ही दबाव बना हुआ है,लेकिन तिमाही आधार पर कारोबार में धीरे-धीरे स्थिरता लौट रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते बाजार हालात,नियामकीय खर्च और कुछ एकमुश्त मदों का असर कंपनी की वार्षिक लाभप्रदता पर पड़ा है।

आय के मोर्चे पर भी एनएसई को सालाना आधार पर गिरावट का सामना करना पड़ा है। तीसरी तिमाही में कंपनी की कुल आय 4,395 करोड़ रुपये रही,जो कि वित्त वर्ष 25 की समान अवधि में 4,807 करोड़ रुपये थी। इस तरह साल-दर-साल आधार पर आय में करीब 9 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। हालाँकि,तिमाही-दर-तिमाही आधार पर कंपनी की आय में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है,जो यह दर्शाती है कि कारोबारी गतिविधियों में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।

एनएसई ने बताया कि वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में उसका ऑपरेटिंग ईबीआईटीडीए भी सालाना आधार पर 16 प्रतिशत घटकर 2,851 करोड़ रुपये रह गया है। पिछले साल की समान तिमाही में यह आँकड़ा इससे कहीं अधिक था। ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव का एक कारण तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर,रेगुलेटरी अनुपालन और सिस्टम अपग्रेड से जुड़ा खर्च माना जा रहा है। इसके बावजूद,कंपनी का ऑपरेशनल आधार मजबूत बना हुआ है और बाजार में उसकी अग्रणी स्थिति कायम है।

वित्तीय नतीजों के साथ-साथ एनएसई ने अपने प्लेटफॉर्म पर जुटाई गई पूँजी के आँकड़ें भी साझा किए,जो बाजार की मजबूती को दर्शाते हैं। कंपनी के अनुसार,वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में एनएसई के एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के जरिए कंपनियों ने इक्विटी,डेट और बिजनेस ट्रस्ट के माध्यम से कुल 5.4 लाख करोड़ रुपये जुटाए। यह आँकड़ा भारतीय पूँजी बाजार में निवेशकों के भरोसे और कॉरपोरेट फंडरेजिंग की मजबूत स्थिति को रेखांकित करता है।

आईपीओ गतिविधियों के लिहाज से भी तीसरी तिमाही काफी अहम रही। एनएसई ने बताया कि मेनबोर्ड और एसएमई प्लेटफॉर्म को मिलाकर कुल 65 कंपनियों ने इस तिमाही में आईपीओ के जरिए 96,457 करोड़ रुपये जुटाए। यह राशि पिछली तिमाही के मुकाबले लगभग दोगुनी है और बीते चार तिमाहियों में सबसे अधिक मानी जा रही है। इससे स्पष्ट है कि बाजार में नए इश्यू को लेकर निवेशकों की रुचि बनी हुई है और प्राथमिक बाजार में गतिविधियां तेज हैं।

नगर निगम बॉन्ड के मोर्चे पर भी एनएसई ने एक अहम उपलब्धि दर्ज की है। कंपनी के अनुसार,वित्त वर्ष 26 के पहले नौ महीनों में देश के सात नगर निगमों ने मिलकर 750 करोड़ रुपये जुटाए हैं। यह 2015 में सेबी द्वारा म्युनिसिपल बॉन्ड रेगुलेशंस लागू किए जाने के बाद से नगर निगमों द्वारा बॉन्ड के जरिए जुटाई गई अब तक की सबसे बड़ी राशि है। यह रुझान शहरी बुनियादी ढाँचे के लिए वैकल्पिक वित्त पोषण के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।

यह तिमाही नतीजे एनएसई के लिए इसलिए भी खास हैं क्योंकि सेबी से आईपीओ के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के बाद यह कंपनी का पहला वित्तीय प्रदर्शन है। लंबे समय से अटके आईपीओ को लेकर निवेशकों और बाजार की नजरें एनएसई पर टिकी हुई हैं। ऐसे में नतीजों के जरिए कंपनी ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि वह मजबूत कारोबारी आधार के साथ बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है।

एनएसई के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीषकुमार चौहान ने आईपीओ की प्रगति को लेकर कहा कि रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी डीआरएचपी का मसौदा तैयार करने में लगभग तीन से चार महीने का समय लग सकता है। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया काफी विस्तृत और तकनीकी होती है,जिसमें कंपनी के सभी वित्तीय,कानूनी और परिचालन पहलुओं का विस्तृत खुलासा करना होता है।

एक कार्यक्रम के दौरान समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में चौहान ने लगभग एक दशक बाद आईपीओ का रास्ता साफ होने पर सेबी के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि करीब दस साल बाद सेबी ने आईपीओ प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर सहमति दी है,जिसके लिए नियामक का धन्यवाद किया जाना चाहिए। उनके अनुसार,यह कदम भारतीय पूँजी बाजार के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत है।

चौहान ने यह भी स्पष्ट किया कि डीआरएचपी तैयार करने के साथ-साथ एनएसई आईपीओ के ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस हिस्से पर भी समानांतर रूप से काम करेगा। ओएफएस के जरिए मौजूदा शेयरधारक अपने हिस्से के शेयर बेच सकेंगे। बाजार जानकारों का मानना है कि एनएसई का आईपीओ भारतीय बाजार के सबसे बड़े और चर्चित सार्वजनिक निर्गमों में से एक हो सकता है,जिस पर घरेलू और विदेशी निवेशकों की खास नजर रहेगी।

तीसरी तिमाही के नतीजे यह दिखाते हैं कि भले ही सालाना आधार पर एनएसई के मुनाफे और आय में गिरावट आई है,लेकिन तिमाही-दर-तिमाही सुधार और मजबूत बाजार गतिविधियाँ कंपनी की बुनियादी ताकत को दर्शाती हैं। आईपीओ की तैयारी के बीच ये आँकड़ें निवेशकों के लिए अहम संकेतक माने जा रहे हैं।