श्रीनगर,18 अक्टूबर (युआईटीवी)- जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में एक अहम कैबिनेट बैठक आयोजित की गई, जिसमें यह प्रस्ताव पारित किया गया कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा फिर से बहाल किया जाए। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार को हुई इस कैबिनेट बैठक में जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल ने केंद्रीय सरकार से राज्य का पूर्व दर्जा बहाल किए जाने की अपील की। इस प्रस्ताव का मसौदा तैयार हो चुका है और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला जल्द ही दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह मसौदा सौंपेंगे।
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी, मंत्री सकीना मसूद इटू, जावेद अहमद राणा, जावेद अहमद डार और सतीश शर्मा भी इस बैठक में उपस्थित थे। बैठक के बाद अब्दुल्ला ने राज्य का दर्जा बहाल करने की दिशा में तेजी से काम करने का आश्वासन दिया। यह बैठक जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक स्थिति और वहाँ के लोगों की आकांक्षाओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
पत्रकारों से जेकेपीसीसी (जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी) के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी पार्टी तब तक मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होगी, जब तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं होता। कांग्रेस ने यह स्पष्ट किया है कि राज्य का दर्जा बहाल करना उनकी प्राथमिकता है और इसके बिना किसी प्रकार की राजनीतिक भागीदारी नहीं होगी।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और उमर अब्दुल्ला के पिता,फारूक अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार जल्द ही राज्य का दर्जा बहाल करेगी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले पर दो महीने के भीतर सुनवाई करने पर सहमति जताई है, जिससे उन्हें विश्वास है कि सरकार इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाएगी। जब फारूक अब्दुल्ला से अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि वे अदालत के फैसले का इंतजार करेंगे और यह मामला अब न्यायालय में ही उठाया जाएगा।
इस बैठक में और भी अहम घोषणाएँ की गईं, जिनमें लाल चौक में वीआईपी संस्कृति को खत्म करने का ऐलान भी शामिल था। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अब कोई भी सायरन का इस्तेमाल नहीं करेगा और सभी लोग—चाहे वे स्थानीय नागरिक हों या राजनेता—समान होंगे। यह निर्णय लोगों को राहत देने और प्रशासन में समानता लाने के उद्देश्य से लिया गया है।
गौरतलब है कि भारत सरकार द्वारा 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद खत्म हो गया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर को दो संघ शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया था। राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग अब कई राजनीतिक दलों द्वारा जोर-शोर से उठाई जा रही है और इस पर केंद्र सरकार का अगला कदम क्या होगा,यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
