पाकिस्तान–अफगानिस्तान सीमा पर बढ़ा तनाव (तस्वीर क्रेडिट@bfld_enterprise)

पाकिस्तान–अफगानिस्तान सीमा पर बढ़ा तनाव,हवाई हमलों और झड़पों के बीच तालिबान ने लगाया संप्रभुता उल्लंघन का आरोप

काबुल,13 मार्च (युआईटीवी)- अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। हाल ही में तालिबान प्रशासन ने पाकिस्तान पर कई अफगान प्रांतों में हवाई हमले करने का आरोप लगाया है। तालिबान के प्रवक्ता ज़बिहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने काबुल,कंधार,पक्तिया और पक्तिका सहित कई क्षेत्रों में बमबारी की,जिसके कारण नागरिकों की मौत हुई है। उन्होंने दावा किया कि इन हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत कई निर्दोष लोगों की जान गई है। तालिबान ने इन हमलों को अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।

तालिबान के अनुसार यह घटना ऐसे समय में हुई है,जब रमजान का पवित्र महीना अपने अंतिम चरण में है और दुनिया भर के मुसलमान ईद-उल-फितर की तैयारियों में लगे हुए हैं। तालिबान प्रवक्ता ने कहा कि इस समय हमला किया जाना यह दर्शाता है कि पाकिस्तान मानवीय और नैतिक मूल्यों की परवाह नहीं कर रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि पाकिस्तानी सैन्य विमानों ने कई स्थानों पर नागरिकों के घरों को निशाना बनाया। उनके मुताबिक कुछ स्थानों पर खाली रेगिस्तानी इलाकों पर भी बमबारी की गई।

तालिबान का कहना है कि इन हमलों के कारण अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर पहले से मौजूद तनाव और अधिक बढ़ गया है। प्रवक्ता ने कहा कि यह केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं है बल्कि यह अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर सीधा हमला है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि तालिबान इस कार्रवाई का जवाब देगा और अपनी सीमा तथा नागरिकों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार तालिबान ने यह भी आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी विमानों ने कंधार अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित निजी एयरलाइन कंपनी कम एयर के ईंधन भंडार को आग लगा दी। तालिबान के प्रवक्ता के अनुसार यह ईंधन भंडार नागरिक विमानों और संयुक्त राष्ट्र के विमानों को ईंधन उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के हमले नागरिक सेवाओं को बाधित करने और अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाने का प्रयास हैं।

तालिबान अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान ने पहले भी निजी व्यापारियों के ईंधन डिपो को निशाना बनाया था। उनके मुताबिक इस तरह की कार्रवाइयों से न केवल नागरिकों को नुकसान पहुँचता है,बल्कि क्षेत्र में व्यापार और मानवीय सहायता से जुड़ी गतिविधियों पर भी असर पड़ता है। हालाँकि,पाकिस्तान की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

दूसरी ओर हाल ही में अफगान अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि सीमा पर हुई झड़पों में तालिबान बलों ने 30 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया। तालिबान रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इनायतुल्लाह ख्वारज़मी ने कहा कि यह लड़ाई अफगानिस्तान के कंधार प्रांत के शोराबक जिले में हुई थी। उनके अनुसार तालिबान लड़ाकों ने इस झड़प के दौरान एक पाकिस्तानी सैन्य चौकी पर कब्जा कर लिया।

ख्वारजमी ने कहा कि चौकी पर नियंत्रण हासिल करने के बाद तालिबान लड़ाकों ने उसे विस्फोटकों से उड़ा दिया। उन्होंने दावा किया कि इस संघर्ष में 30 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए,जिनमें से 20 सैनिक उस चौकी को मजबूत करने के लिए भेजे गए थे। तालिबान के मुताबिक यह कार्रवाई पाकिस्तान की ओर से की गई सैन्य गतिविधियों के जवाब में की गई थी।

तालिबान ने यह भी कहा कि उनके लड़ाकों ने पक्तिया प्रांत के डंड पाटन क्षेत्र में पाकिस्तान की पाँच सैन्य चौकियों पर कब्जा कर लिया। इसके अलावा उन्होंने टॉप सर ख्वुच करम और अंजरकी सर पोस्टों में भी प्रवेश करने का दावा किया है। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना फिलहाल मुश्किल है,लेकिन इससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच सीमा पर स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद और सुरक्षा संबंधी मुद्दे लंबे समय से चले आ रहे हैं। पाकिस्तान अक्सर आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान की सीमा से सक्रिय कुछ उग्रवादी संगठन उसके क्षेत्रों में हमले करते हैं। वहीं तालिबान का कहना है कि पाकिस्तान इन आरोपों का इस्तेमाल अफगान क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई को उचित ठहराने के लिए करता है।

वर्तमान संघर्ष की पृष्ठभूमि 21 फरवरी की उस घटना से जुड़ी बताई जा रही है,जब पाकिस्तान ने अफगान क्षेत्र में आतंकवादियों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए थे। पाकिस्तान का कहना था कि इन हमलों का उद्देश्य उन समूहों को खत्म करना था,जो उसके सीमावर्ती इलाकों में हिंसक गतिविधियों में शामिल हैं। हालाँकि,तालिबान प्रशासन ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई थी।

इसी के बाद 27 फरवरी को तालिबान-नेतृत्व वाले अफगान बलों ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई शुरू की। इस जवाबी कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर कई जगहों पर झड़पें हुईं। इस दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर बिना उकसावे के गोलीबारी करने का आरोप लगाया।

पाकिस्तान ने इन घटनाओं के बाद सीमा क्षेत्रों में एक सैन्य अभियान शुरू किया,जिसे ‘ऑपरेशन ग़ज़ब-ए-हक’ नाम दिया गया। पाकिस्तान का कहना है कि यह अभियान अफगान बलों की कथित “अनप्रोवोक्ड फायरिंग” के जवाब में शुरू किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करना और पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों की रक्षा करना बताया गया है।

विश्लेषकों का मानना है कि अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से दोनों देशों के संबंधों में कई उतार-चढ़ाव आए हैं। शुरुआत में उम्मीद जताई जा रही थी कि तालिबान सरकार और पाकिस्तान के बीच संबंध मजबूत होंगे,लेकिन समय के साथ सीमा सुरक्षा,उग्रवादी समूहों की गतिविधियों और व्यापारिक मार्गों को लेकर मतभेद बढ़ते गए।

अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा,जिसे ड्यूरंड लाइन के नाम से भी जाना जाता है,लंबे समय से विवाद का विषय रही है। अफगानिस्तान की कई सरकारें इस सीमा को आधिकारिक अंतर्राष्ट्रीय सीमा के रूप में मान्यता देने से हिचकती रही हैं,जबकि पाकिस्तान इसे मान्यता प्राप्त सीमा मानता है। इस विवाद के कारण समय-समय पर दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनती रही है।

हालिया घटनाओं ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना आसान नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों पक्ष कूटनीतिक समाधान की दिशा में कदम नहीं उठाते हैं,तो सीमा पर संघर्ष और बढ़ सकता है। इससे न केवल दोनों देशों की सुरक्षा स्थिति प्रभावित होगी,बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है।

फिलहाल स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी इस पर नजर बनाए हुए है। कई विश्लेषक यह उम्मीद जता रहे हैं कि दोनों देश तनाव कम करने के लिए संवाद का रास्ता अपनाएँगे। हालाँकि,अभी तक दोनों पक्षों की ओर से जो बयान सामने आए हैं,उनसे यह स्पष्ट होता है कि हालिया घटनाओं के बाद अविश्वास की खाई और गहरी हो गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों देश इस तनाव को कम करने के लिए कोई ठोस कदम उठाते हैं या सीमा पर टकराव और बढ़ता है।