निखिल गुप्ता ने न्यूयॉर्क हत्या साजिश में अपना जुर्म कबूला (तस्वीर क्रेडिट@Politicx2029)

न्यूयॉर्क में पन्नू हत्या साजिश केस: निखिल गुप्ता दोषी करार, 29 मई को तय होगी सजा,40 साल की जेल संभव

वॉशिंगटन,19 फरवरी (युआईटीवी)- अमेरिका के न्यूयॉर्क में सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की कथित हत्या की साजिश से जुड़े मामले में भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को अमेरिकी संघीय अदालत ने औपचारिक रूप से दोषी ठहरा दिया है। अब इस मामले में 29 मई को सुबह 10 बजे सजा सुनाई जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि गुप्ता को अधिकतम 40 वर्ष तक की जेल हो सकती है,हालाँकि अंतिम सजा संघीय दिशानिर्देशों और जांच रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी।

यह फैसला अमेरिकी जिला जज विक्टर मारेरो ने 17 फरवरी को सुनाया। उन्होंने मजिस्ट्रेट जज सारा नेटबर्न के समक्ष प्रस्तुत की गई गुप्ता की बातचीत की ट्रांसक्रिप्ट और अन्य साक्ष्यों की समीक्षा के बाद दोषसिद्धि का आदेश जारी किया। इससे पहले 54 वर्षीय निखिल गुप्ता ने अदालत में अपनी गलती स्वीकार कर ली थी और माना था कि उन्होंने 2023 में अमेरिका में पन्नू की हत्या करवाने की साजिश में भूमिका निभाई थी।

अदालत में दिए गए अपने बयान में गुप्ता ने स्वीकार किया कि उन्होंने एक व्यक्ति को हत्या के लिए 15,000 डॉलर नकद भुगतान किया था। पूछताछ के दौरान उन्होंने यह भी माना कि उन्हें पता था कि जिस व्यक्ति को निशाना बनाया जाना था,वह न्यूयॉर्क में मौजूद था और जिसे भुगतान किया गया वह मैनहट्टन में था। गुप्ता ने भाड़े पर हत्या करने की साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश दोनों आरोपों को स्वीकार किया।

संघीय कानून के तहत,भाड़े पर हत्या की साजिश के लिए अधिकतम 10-10 वर्ष की सजा और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश के लिए अधिकतम 20 वर्ष की सजा का प्रावधान है। इस प्रकार कानूनी तौर पर कुल अधिकतम सजा 40 वर्ष तक हो सकती है। हालाँकि,अमेरिकी संघीय न्याय प्रणाली में सजा केवल अधिकतम सीमा के आधार पर तय नहीं होती,बल्कि ‘एडवाइजरी सेंटेंसिंग गाइडलाइंस’ के तहत गणना की जाती है।

मामले में याचिका दायर किए जाने से पहले दाखिल किए गए ‘पिमेंटेल लेटर’ में गुप्ता के लिए संभावित सजा की सीमा 235 से 293 महीने जेल यानी लगभग 19 से 24 वर्ष के बीच आंकी गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि ये दिशानिर्देश केवल सलाहकारी हैं और अंतिम निर्णय जज मारेरो द्वारा प्रस्तुत जाँच रिपोर्ट और अन्य कारकों पर विचार करने के बाद लिया जाएगा।

अदालत के आदेश के अनुसार,अब मामला सजा सुनाने के चरण में प्रवेश कर चुका है। दोष स्वीकार करने के कारण मुकदमे की लंबी सुनवाई की आवश्यकता नहीं रही और प्रक्रिया सीधे सजा निर्धारण की ओर बढ़ गई है। 29 मई को निर्धारित सुनवाई में अदालत अंतिम सजा की घोषणा करेगी।

गुप्ता ने अदालत में यह भी पुष्टि की है कि वह भारत के नागरिक हैं और उन्हें यह जानकारी है कि दोषी ठहराए जाने की स्थिति में उन्हें अमेरिका से निर्वासित किया जा सकता है। अमेरिकी सरकार की ओर से प्रस्तुत सजा संबंधी दस्तावेज में कहा गया है कि ऐसे गंभीर अपराधों में दोषी पाए गए गैर-नागरिकों को देश से हटाया जाना आवश्यक है। इसका अर्थ है कि जेल की सजा पूरी करने के बाद गुप्ता को अमेरिका से निष्कासित किया जा सकता है।

यह मामला अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना रहा है,क्योंकि इसमें एक विदेशी नागरिक पर अमेरिकी धरती पर हत्या की साजिश रचने का आरोप है। अमेरिकी अभियोजकों का कहना है कि इस प्रकार की साजिशें न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा हैं। अदालत ने भी इस बात पर जोर दिया कि ऐसे मामलों में कठोर संदेश देना आवश्यक है,ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि दोष स्वीकार करने से गुप्ता को संभावित सजा में कुछ राहत मिल सकती है, क्योंकि अमेरिकी न्याय प्रणाली में ‘प्ली एग्रीमेंट’ या दोष स्वीकार करना अक्सर सजा निर्धारण में एक कारक के रूप में देखा जाता है। हालाँकि,अंतिम फैसला अदालत के विवेक पर निर्भर करेगा।

अब सभी की नजरें 29 मई की सुनवाई पर टिकी हैं,जब जज मारेरो सजा की घोषणा करेंगे। यह फैसला न केवल गुप्ता के भविष्य को तय करेगा,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कानून प्रवर्तन और न्यायिक सहयोग के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत की कार्यवाही ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी न्याय प्रणाली ऐसे मामलों में कठोर रुख अपनाने से पीछे नहीं हटती।