मुंबई,25 अक्टूबर (युआईटीवी)- बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता परेश रावल एक बार फिर अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के दिलों में उतरने को तैयार हैं। उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ जल्द ही सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है। शुक्रवार को फिल्म के मेकर्स ने इसकी रिलीज डेट का आधिकारिक ऐलान करते हुए पोस्टर जारी किया,जिसने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी।
फिल्म के पोस्टर में परेश रावल का गंभीर और विचारशील लुक दिखाई दे रहा है और इसके साथ लिखा गया है, “ताजमहल,मुगल वास्तुकला या भारतीय वास्तुकला? जब इंसाफ के पलड़े 400 साल पुराने इतिहास के खिलाफ झुक जाते हैं।” इस टैगलाइन ने फिल्म की थीम को लेकर दर्शकों में गहरी जिज्ञासा पैदा कर दी है। फिल्म 31 अक्टूबर को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज की जाएगी।
‘द ताज स्टोरी’ एक ऐतिहासिक और सामाजिक विषय पर आधारित फिल्म है,जो ताजमहल से जुड़ी मान्यताओं,विवादों और ऐतिहासिक तथ्यों के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म का ट्रेलर पहले ही दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है। दो मिनट लंबे ट्रेलर में परेश रावल एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका में नजर आते हैं,जो ताजमहल के पीछे छिपे सच को सामने लाने का संकल्प लेता है। ट्रेलर की शुरुआत में एक दृश्य दिखाया गया है,जहाँ परेश रावल का किरदार,विष्णु दास,विदेशी पर्यटकों को ताजमहल दिखा रहा होता है। इसी दौरान वह कहता है कि यह इमारत असल में उसका मंदिर है,न कि किसी बादशाह का मकबरा।
इसके बाद कहानी में रोमांच तब बढ़ जाता है,जब एक पर्यटक यह सवाल पूछता है कि क्या ताजमहल वास्तव में मुगल बादशाह शाहजहाँ द्वारा बनवाया गया मकबरा है या फिर यह किसी पुराने हिंदू मंदिर का पुनर्निर्मित स्वरूप है। यह विवाद धीरे-धीरे अदालत तक पहुँचता है,जहाँ विष्णु दास (परेश रावल) न्यायपालिका से ताजमहल की जाँच कराने की माँग करता है,ताकि ऐतिहासिक सच्चाई को उजागर किया जा सके।
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फिल्म में परेश रावल के साथ अनुभवी अभिनेता जाकिर हुसैन भी मुख्य भूमिका में नजर आएँगे। जाकिर हुसैन फिल्म में खलनायक का किरदार निभा रहे हैं,जो परेश रावल के विचारों का विरोध करते हैं और ताजमहल के स्थापित इतिहास की रक्षा करने की कोशिश करते हैं। दोनों के बीच कोर्टरूम ड्रामा और वैचारिक टकराव फिल्म का मुख्य आकर्षण है। ट्रेलर के कई दृश्यों में दोनों अभिनेताओं के बीच तीखी बहसें दिखाई देती हैं,जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती हैं।
फिल्म में अमृता खानविलकर,स्नेहा वाघ और नमित दास भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएँगे। अमृता खानविलकर परेश रावल के परिवार से जुड़ी भूमिका में दिखेंगी,जो उनके संघर्ष में उनका साथ देती हैं। वहीं स्नेहा वाघ का किरदार सामाजिक दृष्टिकोण को सामने लाता है,जबकि नमित दास एक पत्रकार की भूमिका में दिखाई देंगे,जो इस विवाद को राष्ट्रीय बहस में तब्दील कर देते हैं।
‘द ताज स्टोरी’ के निर्देशक ने फिल्म को सिर्फ एक ऐतिहासिक या राजनीतिक बहस के रूप में नहीं,बल्कि एक विचारोत्तेजक सामाजिक प्रयोग के रूप में प्रस्तुत किया है। फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह इतिहास की व्याख्या समय और सत्ता के हिसाब से बदलती रही है और कैसे सच्चाई अक्सर विवादों के बीच खो जाती है।
फिल्म की सिनेमेटोग्राफी और बैकग्राउंड म्यूजिक भी दर्शकों को 17वीं सदी के भारत की भव्यता का एहसास कराता है। ताजमहल के दृश्य,उसकी खूबसूरती और उसके इर्द-गिर्द फैली रहस्यमयी कहानियों को फिल्म ने बेहतरीन तरीके से पिरोया है।
फिल्म के निर्देशक के अनुसार, “हमारा उद्देश्य किसी धार्मिक या ऐतिहासिक विवाद को भड़काना नहीं है,बल्कि दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करना है कि इतिहास को केवल किताबों से नहीं,बल्कि साक्ष्यों और विवेक से भी समझा जाना चाहिए। ‘द ताज स्टोरी’ हर उस व्यक्ति के लिए है,जो इतिहास के पीछे की सच्चाई जानना चाहता है।”
परेश रावल का अभिनय फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण माना जा रहा है। अपने लंबे करियर में उन्होंने कॉमेडी,ड्रामा और गंभीर किरदारों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है,लेकिन ‘द ताज स्टोरी’ में वह एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभा रहे हैं,जो व्यवस्था और इतिहास दोनों से टकराने की हिम्मत रखता है। उनके डायलॉग्स में गहराई और दृढ़ता नजर आती है,जो इस फिल्म को एक गंभीर विमर्श का रूप देते हैं।
फिल्म के ट्रेलर पर दर्शकों की प्रतिक्रिया काफी उत्साहजनक रही है। कुछ लोग इसे एक साहसी प्रयास बता रहे हैं,जो भारतीय सिनेमा में ऐतिहासिक दृष्टिकोण को नए सिरे से परिभाषित करेगा। वहीं कुछ वर्गों में यह भी आशंका जताई जा रही है कि फिल्म विवादों में घिर सकती है,क्योंकि ताजमहल के इतिहास को लेकर पहले से ही विभिन्न मत प्रचलित हैं।
फिर भी,इसमें कोई संदेह नहीं कि ‘द ताज स्टोरी’ एक ऐसी फिल्म है,जो दर्शकों को सोचने,सवाल करने और इतिहास को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करेगी। 31 अक्टूबर को जब यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होगी,तब दर्शक न केवल परेश रावल के शानदार अभिनय का आनंद लेंगे,बल्कि शायद ताजमहल को एक नए दृष्टिकोण से देखना भी सीखेंगे।
‘द ताज स्टोरी’ इतिहास,भावना और विचार का संगम है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत होगी।
