नई दिल्ली,4 फरवरी (युआईटीवी)- अमेरिका में एक बार फिर आंशिक सरकारी शटडाउन लागू हो गया है,जिससे देश की राजनीति में उथल-पुथल तेज हो गई है। 2026 के फंडिंग बजट को लेकर कांग्रेस में सहमति नहीं बन पाने के कारण यह आंशिक शटडाउन शुरू हुआ है। इससे पहले भी अमेरिका हाल के वर्षों का सबसे लंबा शटडाउन झेल चुका है और अब एक बार फिर संघीय एजेंसियों की फंडिंग रुकने से प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सांसदों से अपील की है कि वे मतभेदों को किनारे रखकर जल्द-से-जल्द आंशिक सरकारी शटडाउन को समाप्त करें।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि प्रशासन सांसदों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों और चिंताओं पर “अच्छी नीयत” से काम करने को तैयार है। उनका कहना है कि शटडाउन से आम अमेरिकी नागरिकों को नुकसान हो रहा है और सरकार के कई अहम विभागों का कामकाज बाधित हो रहा है। हालाँकि,उनकी इस अपील के बावजूद न तो रिपब्लिकन और न ही डेमोक्रेट सांसद फिलहाल फंडिंग पैकेज को मंजूरी देने के मूड में नजर आ रहे हैं।
यह आंशिक शटडाउन ऐसे समय में लागू हुआ है,जब देश में इमिग्रेशन एनफोर्समेंट को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही गरम है। जनवरी में मिनियापोलिस में हुई एक फायरिंग की घटना ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है। इस घटना में दो अमेरिकी नागरिकों की मौत हो गई थी,जिसके बाद डेमोक्रेटिक सांसदों ने इमिग्रेशन ऑपरेशनों में बदलाव की माँग तेज कर दी है। डेमोक्रेट्स का आरोप है कि मौजूदा इमिग्रेशन एनफोर्समेंट नीतियाँ जरूरत से ज्यादा आक्रामक हैं और इन पर संसदीय निगरानी जरूरी है।
सोमवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से आंशिक शटडाउन खत्म करने की अपील की,लेकिन यह अपील फिलहाल बेअसर रही। हाउस में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट,दोनों ही खेमों में असहमति साफ नजर आई। मिनियापोलिस की घटना को लेकर सांसदों में भारी आक्रोश है और कई डेमोक्रेट सांसदों का कहना है कि जब तक इमिग्रेशन और कस्टम्स एनफोर्समेंट,यानी आईसीई,के ऑपरेशनों पर खुलकर चर्चा नहीं होती,तब तक वे किसी भी फंडिंग बिल को समर्थन नहीं देंगे।
डेमोक्रेट्स ने हाउस स्पीकर माइक जॉनसन पर भी दबाव बढ़ा दिया है। डेमोक्रेटिक सांसदों का कहना है कि वे फंडिंग पैकेज को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी वोट नहीं देंगे। उनका तर्क है कि मिनियापोलिस में इमिग्रेशन एजेंटों द्वारा एक अन्य अमेरिकी नागरिक को गोली मारे जाने की घटना के बाद यह जरूरी हो गया है कि ट्रंप सरकार द्वारा चलाए जा रहे निष्कासन और इमिग्रेशन एनफोर्समेंट ऑपरेशनों पर नियंत्रण लगाया जाए। उनका मानना है कि बिना व्यापक बहस और सुधार के किसी भी तरह की फंडिंग को मंजूरी देना गलत संदेश देगा।
फंडिंग पैकेज को लेकर सांसदों की अपनी-अपनी शिकायतें हैं,लेकिन असली टकराव आईसीई के ऑपरेशनों को लेकर देखने को मिल रहा है। डेमोक्रेट्स लंबे समय से आईसीई की कार्यशैली पर सवाल उठाते रहे हैं। मौजूदा फंडिंग बिल में आईसीई के बॉडी कैमरों के लिए 20 मिलियन डॉलर से ज्यादा का बजट प्रस्तावित किया गया है। डेमोक्रेट सांसदों का कहना है कि यह बजट आईसीई की निगरानी के नाम पर उसके ऑपरेशनों को और मजबूत करेगा,जिसे वे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। इसी वजह से उन्हें इस बिल को मंजूरी न देने का एक और कारण मिल गया है।
आंशिक शटडाउन का आज चौथा दिन है और इसका असर धीरे-धीरे सामने आने लगा है। गृह सुरक्षा विभाग,रक्षा विभाग और कई अन्य संघीय एजेंसियों की फंडिंग शनिवार को खत्म हो चुकी है। हालाँकि,जरूरी सेवाओं से जुड़े कई कर्मचारी काम पर बने हुए हैं,लेकिन बड़ी संख्या में संघीय कर्मचारियों को या तो बिना वेतन काम करना पड़ रहा है या फिर उन्हें अस्थायी रूप से घर भेज दिया गया है। इससे न केवल कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है,बल्कि सरकारी कामकाज की रफ्तार भी धीमी पड़ रही है।
हाउस डेमोक्रेटिक लीडर हकीम जेफ्रीज ने सोमवार को साफ शब्दों में कहा कि उन्हें इस फंडिंग पैकेज को मंजूरी देने का कोई ठोस कारण नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि रिपब्लिकन सांसद खुद इस मुद्दे पर एकजुट नहीं हैं और ऐसे में डेमोक्रेट्स से समर्थन की उम्मीद करना गलत है। जेफ्रीज ने तंज कसते हुए कहा कि बहुत कम मौकों पर ऐसा हुआ है,जब डेमोक्रेट्स को रिपब्लिकन की “गड़बड़ियों” से निपटने के लिए आगे आना पड़ा हो।
रिपब्लिकन खेमे में भी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। कुछ रिपब्लिकन सांसद शटडाउन को जल्द खत्म करने के पक्ष में हैं,लेकिन वे डेमोक्रेट्स की इमिग्रेशन से जुड़ी माँगों को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि आईसीई और अन्य एजेंसियां देश की सुरक्षा के लिए जरूरी काम कर रही हैं और उनके बजट में कटौती या उन पर रोक लगाना राष्ट्रीय हितों के खिलाफ होगा।
अब सबकी निगाहें मंगलवार को होने वाली वोटिंग पर टिकी हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि उस दिन फंडिंग को मंजूरी देने को लेकर औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी। हालाँकि,मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि शटडाउन जल्द खत्म हो पाएगा या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि फंडिंग और इमिग्रेशन के मुद्दे पर जारी यह सियासी खींचतान अमेरिका में एक बार फिर सरकारी कामकाज और आम जनता की जिंदगी पर भारी पड़ रही है।
