नई दिल्ली,20 फरवरी (युआईटीवी)- भारत ने शुक्रवार को आधिकारिक रूप से ‘पैक्स सिलिका’ पहल में शामिल होकर सेमीकंडक्टर विनिर्माण और उन्नत प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह अमेरिकी पहल वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद और सुरक्षित तकनीकी ढाँचे के निर्माण पर केंद्रित है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान भारत की इस भागीदारी की घोषणा को एक रणनीतिक और दूरगामी महत्व का निर्णय माना जा रहा है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इसे 21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को आकार देने वाला कदम बताया।
समिट के दौरान गोर ने कहा कि ‘पैक्स सिलिका’ का युग वैश्विक तकनीकी परिदृश्य को नई दिशा देगा और भारत की इसमें भागीदारी बेहद अहम है। उन्होंने भारत की प्रतिभा,नवाचार क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी भूमिका निभाने की क्षमता पर विशेष जोर दिया। उनके अनुसार नई दिल्ली महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण और आपूर्ति में अपनी क्षमताओं को तेजी से विकसित कर रही है और अमेरिका इस क्षेत्र में भारत के साथ सक्रिय रूप से सहयोग कर रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वाशिंगटन विश्वसनीय प्रौद्योगिकियों को साझा करने के लिए तैयार है और भारत को क्षेत्रीय भू-राजनीतिक वास्तविकताओं की गहरी समझ है।
गोर ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट को प्रभावशाली बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग के अनेक अवसर मौजूद हैं और अमेरिका इन संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक है। यह बयान ऐसे समय में आया है,जब वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर उद्योग को रणनीतिक महत्व का क्षेत्र माना जा रहा है। महामारी और भू-राजनीतिक तनावों के कारण आपूर्ति श्रृंखलाओं में आई बाधाओं ने इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और विविधीकरण की आवश्यकता को और स्पष्ट कर दिया है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इस समझौते को भारत के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया को भारत पर पहले से कहीं अधिक भरोसा है। उनके अनुसार भारत के पास प्रतिभाओं का विशाल भंडार है और विदेश नीति को इस प्रकार संचालित किया गया है कि वैश्विक स्तर पर विश्वास मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि पैक्स सिलिका समझौता सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला,विनिर्माण और चिप डिजाइन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा इससे देश में संपूर्ण सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने में मदद मिलेगी।
वैष्णव ने बताया कि भारत में दस संयंत्र पहले से स्थापित हैं और कई अन्य संयंत्र निर्माणाधीन हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि जल्द ही देश का पहला सेमीकंडक्टर संयंत्र व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर देगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में दो-नैनोमीटर जैसी अत्याधुनिक चिप्स का डिजाइन कार्य चल रहा है,जो देश की तकनीकी क्षमता को दर्शाता है। उनके अनुसार भारत में एक व्यापक और समन्वित पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो रहा है, जिसमें अनुसंधान,डिजाइन,विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला के सभी घटक शामिल हैं।
पैक्स सिलिका में भारत की भागीदारी से उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के साथ सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। इससे विदेशी निवेश आकर्षित करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भूमिका को मजबूत करने में सहायता मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा,बल्कि रोजगार सृजन और कौशल विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे। भारत के युवा इंजीनियरों और तकनीकी पेशेवरों को इससे सीधा लाभ मिलने की संभावना है।
सेमीकंडक्टर उद्योग आज डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर,ऑटोमोबाइल,रक्षा उपकरण और एआई आधारित प्रणालियों में चिप्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में इस क्षेत्र में विश्वसनीय और विविधीकृत आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण किसी भी देश की रणनीतिक प्राथमिकता बन चुका है। भारत की बढ़ती बाजार क्षमता और तकनीकी कौशल उसे इस क्षेत्र में प्रमुख खिलाड़ी बना सकते हैं।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि पैक्स सिलिका के माध्यम से भारत और अमेरिका के बीच तकनीकी साझेदारी और गहरी होगी। इससे अनुसंधान सहयोग,संयुक्त निवेश और उन्नत विनिर्माण तकनीकों के आदान-प्रदान को गति मिल सकती है। साथ ही,यह पहल वैश्विक तकनीकी मानकों के निर्माण में भी दोनों देशों की भूमिका को मजबूत करेगी।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के मंच से हुई यह घोषणा संकेत देती है कि भारत वैश्विक तकनीकी व्यवस्था में सक्रिय और निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार है। सेमीकंडक्टर और उन्नत तकनीक के क्षेत्र में यह साझेदारी आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि,डिजिटल परिवर्तन और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को नई ऊँचाई दे सकती है। पैक्स सिलिका में शामिल होकर भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह भविष्य की तकनीकी और आर्थिक संरचना के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
