प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप

गाजा में शांति पहल को लेकर ट्रंप का मोदी को न्योता, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का दिया आमंत्रण

नई दिल्ली,19 जनवरी (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका के प्रस्तावित दौरे से पहले एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को भेजा गया एक विशेष आमंत्रण पत्र साझा किया है। इस पत्र में ट्रंप ने नरेंद्र मोदी को गाजा में स्थायी शांति स्थापित करने के उद्देश्य से गठित किए जा रहे ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का हिस्सा बनने का औपचारिक निमंत्रण दिया है। इस पहल को मध्य पूर्व में लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष को समाप्त करने और वैश्विक शांति की दिशा में एक बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

राजदूत सर्जियो गोर ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का आमंत्रण साझा करते हुए उन्हें गर्व महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह बोर्ड गाजा में स्थायी शांति लाने की दिशा में काम करेगा और प्रभावी शासन के जरिए स्थिरता व समृद्धि को बढ़ावा देगा। गोर के इस सार्वजनिक पोस्ट ने अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है,क्योंकि भारत की भूमिका को अब मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया में और अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा भेजे गए पत्र में प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक नेतृत्व क्षमता की सराहना करते हुए कहा गया है कि यह उनके लिए एक महान सम्मान होगा कि भारत के प्रधानमंत्री इस ऐतिहासिक और भव्य प्रयास में अमेरिका के साथ जुड़ें। ट्रंप ने लिखा कि यह पहल न केवल मध्य पूर्व में शांति को स्थिर करने का प्रयास है,बल्कि वैश्विक संघर्षों को हल करने के लिए एक साहसी और नए दृष्टिकोण को अपनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। पत्र के शब्दों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि अमेरिका इस पहल में भारत को एक प्रमुख और भरोसेमंद साझेदार के रूप में देख रहा है।

अपने संदेश में ट्रंप ने गाजा संघर्ष को समाप्त करने के लिए 29 सितंबर को घोषित की गई अपनी व्यापक शांति योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि इन सभी योजनाओं और सपनों को वास्तविकता में बदला जाए। ट्रंप के अनुसार,इस योजना के केंद्र में ‘शांति बोर्ड’ होगा,जिसे एक नए अंतर्राष्ट्रीय संगठन और संक्रमणकालीन शासी प्रशासन के रूप में स्थापित किया जाएगा। यह बोर्ड न केवल संघर्षविराम सुनिश्चित करेगा,बल्कि गाजा में प्रशासनिक ढाँचे को मजबूत करने और दीर्घकालिक शांति की नींव रखने का काम भी करेगा।

ट्रंप ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रयास केवल कुछ चुनिंदा देशों को एक साथ लाने का है,जो स्थायी शांति की जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने इसे एक ऐसा सम्मान बताया,जो केवल उन देशों को मिलेगा जो उदाहरण पेश कर नेतृत्व करने की क्षमता रखते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित व समृद्ध भविष्य में निवेश करने को तैयार हैं। ट्रंप ने संकेत दिया कि निकट भविष्य में अन्य प्रतिबद्ध और सम्मानित वैश्विक नेताओं को भी इस पहल में शामिल होने का आमंत्रण दिया जाएगा।

यह आमंत्रण ऐसे समय पर आया है,जब अमेरिकी प्रशासन ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को औपचारिक रूप देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हाल ही में व्हाइट हाउस ने इस बोर्ड में नियुक्त किए गए प्रमुख व्यक्तियों की सूची सार्वजनिक की है। ये नियुक्तियां ट्रंप प्रशासन की 20-बिंदुओं वाली शांति योजना के दूसरे चरण की निगरानी करेंगी,जिसका उद्देश्य गाजा में जारी संघर्ष को निर्णायक रूप से समाप्त करना है।

व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान के मुताबिक, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल किए गए प्रमुख नामों में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो,पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर,ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ,वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा और ट्रंप के दामाद जारेड कुश्नर शामिल हैं। इन नामों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि अमेरिका इस पहल को केवल राजनीतिक ही नहीं,बल्कि आर्थिक और कूटनीतिक दृष्टि से भी मजबूत आधार देना चाहता है।

इसके अलावा गाजा के लिए गठित कार्यकारी बोर्ड के सदस्यों के नाम भी घोषित किए गए हैं। इसमें टोनी ब्लेयर,जारेड कुश्नर और स्टीव विटकॉफ जैसे प्रभावशाली चेहरे शामिल हैं। साथ ही तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान,कतर के वरिष्ठ राजनयिक अली अल थावादी और अन्य अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों को भी इस बोर्ड का हिस्सा बनाया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि गाजा शांति पहल में पश्चिमी देशों के साथ-साथ क्षेत्रीय शक्तियों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा गया यह आमंत्रण भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को भी रेखांकित करता है। भारत पहले ही मध्य पूर्व के कई देशों के साथ संतुलित और मजबूत संबंध रखता है,चाहे वह इजरायल हो,फिलिस्तीन,खाड़ी देश हों या ईरान। ऐसे में गाजा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भारत की भागीदारी को एक संतुलनकारी और भरोसेमंद भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि भारत इस पहल का हिस्सा बनता है,तो यह न केवल मध्य पूर्व में शांति प्रक्रिया को मजबूती देगा,बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की साख और प्रभाव को भी और बढ़ाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी का अमेरिका दौरा पहले से ही कई अहम मुद्दों के कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है,जिनमें रक्षा सहयोग,व्यापार,तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े सवाल शामिल हैं। अब गाजा शांति पहल से जुड़ा यह आमंत्रण इस दौरे को और भी रणनीतिक बना देता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस प्रस्ताव पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है और क्या वह औपचारिक रूप से ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का हिस्सा बनने का निर्णय करता है।

राष्ट्रपति ट्रंप का यह कदम गाजा संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक नए अध्याय की शुरुआत के संकेत देता है। इसमें भारत जैसे देश की संभावित भागीदारी इस पहल को वैश्विक वैधता और संतुलन प्रदान कर सकती है। आने वाले दिनों में इस आमंत्रण पर भारत की प्रतिक्रिया और प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में खास चर्चा का विषय बने रहने की पूरी संभावना है।