प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात में दीप्ति शर्मा ने साझा की अपनी आस्था और प्रेरणा की कहानी (तस्वीर क्रेडिट@mishra_abhi)

प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात में दीप्ति शर्मा ने साझा की अपनी आस्था और प्रेरणा की कहानी,कहा – “मुझे खुद से ज्यादा भरोसा भगवान हनुमान पर है”

नई दिल्ली,6 नवंबर (युआईटीवी)- भारतीय महिला क्रिकेट टीम के ऐतिहासिक विश्व कप खिताब जीतने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को विजेता खिलाड़ियों से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान माहौल गर्व और भावनाओं से भरा हुआ था। प्रधानमंत्री मोदी ने खिलाड़ियों से उनके अनुभवों,संघर्षों और प्रेरणाओं के बारे में बातचीत की। इसी बीच एक दिलचस्प पल तब आया,जब उन्होंने भारतीय टीम की स्टार ऑलराउंडर और विश्व कप 2025 की ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ दीप्ति शर्मा से उनके इंस्टाग्राम पर लिखे “जय श्री राम” और उनकी बांह पर बने भगवान हनुमान के टैटू के बारे में पूछा।

दीप्ति शर्मा ने मुस्कुराते हुए बताया, “मुझे खुद से ज्यादा भरोसा भगवान हनुमान पर है। जब भी कठिनाइयाँ आती हैं,मैं उनका नाम लेती हूँ और उन कठिनाइयों से बाहर आ जाती हूँ। उन्होंने हमेशा मुझे शक्ति और आत्मविश्वास दिया है।” यह कहते समय उनके चेहरे पर श्रद्धा और आत्मविश्वास दोनों झलक रहे थे। पीएम मोदी ने दीप्ति के इस जवाब पर मुस्कराते हुए कहा कि यह वही आस्था और सकारात्मक सोच है जो किसी भी खिलाड़ी को मुश्किल परिस्थितियों में आगे बढ़ने की ताकत देती है।

दीप्ति शर्मा ने इस मुलाकात के दौरान 2017 की यादें भी ताजा कीं,जब भारतीय महिला टीम वर्ल्ड कप फाइनल में इंग्लैंड से मामूली अंतर से हार गई थी। उन्होंने बताया कि उस हार के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने टीम को बुलाकर उनसे बात की थी। उस समय पीएम ने कहा था कि “वही असली खिलाड़ी है,जो अपनी असफलता से सीखे। मेहनत करना मत छोड़ना।” दीप्ति ने कहा कि पीएम मोदी के इन शब्दों ने उन्हें जीवन भर के लिए प्रेरणा दी।

दीप्ति ने कहा, “हमें आपसे मिलने का इंतजार था। 2017 में जब हम मिले थे,तब आपने कहा था कि मेहनत करना मत छोड़ना। मैंने इसे हमेशा याद रखा। जब भी मुझे कठिनाइयाँ आईं,मैं उन्हीं बातों को सोचती थी। आपकी स्पीच और आपकी सोच से मुझे हमेशा ऊर्जा मिलती है। जब मैं मैदान पर होती हूँ,तो अक्सर आपकी बातें याद आती हैं—खासतौर पर जब मैच में दबाव होता है।”

पीएम मोदी ने इस दौरान दीप्ति की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल टीम को ट्रॉफी जिताई,बल्कि पूरे देश को गर्व का एहसास कराया है। उन्होंने कहा कि खेल केवल जीत-हार का नाम नहीं है,बल्कि यह अनुशासन,संयम और आत्मविश्वास का प्रतीक है,जिसे दीप्ति शर्मा जैसे खिलाड़ी बखूबी दर्शाते हैं।

भारत ने इस बार का महिला विश्व कप खिताब नवी मुंबई में खेले गए फाइनल मुकाबले में साउथ अफ्रीका को हराकर जीता। टीम इंडिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 7 विकेट पर 298 रन बनाए। इस मैच में सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा ने शानदार 87 रन बनाए,जबकि दीप्ति शर्मा ने 58 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली। उनकी पारी ने टीम को मजबूत स्थिति में पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई।

हालाँकि,दीप्ति की असली चमक उनकी गेंदबाजी में नजर आई। साउथ अफ्रीका की टीम जब 299 रन के लक्ष्य का पीछा कर रही थी,तब दीप्ति शर्मा ने घातक गेंदबाजी करते हुए विपक्षी बल्लेबाजों को सांस लेने का मौका नहीं दिया। उन्होंने 9.3 ओवरों में मात्र 39 रन देकर 5 विकेट झटके और साउथ अफ्रीका की पारी को 45.3 ओवरों में 246 रन पर समेट दिया। भारत ने यह फाइनल मुकाबला 52 रन से जीतकर इतिहास रच दिया।

दीप्ति शर्मा पूरे टूर्नामेंट में भारत की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी साबित हुईं। उन्होंने महिला विश्व कप 2025 में कुल 22 विकेट लेकर शीर्ष गेंदबाज का स्थान हासिल किया। इसके अलावा,उन्होंने इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका जैसे मजबूत विरोधियों के खिलाफ अर्धशतकीय पारियाँ खेलीं,जिससे वह टूर्नामेंट की ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ बनीं।

दीप्ति की सफलता केवल आँकड़ों में नहीं,बल्कि उनके रवैये में भी झलकती है। वह हमेशा शांत,आत्मविश्वासी और अपने खेल पर केंद्रित रहती हैं। कोच अमोल मजूमदार और कप्तान हरमनप्रीत कौर दोनों ने कई बार कहा है कि दीप्ति टीम की “रीढ़” हैं — चाहे वह बल्ले से हों या गेंद से।

प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान यह भी कहा कि दीप्ति जैसी खिलाड़ी देश की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने कहा, “आपकी मेहनत और अनुशासन देश की लाखों बेटियों के लिए मिसाल है। आप यह साबित कर रही हैं कि बेटियाँ किसी भी क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर सकती हैं।”

मुलाकात के अंत में प्रधानमंत्री ने सभी खिलाड़ियों से मुलाकात की और उनके साथ समूह फोटो खिंचवाई। जब बारी दीप्ति शर्मा की आई,तो पीएम मोदी ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब भगवान हनुमान आपके साथ हैं और देश भी।” इस पर दीप्ति ने हाथ जोड़ कर कहा, “जय श्री राम।”

यह दृश्य न केवल क्रिकेट प्रेमियों बल्कि पूरे देश के लिए गर्व और प्रेरणा का क्षण था। दीप्ति शर्मा की आस्था,संघर्ष और समर्पण की कहानी यह दिखाती है कि सच्ची सफलता केवल प्रतिभा से नहीं,बल्कि विश्वास और कड़ी मेहनत से हासिल होती है। और यही कारण है कि आज दीप्ति सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं,बल्कि नई पीढ़ी की रोल मॉडल बन चुकी हैं।