पटना,6 जनवरी (युआईटीवी)- जन सुराज पार्टी (जसुपा) के प्रमुख प्रशांत किशोर ने बिहार में बीपीएससी परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर पटना के गांधी मैदान में दो जनवरी से आमरण अनशन पर बैठने का निर्णय लिया था। उनका यह अनशन बीपीएससी परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक मामले और अभ्यर्थियों के खिलाफ हुई असमंजसपूर्ण प्रक्रिया को लेकर था। प्रशांत किशोर के साथ कुछ अन्य समर्थक भी अपनी पाँच सूत्री माँगों को लेकर इस अनशन में शामिल थे।
इसी बीच पटना पुलिस ने सोमवार सुबह लगभग 4 बजे प्रशांत किशोर को हिरासत में लिया और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उनका मेडिकल परीक्षण किया गया और फिर उन्हें कोर्ट में पेश करने की प्रक्रिया शुरू की गई। पटना के डीएम चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि प्रशांत किशोर और उनके कुछ समर्थक गांधी मैदान के गांधी मूर्ति के सामने प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध रूप से धरना दे रहे थे। प्रशासन ने पहले ही उन्हें धरना स्थल बदलने के लिए नोटिस जारी किया था और गांधी मैदान के बजाय उन्हें निर्धारित स्थल,गर्दनीबाग जाने को कहा था।
हालाँकि,प्रशांत किशोर और उनके समर्थकों ने नोटिस का पालन नहीं किया और धरने को जारी रखा,जिसके बाद गांधी मैदान थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। प्रशासन ने कई बार आग्रह किया और पर्याप्त समय दिया,लेकिन धरना स्थल खाली नहीं किया गया। इस कारण सोमवार को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। एसएसपी अवकाश कुमार ने पुष्टि की कि प्रशांत किशोर को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनकी मेडिकल जाँच के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा।
प्रशांत किशोर 2 जनवरी से लगातार आमरण अनशन पर थे और बीपीएससी परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर अपनी आवाज उठा रहे थे। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार और बीपीएससी से जवाबदेही की माँग की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि परीक्षा के दौरान हुई गड़बड़ी के कारण बड़ी संख्या में उम्मीदवारों का भविष्य दांव पर लगा है। इसके अलावा,प्रशांत किशोर ने बीपीएससी की पुनर्परीक्षा की भी आलोचना की थी,जिसे उन्होंने असंतोषजनक और अन्यथा ठहराया था।
इस बीच,13 दिसंबर 2024 को बीपीएससी की संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा के दौरान पटना के बापू भवन परीक्षा केंद्र पर प्रश्न पत्र लीक होने की अफवाह फैल गई थी, जिसके बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने परीक्षा का बहिष्कार किया था। इस अफवाह के चलते परीक्षार्थियों के बीच भारी असमंजस था और इसके बाद बीपीएससी ने बापू भवन में पुनः परीक्षा आयोजित करने का आदेश दिया। इसके बाद,शनिवार को पटना के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर पुनर्परीक्षा आयोजित की गई, लेकिन कई अभ्यर्थी अब भी पूरी परीक्षा को रद्द करने की माँग कर रहे हैं।
प्रशांत किशोर के आमरण अनशन के कारण इस मुद्दे ने राज्य में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का रूप ले लिया। उनके समर्थकों का कहना था कि इस गड़बड़ी का असर परीक्षा देने वाले हजारों छात्रों पर पड़ा है और सरकार को जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। प्रशांत किशोर ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और बीपीएससी के नतीजों की जाँच की माँग की।
इस पूरी घटना ने राज्य के शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं और अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि राज्य सरकार और बीपीएससी इस गड़बड़ी को लेकर क्या कदम उठाती है। प्रशांत किशोर की गिरफ्तारी और उनका अनशन इस मुद्दे को और भी तूल देने वाला है और यह देखना होगा कि आगे आने वाले दिनों में इस मामले में क्या नया मोड़ आता है।
बीपीएससी परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर प्रशांत किशोर का आंदोलन अब राजनीति और प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। उनके धरने के कारण सरकार और बीपीएससी पर दबाव बढ़ गया है और अब यह देखना होगा कि इस मुद्दे का समाधान किस दिशा में जाता है।
