राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (तस्वीर क्रेडिट@ParagShahBJP)

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘प्रचंड’ में भरी ऐतिहासिक उड़ान,वायुशक्ति अभ्यास के बीच स्वदेशी रक्षा क्षमता को दिया सलाम

नई दिल्ली,27 फरवरी (युआईटीवी)- भारत की सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर और देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित करते हुए स्वदेश में निर्मित हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में विशेष उड़ान भरकर देश की रक्षा क्षमता और आत्मनिर्भरता के संकल्प को नई ऊंचाई दी। 27 फरवरी को राजस्थान के जैसलमेर में आयोजित भारतीय वायुसेना के प्रमुख युद्धाभ्यास ‘वायुशक्ति 2026’ के दौरान राष्ट्रपति ने यह साहसिक सॉर्टी की। इस अवसर पर वह फ्लाइंग हेलमेट और फ्लाइट ड्रेस में नजर आईं,जिसने वहाँ उपस्थित सैन्य अधिकारियों और जवानों के साथ-साथ पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया।

जैसलमेर की रणभूमि जैसी धरती पर आयोजित ‘वायुशक्ति 2026’ अभ्यास भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता,तकनीकी दक्षता और सामरिक तैयारी का प्रदर्शन करने का प्रमुख मंच है। इस अभ्यास में विभिन्न लड़ाकू विमान,हेलीकॉप्टर और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियाँ अपनी सटीकता और शक्ति का प्रदर्शन कर रही थीं। इसी दौरान राष्ट्रपति ने स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में उड़ान भरकर न केवल वायुसेना का मनोबल बढ़ाया,बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में रक्षा क्षेत्र में हो रही प्रगति को भी रेखांकित किया।

‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर अत्याधुनिक तकनीक से लैस है और इसे विशेष रूप से कठिन युद्ध परिस्थितियों में संचालन के लिए विकसित किया गया है। ऊँचाई वाले क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से उड़ान भरने में सक्षम यह हेलीकॉप्टर भारतीय सशस्त्र बलों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। राष्ट्रपति की यह उड़ान दो ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टरों के समूह में संपन्न हुई,जिसमें दूसरे हेलीकॉप्टर में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह सवार थे। इस संयुक्त उड़ान ने सैन्य नेतृत्व और सर्वोच्च कमांडर के बीच सामंजस्य और विश्वास का प्रतीकात्मक संदेश दिया।

राष्ट्रपति की इस ऐतिहासिक उड़ान को सशस्त्र बलों के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में देखा जा रहा है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि जब देश की सर्वोच्च कमांडर स्वयं अत्याधुनिक सैन्य प्लेटफॉर्म पर सवार होकर उसकी क्षमता का अनुभव करती हैं, तो इससे न केवल जवानों का मनोबल बढ़ता है,बल्कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता भी स्पष्ट होती है। ‘प्रचंड’ में उड़ान भरना इस बात का संकेत है कि भारत अब रक्षा उपकरणों के निर्माण में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

यह पहली बार नहीं है,जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किसी सैन्य प्लेटफॉर्म पर सॉर्टी की हो। इससे पहले दिसंबर माह में उन्होंने भारतीय नौसेना की स्वदेशी रूप से निर्मित कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर पर सवार होकर समुद्री अभियान में भाग लिया था। यह यात्रा कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे से शुरू हुई थी। उस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी भी उनके साथ मौजूद थे। राष्ट्रपति को पनडुब्बी की परिचालन क्षमता,स्टील्थ फीचर्स और हथियार प्रणालियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई थी। उन्हें भारतीय नौसेना के अंडरवॉटर वॉरफेयर नेटवर्क से भी अवगत कराया गया था। यह दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक रहा,क्योंकि वह कलवरी क्लास पनडुब्बी पर सवार होने वाली भारतीय इतिहास की दूसरी राष्ट्रपति बनीं।

उनसे पहले पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने पनडुब्बी पर सॉर्टी कर इतिहास रचा था। राष्ट्रपति मुर्मु की इस पहल ने उस परंपरा को आगे बढ़ाया,जिसमें राष्ट्राध्यक्ष सशस्त्र बलों के साथ सीधे जुड़कर उनकी क्षमताओं को समझते और सराहते हैं।

इसी क्रम में अक्टूबर के अंत में राष्ट्रपति ने हरियाणा के अंबाला स्थित वायुसेना स्टेशन पर पहुँचकर फ्रांसीसी मूल के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरी थी। 29 अक्टूबर को संपन्न इस सॉर्टी के दौरान उन्होंने फाइटर पायलट सूट और सभी आवश्यक उपकरण पहनकर उड़ान का अनुभव लिया। यह क्षण भी भारतीय रक्षा इतिहास में विशेष महत्व रखता है,क्योंकि इससे पहले किसी राष्ट्रपति ने इस प्रकार आधुनिक बहु-भूमिका लड़ाकू विमान में उड़ान नहीं भरी थी।

राष्ट्रपति मुर्मु ने इससे पूर्व 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर वायुसेना स्टेशन पर सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में भी सॉर्टी की थी। उस समय उन्होंने वायुसेना के पायलटों के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए उनकी दक्षता,अनुशासन और समर्पण की सराहना की थी। इन सभी अभियानों ने यह स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति सशस्त्र बलों की क्षमताओं को नजदीक से समझने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राफेल,सुखोई-30 एमकेआई, आईएनएस वाघशीर और अब ‘प्रचंड’ जैसे स्वदेशी और अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म पर राष्ट्रपति की उड़ान भारतीय सेनाओं की आधुनिकता और आत्मनिर्भर भारत अभियान का सशक्त प्रतीक है। यह केवल औपचारिकता नहीं,बल्कि एक स्पष्ट संदेश है कि देश की सर्वोच्च संवैधानिक पदाधिकारी रक्षा तैयारियों और तकनीकी प्रगति को गंभीरता से देख रही हैं।

जैसलमेर में आयोजित ‘वायुशक्ति 2026’ अभ्यास के दौरान जब राष्ट्रपति ने ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर में उड़ान भरी,तब वहाँ वायुसेना प्रमुख और कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इस सॉर्टी के माध्यम से उन्होंने भारतीय वायुसेना के पराक्रम,तकनीकी श्रेष्ठता और रणनीतिक तैयारी को सलाम किया। अभ्यास में विभिन्न हथियार प्रणालियों द्वारा लक्ष्यों पर सटीक प्रहार का प्रदर्शन किया गया,जिसने देश की वायु शक्ति की प्रभावशीलता को प्रदर्शित किया।

राष्ट्रपति की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है,जब भारत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा दे रहा है। ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर का विकास इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऊँचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती की क्षमता रखने वाला यह हेलीकॉप्टर सीमावर्ती इलाकों में रणनीतिक बढ़त प्रदान कर सकता है। ऐसे प्लेटफॉर्म पर राष्ट्रपति की सवारी यह दर्शाती है कि भारत अब आयात पर निर्भरता घटाकर स्वदेशी तकनीक को प्राथमिकता दे रहा है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की ‘प्रचंड’ में यह ऐतिहासिक उड़ान भारतीय सशस्त्र बलों के साहस,आधुनिकता और आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदमों का प्रतीक है। यह केवल एक सॉर्टी नहीं,बल्कि राष्ट्र की सामरिक शक्ति और आत्मविश्वास का प्रदर्शन है। इससे यह संदेश स्पष्ट रूप से जाता है कि भारत अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत करने के साथ-साथ स्वदेशी तकनीक के बल पर भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है।