अनुरा कुमार दिसानायके (तस्वीर क्रेडिट@Surender_10K)

श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायके 15 दिसंबर को भारत की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर आएँगे,पदभार ग्रहण के बाद पहली अंतर्राष्ट्रीय यात्रा

कोलंबो,11 दिसंबर (युआईटीवी)- श्रीलंका के नए राष्ट्रपति, अनुरा कुमार दिसानायके 15 दिसंबर को भारत की अपनी पहली अंतर्राष्ट्रीय यात्रा पर आ रहे हैं। यह यात्रा राष्ट्रपति के रूप में उनके पदभार ग्रहण के बाद की पहली विदेश यात्रा होगी और दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

भारत और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक और रणनीतिक रिश्ते सदियों पुराने हैं, जिनमें सांस्कृतिक,व्यापारिक और राजनीतिक पहलू जुड़े हुए हैं। श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायके की यह यात्रा इन रिश्तों को एक नई दिशा देने और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

भारत और श्रीलंका के रिश्ते हमेशा से मजबूत रहे हैं,खासकर रक्षा,सुरक्षा और वाणिज्यिक मामलों में। हालाँकि,पिछले कुछ वर्षों में कुछ विवाद भी हुए थे,लेकिन दोनों देशों के नेता इन मुद्दों का समाधान करने के लिए हमेशा संवाद बनाए रखते हैं। राष्ट्रपति दिसानायके की यात्रा के दौरान इन मुद्दों पर भी चर्चा की संभावना है,जिससे दोनों देशों के रिश्तों में और मजबूती आ सकती है।

राष्ट्रपति दिसानायके की भारत यात्रा का उद्देश्य कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा करना है,जिसमें व्यापार,सुरक्षा और दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है। यह यात्रा खासतौर पर आर्थिक और सुरक्षा मामलों पर फोकस करेगी, क्योंकि श्रीलंका भारत के लिए एक रणनीतिक साझेदार है और भारत के लिए श्रीलंका के साथ सहयोग महत्वपूर्ण है,खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में।

राष्ट्रपति दिसानायके की यात्रा के दौरान भारत और श्रीलंका के बीच कई उच्च-स्तरीय वार्ता होने की संभावना है। इन वार्ताओं में विशेष रूप से दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने,निवेश को प्रोत्साहित करने और समुद्री सुरक्षा व आतंकवाद से निपटने के लिए साझा प्रयासों पर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा,श्रीलंका में तमिल समुदाय के अधिकारों को लेकर भी चर्चा की संभावना है,जो दोनों देशों के बीच एक संवेदनशील मुद्दा रहा है।

भारत हमेशा से श्रीलंका के विकास में सहयोगी रहा है। भारत ने श्रीलंका को आर्थिक सहायता प्रदान की है और कई परियोजनाओं में निवेश किया है,जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर,शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र शामिल है। भारत ने श्रीलंका को कोविड-19 महामारी के दौरान भी मदद की थी,जिसमें वैक्सीन सहायता,चिकित्सा सामग्री और अन्य जरूरतमंद चीजों की आपूर्ति की गई थी।

राष्ट्रपति दिसानायके की यात्रा के दौरान भारत और श्रीलंका के बीच इन सहयोगों को और विस्तार देने की संभावना है। भारत की तरफ से श्रीलंका को आर्थिक और विकासात्मक सहयोग बढ़ाने की पेशकश की जा सकती है,खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ श्रीलंका को विशेष समर्थन की आवश्यकता है।

श्रीलंका में राजनीतिक परिप्रेक्ष्य के बारे में बात करें तो हाल के वर्षों में वहाँ कई बदलाव हुए हैं। राष्ट्रपति दिसानायके ने जुलाई 2022 में पदभार ग्रहण किया था और यह उनके लिए पहला बड़ा अवसर है,जब वे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारतीय नेताओं से मुलाकात करेंगे। श्रीलंका की आंतरिक राजनीति में बदलाव के बावजूद,भारत का दृष्टिकोण हमेशा से यह रहा है कि वह श्रीलंका के लोकतांत्रिक संस्थानों का समर्थन करता है और उसकी स्थिरता को बढ़ावा देता है।

भारत श्रीलंका की आंतरिक समस्याओं में हस्तक्षेप करने के बजाय इस यात्रा के माध्यम से सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के मध्य सामरिक और व्यापारिक रिश्तों को प्रगाढ़ करने के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।

राष्ट्रपति दिसानायके की यह यात्रा केवल द्विपक्षीय रिश्तों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है,बल्कि यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के नेतृत्व और सामरिक महत्व को भी रेखांकित करती है। श्रीलंका का भारत के साथ मजबूत सहयोग हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और सामरिक स्थिति को सुदृढ़ करने में मदद करेगा। दोनों देशों के बीच पारस्परिक सहयोग बढ़ने से क्षेत्रीय स्थिरता में भी योगदान मिलेगा,जिससे समग्र वैश्विक राजनीति में एक सकारात्मक संदेश जाएगा।

राष्ट्रपति दिसानायके की भारत यात्रा 15 दिसंबर को शुरू हो रही है और यह दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्तों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह यात्रा द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने,व्यापार,सुरक्षा और सामरिक सहयोग के साथ-साथ आर्थिक सहायता और विकास पर भी केंद्रित होगी। भारत और श्रीलंका के बीच इस यात्रा से होने वाली वार्ता,दोनों देशों के लिए एक नए युग की शुरुआत हो सकती है,जिससे न केवल द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे,बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।