प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

अबू धाबी में प्रधानमंत्री मोदी ने प्रार्थना और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यूएई के पहले हिंदू मंदिर का किया उद्घाटन

नई दिल्ली,15 फरवरी (युआईटीवी)- अबू धाबी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शाम 6 बजे गूंजते संस्कृत श्‍लोकों और वैदिक भजनों के साथ मंदिर परिसर में पहुँचे। जहाँ उनका स्वागत बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) मंदिर के ईश्वरचरणदास स्वामी और अन्य प्रतिनिधियों ने किया। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में पहले हिंदू मंदिर, बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) मंदिर का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को किया,जो दुनिया भर के हिंदुओं के लिए वास्तव में ऐतिहासिक और गर्व के पल थे।

भगवान स्वामीनारायण के चरणों में प्रधानमंत्री मोदी ने फूलों की पंखुड़ियाँ अर्पित किया और अनुष्ठान करने के लिए आगे बढ़े। उद्घाटन समारोह की शुरुआत पवित्र गंगा जल चढ़ाने के साथ हुआ। शुभ बसंत पंचमी त्योहार के दिन मंदिर का उद्घाटन किया गया।

महंत स्वामी महाराज 5 फरवरी को ऐतिहासिक उद्घाटन की अध्यक्षता करने के लिए खाड़ी देश पहुँचे। प्रधानमंत्री मोदी ने महंत स्वामी महाराज के साथ ‘वैश्विक आरती’ की।

महंत स्वामी महाराज ने प्रधानमंत्री मोदी को माला पहनाई। उद्घाटन के बाद महंत स्वामी महाराज को पीएम मोदी ने प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लिया।

महाराज स्वामी नारायण की मूर्ति पर पवित्र जल चढ़ाने के लिए पीएम मोदी आगे बढ़े और मंदिर में एक पत्थर पर ‘वसुधैव कुटुंबकम’ – दुनिया एक परिवार है – का संदेश अंकित किया।

‘सद्भाव के उत्सव’ के माध्यम से प्रतिष्ठित मंदिर का उद्घाटन मनाया गया। उत्थान तथा सामुदायिक कार्यक्रमों की एक श्रृंखला पेश किया गया जो भरोसे को मजबूती देने,सभी पीढ़ियों और पृष्ठभूमि के लोगों के बीच प्रेरणादायक सद्भाव,सामुदायिक सेवा को संगठित करने आदि पर आधारित थे।

10 फरवरी से इस समारोह की शुरुआत हुई है और यह 21 फरवरी तक चलेगा।

पूरे परिसर को पीएम मोदी के आगमन से पहले शुभ प्रतीकों से सजाया गया था,जिसमें ‘स्वागत’ के संदेश संस्कृत,अरबी,अंग्रेजी और गुजराती में थे।

ब्रह्मविहारीदास स्वामी जो मंदिर परियोजना की देखरेख करते हैं,उन्होंने पहले कहा था कि, ” वैश्विक सद्भाव के लिए अबू धाबी में बीएपीएस हिंदू मंदिर एक आध्यात्मिक नखलिस्तान के रूप में कार्य करता है। यह अतीत का जश्‍न मनाता है और भविष्य को पुन: व्यवस्थित करता है। यह परम पावन प्रमुख स्वामी महाराज की आध्यात्मिकता और नेतृत्व की उदारता, ईमानदारी और मित्रता का एक कालातीत प्रमाण है।”

यह प्रतिष्ठित पत्थर का मंदिर 27 एकड़ भूमि में फैला हुआ है,जिसे संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने उपहार में दी थी। दुबई-अबू धाबी शेख जायद राजमार्ग पर अल रहबा के पास अबू मुरीखा में यह मंदिर स्थित है।

यह मंदिर 108 फीट ऊँचा है। यह मंदिर वास्तुकला की पारंपरिक नागर शैली की विशेषता को प्रदर्शित करता है। संयुक्त अरब अमीरात के सात अमीरात में से प्रत्येक का प्रतिनिधित्व करता हुआ सात शिखर का निर्माण इस मंदिर में किया गया है।

दो केंद्रीय गुंबदों, ‘डोम ऑफ हार्मनी’ और ‘डोम ऑफ पीस’ के साथ सनातन धर्म के आठ मूल्यों के प्रतीक को आठ मूर्तियों द्वारा मंदिर के प्रवेश द्वार को चिह्नित किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार,लगभग 400 मिलियन यूएई दिरहम निर्माण की लागत होने का अनुमान है।

मंदिर के लिए यूएई सरकार द्वारा 2015 में जमीन आवंटित करने के बाद खाड़ी देश के नेतृत्व को 130 करोड़ भारतीयों की ओर से प्रधानमंत्री मोदी ने धन्यवाद दिया और यूएई सरकार के पहल को “ऐतिहासिक” बताया।

 

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