वाशिंगटन,5 मार्च (युआईटीवी)- कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व,कार्यशैली और शासन मॉडल की खुलकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि मोदी एक असाधारण और बेहद अनुशासित नेता हैं,जो वर्षों से लगातार काम करते हुए देश के विकास को नई दिशा दे रहे हैं। कार्नी ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में निरंतर काम करने का उदाहरण पेश किया है और उनका ध्यान हमेशा आम लोगों तक विकास और सरकारी योजनाओं के लाभ पहुँचाने पर केंद्रित रहा है।
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में स्थित प्रसिद्ध थिंक-टैंक लोवी इंस्टीट्यूट में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कार्नी ने भारत और मोदी के नेतृत्व पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को एक ऐसे नेता के रूप में वर्णित किया जो बेहद सघन और व्यस्त राजनीतिक कार्यक्रम के बावजूद लगातार सक्रिय रहते हैं। कार्नी ने कहा कि मोदी की कार्यशैली उन्हें अन्य वैश्विक नेताओं से अलग बनाती है।
अपने संबोधन में कार्नी ने प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक अनुशासन का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले लगभग 25 वर्षों में उन्होंने एक दिन की भी छुट्टी नहीं ली है। उन्होंने कहा कि चाहे गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनकी जिम्मेदारी रही हो या भारत के प्रधानमंत्री के रूप में, उन्होंने लगातार काम किया है और देश के विकास के लिए समर्पित रहे हैं। कार्नी ने कहा, “देखिए,वह व्यक्ति वास्तव में अनोखा है। लगभग 25 साल से उन्होंने बिना एक दिन की छुट्टी लिए लगातार काम किया है। यह किसी भी नेता के लिए असाधारण प्रतिबद्धता का उदाहरण है।”
कनाडाई प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की राजनीतिक पहुँच और जनसमर्थन बेहद व्यापक है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में इतनी बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ पाना आसान नहीं होता,लेकिन मोदी ने यह कर दिखाया है। कार्नी ने कहा कि मोदी नियमित रूप से देशभर में चुनाव प्रचार और जनसभाओं में भाग लेते हैं,जहाँ अक्सर लाखों लोग उनकी रैलियों में शामिल होते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार उनकी सभाओं में करीब ढाई लाख लोग तक पहुँच जाते हैं,जो उनके व्यापक जनसमर्थन को दर्शाता है।
कार्नी ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी हालिया बैठकों ने उन्हें भारत में चल रहे आर्थिक सुधारों और डिजिटल परिवर्तन को बेहतर तरीके से समझने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में जिस प्रकार से शासन व्यवस्था को तकनीक के साथ जोड़ा गया है,वह दुनिया के कई देशों के लिए एक महत्वपूर्ण मॉडल बन सकता है।
उन्होंने विशेष रूप से भारत में लागू किए गए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर तंत्र का उल्लेख किया। कार्नी ने कहा कि मोदी सरकार के तहत किए गए वित्तीय और तकनीकी सुधारों का मुख्य उद्देश्य यह था कि सरकारी लाभ सीधे लोगों के खातों में पहुँचे और बीच में होने वाले भ्रष्टाचार या लीकेज को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह पहल करोड़ों लोगों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने में भी मददगार साबित हुई है।
कनाडाई प्रधानमंत्री ने भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में हुए बड़े बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत का डिजिटल भुगतान ढाँचा और तकनीकी नवाचार दुनिया के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है। उन्होंने विशेष रूप से भारत के लोकप्रिय डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म यूपीआई का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह की तकनीक ने वित्तीय लेन-देन को तेज,पारदर्शी और सुरक्षित बनाया है।
कार्नी ने कहा कि इन सभी सुधारों के पीछे एक स्पष्ट दृष्टि दिखाई देती है—ऐसी व्यवस्था बनाना जिसमें सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुँचे और सिस्टम में होने वाले नुकसान को न्यूनतम किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी परिणाम देने पर विशेष जोर देते हैं और यही उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी वैश्विक मंच पर भारत के उदय का नेतृत्व कर रहे हैं,लेकिन इसके साथ ही वे जमीनी स्तर पर आम नागरिकों की समस्याओं और जरूरतों पर भी उतना ही ध्यान देते हैं। कार्नी ने कहा कि यही संतुलन उन्हें एक प्रभावी नेता बनाता है। उन्होंने कहा, “एक तरफ वे वैश्विक मंच पर उभरते भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं,वहीं दूसरी ओर वे आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।”
कार्नी ने वैश्विक राजनीति और भू-राजनीतिक बदलावों के संदर्भ में भी भारत के दृष्टिकोण की चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत ने लंबे समय से एक स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति अपनाई है। उन्होंने भारत की गुटनिरपेक्ष परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि यह दृष्टिकोण आज की बदलती वैश्विक व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद से ही अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित विदेश नीति अपनाई है।
कनाडाई प्रधानमंत्री ने भारत और कनाडा के बीच संबंधों को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग की अपार संभावनाएँ हैं,खासकर नई तकनीकों और रणनीतिक क्षेत्रों में। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम कर सकते हैं और इससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लाभ होगा।
कार्नी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारत और कनाडा के बीच साझेदारी भविष्य में और मजबूत हो सकती है। उन्होंने कहा कि एआई तकनीक को अधिक सुरक्षित और लचीला बनाने के लिए वैश्विक सहयोग जरूरी है और इस दिशा में भारत एक महत्वपूर्ण साझेदार बन सकता है।
हालाँकि,उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले कुछ समय में भारत और कनाडा के संबंधों में कुछ गंभीर चुनौतियाँ सामने आई हैं,लेकिन इसके बावजूद दोनों देशों की सरकारें संबंधों को बेहतर बनाने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने के लिए प्रयास कर रही हैं।
कार्नी ने कहा कि पिछले लगभग 11 महीनों में भारत के साथ आर्थिक और सुरक्षा संबंधों में सकारात्मक प्रगति देखने को मिली है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीकी सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। हालाँकि,उन्होंने यह भी माना कि अभी इस दिशा में और बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
विश्लेषकों का मानना है कि कनाडाई प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है,जब वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। आर्थिक विकास, तकनीकी नवाचार और सक्रिय कूटनीति के कारण भारत आज अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर एक प्रभावशाली शक्ति के रूप में उभर रहा है।
कुल मिलाकर कार्नी की टिप्पणियाँ यह संकेत देती हैं कि भारत और कनाडा के बीच संबंधों को नए सिरे से मजबूत करने की कोशिशें जारी हैं। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और शासन मॉडल को एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया है,जो विकास,तकनीक और जनकल्याण को एक साथ जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है।
