पीएम मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को उनके 73वें जन्मदिन पर दी बधाई,दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों को और मजबूत करने की बात की

नई दिल्ली,8 अक्टूबर (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर वार्ता की और उन्हें उनके 73वें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और रूस के द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को उनके अच्छे स्वास्थ्य और उनके सभी प्रयासों में सफलता की कामना की।

वार्ता के दौरान पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को यूक्रेन में चल रहे संघर्ष से संबंधित ताजा घटनाक्रमों की जानकारी दी। प्रधानमंत्री मोदी ने विस्तृत जानकारी साझा करने के लिए पुतिन का धन्यवाद किया और इस मुद्दे पर भारत के दृढ़ रुख को स्पष्ट किया। दोनों नेताओं ने इस दौरान द्विपक्षीय एजेंडे की प्रगति की भी समीक्षा की और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की।

प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को इस साल के अंत में आयोजित होने वाले 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया। बता दें कि पिछले सप्ताह पुतिन ने अपनी भारत यात्रा की पुष्टि करते हुए कहा था कि वह अपने प्रिय मित्र प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “मैं दिसंबर की शुरुआत में अपनी यात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूँ और अपने प्रिय मित्र,हमारे भरोसेमंद साथी,प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा हूँ।”

रूसी राष्ट्रपति ने इस अवसर पर भारत और रूस के ऐतिहासिक संबंधों का भी उल्लेख किया। पुतिन ने सोवियत काल से दोनों देशों के मधुर संबंधों का हवाला देते हुए कहा कि भारत और रूस के बीच हमेशा से सहयोग और विश्वास का मजबूत आधार रहा है। उन्होंने भारत के रूस से ऊर्जा संसाधनों की खरीद पर अमेरिका द्वारा दबाव न झुकाने की भी सराहना की।

पुतिन ने कहा, “क्या भारत हमारे ऊर्जा संसाधनों को छोड़ देगा? अगर ऐसा होता है,तो उसे कुछ नुकसान होगा। अनुमान अलग-अलग हैं। कुछ का कहना है कि यह लगभग 9-10 अरब डॉलर हो सकता है,लेकिन अगर भारत इन दबावों के आगे झुके बिना अपने निर्णय पर कायम रहेगा,तो यह न केवल आर्थिक,बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होगा। मैं प्रधानमंत्री मोदी को जानता हूँ और मुझे भरोसा है कि वह ऐसे किसी भी निर्णय में भारतीय हितों और सम्मान को सर्वोपरि रखेंगे।”

इस बातचीत में भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के कई पहलुओं पर विचार किया गया। दोनों नेताओं ने रक्षा,ऊर्जा,विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। पुतिन ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रूस के साथ ऊर्जा सहयोग को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि भारत के रूस से तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों की खरीद,दोनों देशों के लिए स्थिर और विश्वसनीय साझेदारी का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने भविष्य में सहयोग के नए मार्ग तलाशने पर भी चर्चा की। इसमें वैश्विक सुरक्षा,जलवायु परिवर्तन और तकनीकी नवाचार जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और बढ़ाने पर जोर दिया गया। मोदी ने इस दौरान कहा कि भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के लिए लाभकारी है और इसे समय के साथ और सुदृढ़ किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बातचीत ने भारत और रूस के संबंधों में स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दोनों देशों के नेताओं ने व्यक्तिगत संबंधों के माध्यम से न केवल विश्वास बढ़ाया,बल्कि वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर सहयोग की दिशा भी स्पष्ट की। पुतिन की भारत यात्रा और वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रण से संकेत मिलता है कि दोनों देश आगामी वर्षों में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच यह वार्ता ऐसे समय में हुई है,जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और ऊर्जा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे तेजी से बदल रहे हैं। रूस और भारत दोनों ही देशों के हितों और वैश्विक रणनीतिक स्थिति को देखते हुए यह बैठक द्विपक्षीय सहयोग के नए मार्ग प्रशस्त करने वाली मानी जा रही है।

इस वार्ता के माध्यम से यह संदेश भी स्पष्ट हुआ कि भारत अपने निर्णयों में स्वतंत्र और संतुलित दृष्टिकोण अपनाता रहेगा। दोनों नेताओं ने यह भी स्वीकार किया कि अंतर्राष्ट्रीय दबावों और वैश्विक परिवर्तनों के बावजूद भारत और रूस के बीच सहयोग को कभी कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की यह बातचीत दोनों देशों के बीच रणनीतिक,आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह वार्ता न केवल मौजूदा सहयोग को मजबूत करती है,बल्कि भविष्य में भारत-रूस संबंधों के लिए नई संभावनाओं के द्वार भी खोलती है।