नई दिल्ली,12 फरवरी (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को वैश्विक एयरो-इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी कंपनी रोल्स-रॉयस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तुफान एर्गिनबिलगिच से मुलाकात की। इस बैठक के दौरान भारत में कंपनी की गतिविधियों के विस्तार,उच्च मूल्य वाली इंजीनियरिंग क्षमताओं के विकास और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में साझेदारी को लेकर व्यापक चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुलाकात को सकारात्मक बताते हुए कहा कि भारत सरकार देश में रोल्स-रॉयस की बढ़ती भागीदारी और निवेश का स्वागत करती है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि तुफान एर्गिनबिलगिच से मिलकर उन्हें खुशी हुई। उन्होंने लिखा कि रोल्स-रॉयस का भारत में अपनी गतिविधियों का विस्तार करने और देश के नवाचारी व गतिशील युवाओं के साथ साझेदारी करने का उत्साह सराहनीय है। प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि भारत में कौशल,नवाचार और तकनीकी क्षमताओं के क्षेत्र में तेजी से हो रही प्रगति वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रही है।
रोल्स-रॉयस ने भी इस बैठक को महत्वपूर्ण बताया। कंपनी की ओर से पहले जारी बयान में कहा गया था कि सीईओ ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात कर इस पर चर्चा की कि रोल्स-रॉयस किस प्रकार ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना में सक्रिय भूमिका निभा सकता है। कंपनी अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर को दुनिया का सबसे बड़ा बनाने की दिशा में काम कर रही है और जटिल विनिर्माण में सह-निर्माण तथा उच्च स्तरीय इंजीनियरिंग क्षमताओं के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। यह पहल न केवल रोजगार सृजन में सहायक होगी,बल्कि भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थान दिलाने में भी मदद करेगी।
भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग के संदर्भ में भी इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले वर्ष अक्टूबर में रोल्स-रॉयस ने भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की भारत यात्रा के दौरान आयोजित उद्योग संवादों में भाग लिया था। कंपनी का कहना है कि वह इंडिया-यूके विजन 2035 के अनुरूप दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को और सशक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। तुफान एर्गिनबिलगिच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के साथ उद्योग प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में भारत आए थे,जिससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच औद्योगिक सहयोग को नई दिशा देने की कोशिशें तेज हो रही हैं।
एर्गिनबिलगिच ने कहा कि कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति भारत को रोल्स-रॉयस का एक घरेलू बाजार बनाने की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के साथ कंपनी की साझेदारी पहले से ही मजबूत और सफल रही है और अब इसे और गहरा करने की महत्वाकांक्षा है। उनके अनुसार वायु,थल और समुद्री क्षेत्रों में कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मक रूप से उन्नत तकनीकें भारत के भीतर क्षमताओं के निर्माण और रणनीतिक साझेदारियों को विकसित करने में सहायक होंगी। इससे न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा,बल्कि रक्षा और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी भारत की स्थिति सुदृढ़ होगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रोल्स-रॉयस ‘आत्मनिर्भर भारत’ की यात्रा में भागीदार बनने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी का उद्देश्य विकास को गति देना,नवाचार को प्रोत्साहन देना और महत्वपूर्ण उद्योगों में भारत की वैश्विक उपस्थिति को सशक्त करना है। भारत में बढ़ते बुनियादी ढाँचे,कुशल मानव संसाधन और नीतिगत सुधारों को देखते हुए कंपनी यहाँ दीर्घकालिक निवेश की संभावनाएँ तलाश रही है।
रोल्स-रॉयस की नागरिक उड्डयन,रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में मजबूत विशेषज्ञता है। कंपनी के अनुसार,इन क्षेत्रों में उसकी विशिष्ट क्षमताएँ भारत में उसकी मौजूदगी को और विस्तारित करने में सक्षम बनाएँगी। नागरिक उड्डयन क्षेत्र में भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है,जहाँ विमानन बेड़े के विस्तार और रखरखाव सेवाओं की माँग लगातार बढ़ रही है। रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर जोर दिया जा रहा है,जबकि ऊर्जा क्षेत्र में स्वच्छ और कुशल समाधान की आवश्यकता बढ़ रही है। इन तीनों क्षेत्रों में रोल्स-रॉयस की भागीदारी भारत के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों के अनुरूप है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक कंपनियों की बढ़ती भागीदारी भारत के औद्योगिक परिदृश्य को नई दिशा दे रही है। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों के जरिए विदेशी निवेश और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा दे रही है। रोल्स-रॉयस जैसी कंपनियों का विस्तार भारत के विनिर्माण और अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती दे सकता है।
प्रधानमंत्री और रोल्स-रॉयस के सीईओ के बीच हुई यह मुलाकात भारत-यूके आर्थिक संबंधों में एक और सकारात्मक कदम मानी जा रही है। आने वाले वर्षों में यदि प्रस्तावित परियोजनाएं और निवेश योजनाएँ साकार होती हैं,तो यह न केवल दोनों देशों के लिए लाभकारी होगा,बल्कि भारत के ‘विकसित भारत’ लक्ष्य को भी नई गति प्रदान करेगा।
