नई दिल्ली,17 अक्टूबर (युआईटीवी)- हाल ही में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कबूलनामे ने भारत और कनाडा के बीच के राजनयिक संबंधों में और अधिक तनाव पैदा कर दिया है। ट्रूडो ने कनाडाई संसद में गवाही देते हुए कहा कि भारत के खिलाफ आरोपों के समर्थन में उनकी सरकार के पास कोई ठोस सबूत नहीं है, केवल खुफिया जानकारी है। यह बयान तब आया जब ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत के संलिप्तता का आरोप लगाया था।
भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने इस बयान का कड़ा जवाब देते हुए कहा कि ट्रूडो ने जो कुछ कहा है,वह नई दिल्ली के रुख की पुष्टि करता है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “कनाडा ने हमें अपने गंभीर आरोपों के बदले में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि ट्रूडो का “लापरवाही भरा बर्ताव” भारत-कनाडा संबंधों को नुकसान पहुँचाने के लिए जिम्मेदार है।
यह विवाद ट्रूडो के पिछले साल भारतीय अधिकारियों पर निज्जर की हत्या में संलिप्तता का आरोप लगाने के बाद शुरू हुआ था। भारत ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि ये बेतुके हैं और केवल ट्रूडो के राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा हैं। भारत ने कनाडा पर आरोप लगाया कि वह अपने देश में चरमपंथी और भारत विरोधी तत्वों को संरक्षण दे रहा है।
हरदीप सिंह निज्जर को भारत की राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने 2020 में आतंकवादी घोषित किया था। उनकी हत्या जून 2023 में सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर की गई थी। कनाडा ने इस हत्या की जाँच के दौरान भारत के उच्चायुक्त और अन्य राजनयिकों को “पर्सन ऑफ इंटरेस्ट” करार दिया, जिससे राजनयिक विवाद और बढ़ गया।
भारत ने कनाडा के प्रभारी स्टीवर्ट व्हीलर को तलब करने के कुछ घंटों बाद छह कनाडाई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया। भारत ने स्पष्ट किया कि कनाडाई अधिकारियों द्वारा भारतीय उच्चायुक्त और अन्य राजनयिकों को “निराधार निशाना” बनाना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। इसके साथ ही,भारत ने चेतावनी दी कि ट्रूडो सरकार की कार्रवाइयों ने कनाडा में भारत के अधिकारियों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।
यह घटनाक्रम न केवल भारत और कनाडा के बीच की कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि यह वैश्विक मंच पर भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है। ट्रूडो की सरकार के खिलाफ उठे सवाल और भारत की कड़ी प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के संबंधों में सुधार के लिए अब काफी मेहनत करने की आवश्यकता है। यदि दोनों पक्ष आपसी संवाद और समझौता नहीं करते हैं, तो यह विवाद और अधिक गहरा हो सकता है, जो न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुँचाएगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अस्थिरता का कारण बन सकता है।
इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि वर्तमान स्थिति को सामान्य करने के लिए दोनों देशों को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
