प्रियंका गांधी (तस्वीर क्रेडिट@ZIYAKHAN9554)

प्रियंका गांधी ने हाथ में संविधान की प्रति लेकर लोकसभा सदस्य के रूप में हिंदी में ली शपथ

नई दिल्ली,28 नवंबर (युआईटीवी)- कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने पहली बार लोकसभा सदस्य के रूप में गुरुवार को शपथ ली। केरल की वायनाड सीट से सांसद चुनी गईं प्रियंका गांधी ने संसद भवन में भारतीय संविधान की प्रति हाथ में लेकर हिंदी भाषा में शपथ ली। इस ऐतिहासिक मौके पर उनका पूरा परिवार मौजूद था। माँ सोनिया गांधी,भाई राहुल गांधी,पति रॉबर्ट वाड्रा,बेटे रेहान वाड्रा और बेटी मिराया वाड्रा समेत कई कांग्रेसी नेता और सांसद इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

प्रियंका गांधी ने अपने शपथ ग्रहण के दौरान कहा, “मैं प्रियंका गांधी वाड्रा,जो लोकसभा की सदस्य निर्वाचित हुई हूँ, सत्य निष्ठा से यह शपथ लेती हूँ कि,मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूँगी। मैं भारत की प्रभुता और अखंडता को अक्षुण्ण रखूँगी और जिस पद को मैं ग्रहण करने वाली हूँ, उसके कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक निर्वहन करूँगी। जय हिंद।”

प्रियंका गांधी क्रीम रंग की साड़ी पहने हुई नजर आई और उन्होंने लोकसभा में सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होते ही शपथ ली। इस दौरान उन्होंने भारतीय संविधान की प्रति हाथ में थाम रखी थी,जिसे वह उत्साहपूर्वक हवा में दिखा रही थीं।

वायनाड उपचुनाव में प्रियंका गांधी ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) के सत्यन मोकेरी को भारी अंतर से हराया। प्रियंका को 6,22,338 वोट मिले,जबकि मोकेरी को 2,11,407 वोट ही हासिल हुए। भाजपा उम्मीदवार नव्या हरिदास तीसरे स्थान पर रहीं, जिन्हें 1,09,939 वोट मिले। प्रियंका ने 4,10,931 वोटों के बड़े अंतर से यह जीत दर्ज की, जो उनके राजनीतिक करियर की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

इस शपथ ग्रहण के साथ ही भारतीय संसद में गांधी-नेहरू परिवार के तीन सदस्य पहली बार एक साथ दिखाई दिए। राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं,जबकि सोनिया गांधी राज्यसभा की सदस्य हैं। प्रियंका गांधी की यह पहली संसदीय पारी है।

संसद भवन में प्रियंका के शपथ ग्रहण समारोह को देखने के लिए गैलरी में सोनिया गांधी,रॉबर्ट वाड्रा,उनके दोनों बच्चे,मल्लिकार्जुन खड़गे,रंजीत रंजन और अन्य कांग्रेसी सांसद मौजूद थे। जैसे ही प्रियंका ने लोकसभा में प्रवेश किया,कांग्रेस सांसदों ने उन्हें घेर लिया और फोटो तथा सेल्फी लेने लगे।

शपथ ग्रहण के बाद प्रियंका गांधी ने विपक्षी सांसदों और सत्तारूढ़ दल के नेताओं का अभिवादन किया। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से भी मुलाकात की। इसके बाद प्रियंका ने गैलरी में बैठी अपनी माँ सोनिया गांधी और सास का अभिवादन किया।

हालाँकि,शपथ ग्रहण के तुरंत बाद संसद की कार्यवाही हँगामे की भेंट चढ़ गई। विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी,जिससे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

प्रियंका गांधी ने 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान सक्रिय राजनीति में कदम रखा, लेकिन उस समय उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा। वह कांग्रेस पार्टी की महासचिव के रूप में उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र की जिम्मेदारी सँभाल रही थीं। इस बार वायनाड उपचुनाव में पहली बार चुनावी मैदान में उतरीं प्रियंका ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

वायनाड लोकसभा सीट कांग्रेस पार्टी के लिए विशेष महत्व रखती है। 2019 में, राहुल गांधी ने इस सीट से 3.65 लाख वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। हालाँकि,राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट पर हार के बावजूद लोकसभा में रायबरेली सीट से प्रतिनिधित्व करने का निर्णय लिया। इसके बाद वायनाड सीट खाली हो गई,जहाँ 13 नवंबर को उपचुनाव हुआ और प्रियंका गांधी ने कांग्रेस का मजबूत आधार बनाए रखा।

प्रियंका गांधी के शपथ ग्रहण समारोह में उनके परिवार ने विशेष भूमिका निभाई। पति रॉबर्ट वाड्रा,बेटे रेहान और बेटी मिराया के साथ-साथ सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बनकर प्रियंका का मनोबल बढ़ाया।

प्रियंका गांधी के लोकसभा सदस्य बनने को कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। वायनाड में उनकी जीत कांग्रेस के मजबूत आधार को प्रदर्शित करती है। उनके सांसद बनने से कांग्रेस को न केवल दक्षिण भारत में,बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी एक नया चेहरा और शक्ति मिली है।

प्रियंका गांधी की लोकसभा सदस्यता कांग्रेस के लिए एक नई उम्मीद की किरण मानी जा रही है। वह अपने भाषणों और कार्यों के माध्यम से पार्टी के विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकती हैं। उनकी राजनीतिक सूझबूझ और परिवार की विरासत का अनुभव उन्हें संसद में एक प्रभावशाली नेता बना सकता है।

प्रियंका गांधी वाड्रा का लोकसभा सदस्य के रूप में शपथ लेना भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक क्षण है। वायनाड सीट पर उनकी बड़ी जीत ने यह साबित कर दिया है कि कांग्रेस का समर्थन आधार अब भी मजबूत है। उनके संसद में आने से कांग्रेस को नई ऊर्जा मिलेगी और वह राष्ट्रीय राजनीति में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकेंगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रियंका अपने संसदीय कार्यकाल के दौरान अपने वायनाड क्षेत्र और राष्ट्रीय राजनीति में क्या योगदान देती हैं।