पंजाब: सीएम मान ने गुरबाणी के सीधे प्रसारण पर टालमटोल के लिए एसजीपीसी की आलोचना की

पंजाब: सीएम मान ने गुरबाणी के सीधे प्रसारण पर टालमटोल के लिए एसजीपीसी की आलोचना की

चंडीगढ़, 22 जुलाई (युआईटीवी/आईएएनएस)- पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) पर बादल परिवार के समर्थक चैनल को फायदा पहुंचाने के लिए पवित्र गुरबाणी के सीधे प्रसारण के मुद्दे पर जान-बूझकर टालमटोल का आरोप लगाया।

मुख्यमंत्री ने यहां मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि गुरबाणी का अमृतमय रस “फ्री-टू-एयर और फ्री-ऑफ-कॉस्ट प्रसारण के साथ हर घर तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करने की बजाय एसजीपीसी ने केवल यह सुनिश्चित करने के लिए यू-टर्न लिया है कि प्रसारण अधिकार एक ही चैनल के हाथों में रहें”।

उन्होंने कहा कि हैरानी की बात है कि मानवता के व्यापक हित में काम करने की बजाय एसजीपीसी गुरबाणी के मुफ्त प्रसारण के मामले में अत्यधिक देरी करके बादल परिवार की सनक पर काम कर रही है।

मान ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ने एक साल पहले गुरबाणी के मुफ्त प्रसारण के लिए एक चैनल शुरू करने की वकालत की थी, लेकिन एसजीपीसी तब से गहरी नींद में है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जत्थेदार ने भी अपने पत्र में गुरबाणी के प्रसारण वाले किसी भी चैनल का नाम नहीं लिया है, लेकिन ‘राजा से भी अधिक वफादार’ होने के नाते एसजीपीसी ने अपने आकाओं को खुश करने के लिए उसी चैनल को जारी रखने के लिए कहा है।

उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एसजीपीसी में शीर्ष पर बैठे लोगों के निजी हित ‘संगत’ को गुरबाणी से वंचित रख रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि अगर मौका दिया जाए तो राज्य सरकार 24 घंटे के भीतर गुरबाणी के लाइव और फ्री-टू-एयर प्रसारण की सभी व्यवस्था करने की सेवा कर सकती है।

उन्होंने ज्यादातर सरकारी आयोजनों की लाइव फीड का उदाहरण देते हुए कहा कि ज्यादातर समय इसकी व्यवस्था एक घंटे के अंदर ही कर दी जाती है। मान ने कहा कि इससे हर सैटेलाइट और वेब चैनल पर गुरबानी का मुफ्त प्रसारण सुनिश्चित होगा, वह भी कुछ ही सेकंड में, जिससे जनता को फायदा होगा।

एक प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विडंबना है कि राज्यपाल को यह नहीं पता कि राज्य द्वारा बुलाया गया सत्र वैध है या अवैध।

उन्होंने कहा कि पहले भी कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने दो ऐसे सत्र बुलाए थे जहां बाद में राज्यपाल की मंजूरी ली गई थी।

मान ने कहा कि राज्य ने कानूनविदों से परामर्श करने के बाद और संविधान के अनुरूप सत्र बुलाया था।

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