राँची से दिल्ली जा रही एयर एंबुलेंस चतरा में क्रैश,सात की मौत (तस्वीर क्रेडिट@MPMahatoJMM)

राँची से दिल्ली जा रही एयर एंबुलेंस चतरा में क्रैश,सात की मौत,कोलकाता रडार से संपर्क पर उठे सवाल

राँची,24 फरवरी (युआईटीवी)- झारखंड की राजधानी राँची से सोमवार शाम दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाली एक एयर एंबुलेंस कुछ ही मिनटों बाद चतरा जिले की कसरिया पंचायत में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस भीषण हादसे में विमान में सवार सभी सात लोगों की मौत हो गई। घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है और इसके साथ ही कई गंभीर सवाल भी खड़े हो गए हैं,जिनका जवाब अब जाँच एजेंसियों को तलाशना है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार एयर एंबुलेंस ने राँची एयरपोर्ट से नियमित प्रक्रिया के तहत टेकऑफ किया था और उसे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुँचना था। सामान्यतः राँची से दिल्ली जाने वाली उड़ान वाराणसी और लखनऊ के हवाई क्षेत्र से गुजरते हुए उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ती है,लेकिन इस मामले में सामने आई जानकारी ने राँची को और जटिल बना दिया है। बताया जा रहा है कि टेकऑफ के कुछ समय बाद विमान ने कोलकाता रडार से संपर्क किया,जबकि कोलकाता इस निर्धारित मार्ग की बिल्कुल विपरीत दिशा में स्थित है।

यही तथ्य अब सबसे बड़ा रहस्य बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि उड़ान के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी समस्या उत्पन्न होती है,तो पायलट आमतौर पर निकटतम एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क करता है। राँचीसे उड़ान भरने के बाद गया अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा अपेक्षाकृत नजदीक पड़ता है। इसके अलावा पटना और वाराणसी एयरपोर्ट भी लगभग समान दूरी पर स्थित हैं। ऐसे में यह प्रश्न उठ रहा है कि पायलट ने इन एयरपोर्ट्स के एटीसी से संपर्क करने के बजाय कोलकाता रडार से संपर्क क्यों साधा।

कुछ सूत्रों का अनुमान है कि संभवतः टेकऑफ के बाद विमान किसी तकनीकी गड़बड़ी के कारण अपने निर्धारित मार्ग से भटक गया हो। यह भी आशंका जताई जा रही है कि क्या नेविगेशन सिस्टम में खराबी आई थी,जिसके चलते विमान विपरीत दिशा में मुड़ गया। हालाँकि,अभी तक इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विमान का संपर्क कुछ ही समय बाद सभी एटीसी से टूट गया और फिर वह चतरा जिले के कसरिया पंचायत क्षेत्र में जा गिरा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दुर्घटना के बाद इलाके में जोरदार धमाका सुनाई दिया और धुएँ का गुबार उठता देखा गया। स्थानीय ग्रामीण सबसे पहले घटनास्थल पर पहुँचे और प्रशासन को सूचना दी। पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुँचे,लेकिन तब तक विमान पूरी तरह जल चुका था। सभी सात लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं। मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।

हादसे के बाद नागरिक उड्डयन क्षेत्र की नियामक संस्था नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने जाँच के आदेश दे दिए हैं। डीजीसीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत तकनीकी जाँच की जाएगी। विमान के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर की तलाश की जा रही है,ताकि अंतिम क्षणों की गतिविधियों का विश्लेषण किया जा सके। यदि ये उपकरण सुरक्षित अवस्था में मिलते हैं,तो दुर्घटना की वजह स्पष्ट होने में मदद मिल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एयर एंबुलेंस उड़ानों में अक्सर समय की संवेदनशीलता अधिक होती है,क्योंकि इनमें मरीजों को आपात स्थिति में एक शहर से दूसरे शहर ले जाया जाता है। हालाँकि,अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस विमान में कोई मरीज था या नहीं। प्रशासन ने कहा है कि सभी पहलुओं की जाँच की जाएगी,जिसमें विमान की तकनीकी स्थिति,मौसम की परिस्थितियाँ,पायलट का अनुभव और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के साथ हुई बातचीत शामिल है।

इस हादसे ने हवाई सुरक्षा मानकों को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। खासकर यह सवाल कि क्या टेकऑफ के बाद विमान ने गलत दिशा क्यों पकड़ी या क्या उसे किसी आपात स्थिति के चलते रूट बदलना पड़ा। यदि ऐसा था तो इसकी सूचना निकटतम एटीसी को क्यों नहीं दी गई। कोलकाता रडार से संपर्क की खबर ने इस मामले को और रहस्यमय बना दिया है।

राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। वहीं स्थानीय प्रशासन ने घटनास्थल को सील कर दिया है,ताकि जाँच टीम बिना किसी बाधा के साक्ष्य एकत्र कर सके। आने वाले दिनों में डीजीसीए की प्रारंभिक रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह हादसा तकनीकी विफलता का परिणाम था,मानवीय भूल थी या किसी अन्य कारण से हुआ।

फिलहाल राँची से दिल्ली जा रही इस एयर एंबुलेंस के क्रैश ने कई अनुत्तरित प्रश्न छोड़ दिए हैं। जब तक आधिकारिक जाँच रिपोर्ट सामने नहीं आती,तब तक कोलकाता रडार से संपर्क और रूट विचलन जैसे पहलू चर्चा और अटकलों का विषय बने रहेंगे।