मुंबई,12 दिसंबर (युआईटीवी)- भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय बैंक की प्राथमिकताओं और नीतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए प्रौद्योगिकी के अधिक उपयोग की आवश्यकता और नीतिगत मामलों में निरंतरता और स्थिरता बनाए रखने की बात कही। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि आरबीआई का ध्यान केवल मौजूदा चुनौतियों पर नहीं बल्कि भविष्य की संभावनाओं पर भी केंद्रित रहेगा।
आईआईटी कानपुर से ग्रेजुएट संजय मल्होत्रा ने आरबीआई के 26वें गवर्नर के रूप में पदभार ग्रहण किया है और उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक का उद्देश्य वित्तीय सेवाओं को सभी तक पहुँचाना है और इसके लिए प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि, “हमें लागत को कम करने और वित्तीय सेवाओं को सर्वव्यापी बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का और अधिक उपयोग करने की आवश्यकता है।” उनका मानना है कि प्रौद्योगिकी न केवल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है,बल्कि यह वित्तीय सेवाओं की पहुँच को भी व्यापक बना सकती है। इसके बावजूद,मल्होत्रा ने इस बात पर जोर दिया कि नवाचार (इनोवेशन ) के जोखिमों के प्रति सतर्क रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि, “इनोवेशन एक चाबी है और हमें इसके जोखिमों के बारे में भी सतर्क रहना होगा और जरूरी सुरक्षा उपाय करने होंगे।”
संजय मल्होत्रा ने अपने कार्यभार संभालने के बाद आरबीआई की सबसे बड़ी जिम्मेदारी के रूप में वित्तीय समावेशन को परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि, “भारत में वित्तीय समावेशन में बहुत प्रगति हुई है,देश के हर कोने में बैंक पहुँच गए हैं,लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।” उनका यह बयान दर्शाता है कि आरबीआई का प्राथमिक उद्देश्य केवल मौजूदा वित्तीय प्रणाली को मजबूत करना नहीं है,बल्कि देश के हर नागरिक तक वित्तीय सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना भी है।
आरबीआई गवर्नर मल्होत्रा ने इस बात पर भी जोर दिया कि आरबीआई समेत सभी संस्थाओं को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि ज्ञान पर उनका एकाधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि, “परामर्श हमारी नीति निर्माण का एक और महत्वपूर्ण स्तंभ है ” और यह स्पष्ट किया कि आरबीआई और अन्य संस्थाओं के बीच विचारों का आदान-प्रदान और सहयोग नीतियों की गुणवत्ता को बेहतर बना सकता है। उनका यह बयान यह दर्शाता है कि वे किसी भी प्रकार के केंद्रीकरण के बजाय अधिक पारदर्शी और समावेशी नीतियों की ओर अग्रसर होंगे।
नए आरबीआई गवर्नर ने वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक माहौल में मौजूदा अनिश्चितताओं के बीच सतर्क रहने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने वैश्विक संकटों और बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक स्थिर और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की बात की। उनका यह बयान वैश्विक आर्थिक संकट और भारत के घरेलू चुनौतियों के साथ तालमेल बिठाने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
संजय मल्होत्रा का यह बयान इस बात को भी दर्शाता है कि वे केंद्रीय बैंक के गवर्नर के रूप में न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं,बल्कि वे इसे वैश्विक संदर्भ में भी मजबूती से खड़ा करने के लिए कार्य करेंगे। इसके अलावा, उन्होंने आरबीआई की विरासत को बनाए रखने के लिए वित्तीय विनियामकों,राज्य सरकारों और केंद्र के साथ निरंतर बातचीत जारी रखने की बात की,ताकि विभिन्न पक्षों के बीच तालमेल बनाए रखा जा सके।
संजय मल्होत्रा ने केंद्रीय बैंक के प्रमुख के रूप में पदभार ग्रहण किया है। उनका कार्यकाल तीन साल का होगा और उन्हें कई महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण मुद्दों से जूझना पड़ेगा। उनके सामने कई चुनौतियाँ होंगी,जिसमें महँगाई को नियंत्रण में रखना,विकास को बढ़ावा देना तथा मजबूत होते अमेरिकी डॉलर के बीच रुपये के अवमूल्यन को रोकने के बीच संतुलन बनाए रखना शामिल है। इसके अलावा,भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए नीतियों में बदलाव लाने और उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करने की जिम्मेदारी भी उन्हें निभानी होगी।
1990 बैच के आईएएस अधिकारी संजय मल्होत्रा,जो पहले वित्त मंत्रालय में राजस्व सचिव के रूप में कार्यरत थे,उनकी नियुक्ति आरबीआई के गवर्नर के रूप में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके पास आर्थिक और वित्तीय नीति निर्माण का लंबा अनुभव है,जो आरबीआई के कार्यों को मार्गदर्शन देने में सहायक होगा। उनकी विशेषज्ञता और दृष्टिकोण भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद करेगा।
संजय मल्होत्रा की प्राथमिकताएँ वित्तीय समावेशन,प्रौद्योगिकी का उपयोग,सतर्क नीति निर्माण और वैश्विक संदर्भ में भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना हैं। उनके सामने कई चुनौतियाँ हैं,लेकिन उनके नेतृत्व में आरबीआई का उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाना और वित्तीय सेवाओं को व्यापक बनाना होगा।