आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास

आरबीआई ने लगातार 11वीं बार रेपो रेट को रखा स्थिर,सीआरआर में कटौती की

नई दिल्ली,6 दिसंबर (युआईटीवी)- भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई ) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की बैठक के परिणाम की घोषणा शुक्रवार को किया गया। रेपो रेट में इस बार भी कोई बदलाव नहीं किया गया है और इसे लगातार 11वीं बार 6.50 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस निर्णय की घोषणा करते हुए कहा कि इस समय मौद्रिक नीति को कड़े बनाए रखने का निर्णय लिया गया है। रेपो रेट में बदलाव न होने की उम्मीद पहले से थी,क्योंकि आर्थिक विशेषज्ञ और जानकार इससे पहले ही अनुमान लगा रहे थे कि आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति में बदलाव नहीं करेगा।

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि रेपो रेट को स्थिर रखने के निर्णय के पीछे का मुख्य कारण हमारी प्राथमिकता महंगाई को काबू में रखना है। उन्होंने कहा, “हमारी कोशिश यह सुनिश्चित करना है कि आरबीआई अधिनियम के फ्लेक्सिबल टारगेटिंग फ्रेमवर्क का पालन किया जाए। प्राइस स्टेबिलिटी को बनाए रखना हमारी अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।” दास ने यह भी बताया कि प्राइस स्टेबिलिटी लोगों की क्रय शक्ति को प्रभावित करती है और इसका असर व्यापारों पर भी पड़ता है। इसलिए महँगाई को नियंत्रित किया जाना जरूरी है,जिससे अर्थव्यवस्था के सभी हिस्सों में स्थिरता बनी रहे।

इस बैठक के दौरान,आरबीआई ने ऋण आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती करने का भी फैसला लिया। इसके बाद, सीआरआर को घटाकर 4 प्रतिशत कर दिया गया है। सीआरआर वह प्रतिशत होता है,जो बैंक को अपने कुल जमा का केंद्रीय बैंक के पास लिक्विड रिजर्व के रूप में रखना होता है। इस कदम से बैंकों को अधिक लिक्विडिटी मिलने की संभावना है,जिससे वे अधिक कर्ज दे सकते हैं और अर्थव्यवस्था में तरलता का संचार होगा।

आरबीआई गवर्नर ने बताया कि स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) को भी 6.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है। साथ ही, बैंक रेट और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी को 6.75 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है। इन सभी कदमों का उद्देश्य सस्टेनेबल प्राइस स्टेबिलिटी और उच्च विकास की नींव को मजबूत करना है।

महँगाई के पूर्वानुमान को लेकर भी आरबीआई ने अपनी घोषणा की। वित्त वर्ष 2025 के लिए महँगाई का अनुमान 4.8 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई है। वहीं,चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में महँगाई 5.7 प्रतिशत और चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके अतिरिक्त,वित्त वर्ष 2026 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए महँगाई क्रमशः 4.6 प्रतिशत और 4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इस प्रकार,आरबीआई ने महँगाई को नियंत्रित रखने की दिशा में अपनी कोशिशों को जारी रखने का संकेत दिया है।

आरबीआई की इस मौद्रिक नीति से यह साफ हो गया है कि भारतीय केंद्रीय बैंक अपनी प्राथमिकताओं के तहत महँगाई पर कड़ी निगरानी रखे हुए है। इसके साथ ही, आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने के लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं। यह नीति अर्थव्यवस्था में संतुलन बनाए रखने और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाई गई है। हालाँकि, महँगाई के रुझान पर ध्यान केंद्रित करते हुए,सरकार और केंद्रीय बैंक दोनों ही दीर्घकालिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहे हैं।

इस तरह की नीति के परिणामस्वरूप बैंकों को अतिरिक्त लिक्विडिटी मिलने की संभावना है,जो कर्ज लेने और निवेश को बढ़ावा दे सकती है। साथ ही, महँगाई पर काबू पाने के उपायों से क्रय शक्ति में सुधार हो सकता है और व्यापारों के लिए भी यह अच्छा संकेत है। इन सभी उपायों का उद्देश्य आर्थिक स्थिति को स्थिर बनाए रखना है, ताकि देश की विकास दर बढ़े और वित्तीय स्थिरता बनी रहे।