एलपीजी से भरा जहाज ‘शिवालिक’ सुरक्षित पार कर गया होर्मुज जलडमरूमध्य (तस्वीर क्रेडिट@MuditJain_IN)

युद्ध के बीच भारत को राहत,एलपीजी से भरा जहाज ‘शिवालिक’ सुरक्षित पार कर गया होर्मुज जलडमरूमध्य

नई दिल्ली,14 मार्च (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में अमेरिका,इजरायल और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। संघर्ष के 15वें दिन भारत का एलपीजी (रसोई गैस) ले जाने वाला जहाज ‘शिवालिक’ शुक्रवार रात सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर गया। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और हाल के दिनों में यहाँ बढ़ते सैन्य तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ गई थी। ऐसे में भारतीय एलपीजी जहाज का सुरक्षित निकलना देश के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाली ट्रैकिंग साइट ‘मरीनट्रैफिक’ के मुताबिक यह जहाज 7 मार्च को कतर से अमेरिका के लिए रवाना हुआ था। हालाँकि,यह जहाज भारत की सरकारी कंपनी भारतीय जहाजरानी निगम का है और इसकी क्षमता करीब 50,000 टन से अधिक एलपीजी ले जाने की है। ऐसे में इस जहाज का सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार करना भारत की ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

दरअसल,होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस इसी रास्ते से होकर दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुँचता है। यही कारण है कि जब भी इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल-गैस के दामों को लेकर चिंताएँ भी बढ़ जाती हैं। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के कारण भी हाल के दिनों में इस मार्ग की सुरक्षा को लेकर कई तरह की आशंकाएँ जताई जा रही थीं।

हालाँकि,भारत के लिए फिलहाल एलपीजी आपूर्ति को लेकर कोई संकट की स्थिति नहीं है। सरकार का कहना है कि देश में पर्याप्त मात्रा में रसोई गैस उपलब्ध है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। इसके बावजूद वैश्विक हालात को देखते हुए कई जगहों पर लोग एहतियात के तौर पर एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग बढ़ा रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में यह भी देखा गया है कि लोग अतिरिक्त सिलेंडर बुक करके जमा करने की कोशिश कर रहे हैं।

इस स्थिति को लेकर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी लोगों से संयम बरतने की अपील की है। मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से फैल रही गलत सूचनाओं के कारण लोगों में अनावश्यक घबराहट देखी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में घरेलू एलपीजी की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है और किसी तरह की कमी की आशंका नहीं है।

सरकार के अनुसार देश में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी का औसत चक्र लगभग ढाई दिन का है। यानी उपभोक्ताओं को बुकिंग के बाद सामान्य परिस्थितियों में दो से तीन दिनों के भीतर सिलेंडर मिल जाता है। अधिकारियों का कहना है कि यदि लोग घबराहट में जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक करते हैं या जमाखोरी करते हैं तो इससे आपूर्ति व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कुछ अतिरिक्त उपाय भी लागू किए हैं। सिलेंडर की डिलीवरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड यानी डीएसी सिस्टम लागू किया गया है। इस व्यवस्था के तहत जब सिलेंडर डिलीवर किया जाएगा,तो ग्राहक को डिलीवरी करने वाले व्यक्ति को एक विशेष कोड देना होगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सिलेंडर सही उपभोक्ता तक ही पहुँचे और किसी तरह का डायवर्जन या दुरुपयोग न हो।

इसके अलावा अस्थायी तौर पर एलपीजी बुकिंग के बीच न्यूनतम अंतराल को भी बढ़ा दिया गया है। पहले जहाँ उपभोक्ता 21 दिन के अंतराल पर नया सिलेंडर बुक कर सकते थे,वहीं अब इस अवधि को बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम केवल एहतियात के तौर पर उठाया गया है,ताकि आपूर्ति प्रणाली संतुलित बनी रहे।

उधर मध्य पूर्व में जारी संघर्ष लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिकी सेना ने फारस की खाड़ी में स्थित ईरान के रणनीतिक केंद्र खर्ग द्वीप पर मौजूद सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर उन्हें तबाह कर दिया है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि जरूरत पड़ी तो इस क्षेत्र में मौजूद तेल से जुड़े बुनियादी ढाँचे को भी निशाना बनाया जा सकता है।

खर्ग द्वीप ईरान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि देश के कुल कच्चे तेल के निर्यात का लगभग 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा इसी द्वीप से होकर गुजरता है। ऐसे में यदि इस क्षेत्र में किसी तरह की बड़ी सैन्य कार्रवाई होती है,तो उसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल भारत के एलपीजी जहाज ‘शिवालिक’ का सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार करना राहत की खबर जरूर है,लेकिन मध्य पूर्व में जारी तनाव को देखते हुए आने वाले दिनों में स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखना जरूरी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र की स्थिरता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है और किसी भी प्रकार की बड़ी बाधा का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।