ईरान से लौटे भारतीयों के स्वागत में दिल्ली एयरपोर्ट पर भावनाओं का सैलाब (तस्वीर क्रेडिट@OpIndia_in)

राहत,आँसू और मुस्कान: ईरान से लौटे भारतीयों के स्वागत में दिल्ली एयरपोर्ट पर भावनाओं का सैलाब

नई दिल्ली,17 जनवरी (युआईटीवी)- दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शुक्रवार को भावनाओं का एक अलग ही दृश्य देखने को मिला,जब ईरान से लौट रहे भारतीय नागरिकों के स्वागत के लिए उनके परिजन बेसब्री,राहत और उत्साह के साथ इंतज़ार करते नजर आए। बीते कुछ दिनों से ईरान में इंटरनेट सेवाएँ बंद होने और संपर्क टूटने की खबरों ने परिवारों की चिंता को लगातार बढ़ा दिया था। ऐसे में अपनों की सुरक्षित वापसी की सूचना मिलते ही एयरपोर्ट पर पहुँचे परिजनों के चेहरों पर राहत की मुस्कान और आँखों में खुशी के आँसू साफ झलक रहे थे।

एयरपोर्ट के आगमन टर्मिनल के बाहर कई परिवार हाथों में फूल,दुपट्टे और मिठाइयाँ लिए खड़े दिखे। जैसे ही यात्रियों का निकलना शुरू हुआ,परिजनों की नजरें हर चेहरे को पहचानने की कोशिश करती रहीं। किसी को अपनी माँ का इंतज़ार था,तो कोई पिता और बहन को गले लगाने के लिए बेचैन दिखा। कई परिवारों के लिए यह पल इसलिए भी खास था क्योंकि पिछले एक हफ्ते से उनके और उनके प्रियजनों के बीच किसी भी तरह का संपर्क नहीं हो पाया था।

एक परिवार के सदस्य ने बताया कि उनकी माँ और मौसी तीर्थयात्रा के लिए ईरान गई थीं। उन्होंने कहा, “पिछले एक हफ्ते से वहाँ इंटरनेट बंद था,इसलिए हम उनसे बात नहीं कर पा रहे थे। हर दिन खबरें आ रही थीं कि हालात ठीक नहीं हैं। यह हमारे लिए बहुत चिंता भरा समय था। अब जब हमें पता चला कि वे सुरक्षित लौट रही हैं,तो दिल को बहुत सुकून मिला है।” उनके चेहरे पर उत्साह साफ झलक रहा था और वे लगातार फोन पर रिश्तेदारों को सुरक्षित वापसी की खबर दे रहे थे।

एक अन्य परिजन ने बताया कि उनकी माँ 7 जनवरी को तीर्थयात्रा के लिए ईरान पहुँचीं थीं। शुरुआती दो दिनों तक उनसे नियमित बातचीत होती रही थी,जिससे परिवार को कोई चिंता नहीं थी,लेकिन 8 जनवरी के बाद अचानक इंटरनेट बंद हो गया और संपर्क पूरी तरह टूट गया। उन्होंने कहा, “माँ ने पहले ही हमें बताया था कि वहाँ सब कुछ सामान्य है,घबराने की कोई बात नहीं है,लेकिन जब कई दिनों तक उनसे बात नहीं हो पाई,तो चिंता स्वाभाविक थी। अब उनके लौटने की खबर से हमें बहुत राहत मिली है।”

दिल्ली एयरपोर्ट पर एक और परिवार अपने पिता और बहन को लेने पहुँचा था। उन्होंने सरकार की भूमिका की सराहना करते हुए कहा, “सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है। हम इसके लिए धन्यवाद देते हैं। हमें खुशी है कि हमारे अपने सुरक्षित वापस आ रहे हैं।” उनके अनुसार,ऐसे हालात में सरकार और दूतावास की सक्रियता ने परिवारों का भरोसा बनाए रखा।

एयरपोर्ट पर मौजूद कुछ परिजन दिल्ली के रहने वाले थे,जबकि उनके रिश्तेदार उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से थे,जो तीर्थयात्रा के लिए ईरान गए थे। उन्होंने बताया कि वहाँ का माहौल थोड़ा तनावपूर्ण जरूर बताया गया था,लेकिन किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। यात्रियों की सुरक्षा को लेकर दूतावास लगातार संपर्क में था,जिससे हालात काबू में रहे।

एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि उनकी भाभी और उनके गाँव के आठ लोग भी इसी फ्लाइट से वापस लौट रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम लगातार खबरें देख रहे थे और अफवाहों की वजह से डर भी लग रहा था,लेकिन अब जब वे सुरक्षित लौट रहे हैं,तो बहुत खुशी हो रही है।” उनके साथ आए अन्य रिश्तेदार भी राहत की सांस लेते नजर आए।

एयरपोर्ट पर खड़े एक व्यक्ति ने ईरान में फैली अफवाहों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वहाँ व्यवस्थाएँ काफी अच्छी हैं। उन्होंने कहा, “कुछ लोग दंगे और अशांति की बातें फैला रहे थे,लेकिन हमारी माँ से जब भी थोड़ी बहुत बात हो पाई,उन्होंने बताया कि हालात सामान्य हैं। ईरानी सरकार स्थिति को सँभाल रही है और भारतीय सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में,हमारी बहुत मदद कर रही है।” उनके शब्दों में विश्वास और संतोष साफ झलक रहा था।

ईरान से लौटे भारतीय नागरिकों ने भी मीडिया से बातचीत में अपने अनुभव साझा किए। एक यात्री ने बताया कि अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और पहले जैसी नहीं रही। उन्होंने कहा कि शुरुआती दिनों में थोड़ी अनिश्चितता जरूर थी,लेकिन किसी तरह की सीधी परेशानी नहीं हुई।

एक अन्य लौटे यात्री ने कहा, “फिलहाल हालात स्थिर हैं। इंटरनेट बंद था और अंतर्राष्ट्रीय कॉल भी काम नहीं कर रहे थे,जिससे हम डर गए थे। परिवार से संपर्क टूटना सबसे मुश्किल था। बाद में कॉल की सुविधा बहाल हुई। इस दौरान भारतीय दूतावास और सरकार ने हमारी बहुत मदद की,इसके लिए हम आभारी हैं।” उन्होंने बताया कि दूतावास की ओर से समय-समय पर जानकारी और सहायता उपलब्ध कराई जाती रही।

एक और भारतीय नागरिक ने कहा कि वे पूरी तरह सुरक्षित थे और किसी तरह की अप्रिय घटना का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी तरफ से ही वापसी का फैसला किया था। उनके अनुसार,हालात उतने खराब नहीं थे,जितने सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में दिखाए जा रहे थे।

एक अन्य यात्री ने इंटरनेट बंद होने को लेकर कहा कि यह कदम नियंत्रण और सुरक्षा के उद्देश्य से उठाया गया था। उन्होंने कहा, “कोई असामान्य स्थिति नहीं थी। ऐसी बातें हर देश में होती रहती हैं। पर्यटकों को कोई परेशानी नहीं हुई और सब कुछ सामान्य था।” उनके मुताबिक,स्थानीय प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए था और किसी भी तरह की अफरा-तफरी नहीं थी।

दिल्ली एयरपोर्ट पर यह दृश्य केवल यात्रियों की वापसी का नहीं था,बल्कि उस भरोसे का भी प्रतीक था,जो संकट के समय अपने देश और सरकार पर लोगों को होता है। इंटरनेट बंद होने और संपर्क टूटने जैसी परिस्थितियों में परिजनों की बेचैनी स्वाभाविक थी,लेकिन अपनों को सुरक्षित देखकर वह चिंता राहत और खुशी में बदल गई।

जैसे-जैसे यात्री बाहर आते गए,गले मिलने,आशीर्वाद देने और आँखों में आँसू लिए मुस्कुराने के दृश्य लगातार सामने आते रहे। किसी ने माँ को सीने से लगाया,तो किसी ने पिता के पैर छुए। इन पलों ने यह साबित कर दिया कि दूरी चाहे कितनी भी हो और हालात कितने भी कठिन क्यों न हों,सुरक्षित वापसी की खुशी हर डर पर भारी पड़ती है।