संजू सैमसन (तस्वीर क्रेडिट@JaikyYadav16)

बार-बार कुर्बानी,फिर भी चमके संजू सैमसन—टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत को फाइनल तक पहुँचाने की कहानी

नई दिल्ली,7 मार्च (युआईटीवी)- टी20 क्रिकेट के सबसे बड़े मंच पर जब भारतीय टीम ने एक बार फिर फाइनल में जगह बनाई,तो इस सफलता के पीछे कई खिलाड़ियों का योगदान रहा,लेकिन अगर किसी एक खिलाड़ी की कहानी सबसे ज्यादा प्रेरणादायक और नाटकीय रही,तो वह हैं भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन। लंबे समय तक टीम संयोजन के कारण नजरअंदाज किए जाने और बल्लेबाजी क्रम में बार-बार बदलाव झेलने के बावजूद सैमसन ने धैर्य नहीं खोया। सही मौके का इंतजार किया और जब मौका मिला तो ऐसे प्रदर्शन किए कि भारत को सीधे फाइनल तक पहुँचाने में उनकी भूमिका बेहद अहम बन गई।

भारतीय टीम ने आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2026 के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। यह लगातार दूसरा मौका है जब भारत टी20 विश्व कप के खिताबी मुकाबले तक पहुँचा है। इस बार टीम की सफलता की कहानी में सैमसन का नाम सबसे ऊपर लिया जा रहा है। वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए मुकाबले में उन्होंने 97 रनों की नाबाद पारी खेलकर भारत को सेमीफाइनल का टिकट दिलाया। इसके बाद सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने महज 42 गेंदों में 89 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया।

दिलचस्प बात यह है कि टूर्नामेंट से पहले तक सैमसन की स्थिति टीम में बिल्कुल अलग थी। एशिया कप 2025 से पहले वह शानदार फॉर्म में थे और लगातार आक्रामक बल्लेबाजी कर रहे थे। उस समय यह लगभग तय माना जा रहा था कि वह युवा बल्लेबाज अभिषेक शर्मा के साथ टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज होंगे। उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता, तकनीक और आत्मविश्वास तीनों दिखाई दे रहे थे,लेकिन टीम मैनेजमेंट ने संतुलन बनाने के लिए एक अलग फैसला लिया।

दरअसल चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन की योजना थी कि शुभमन गिल को भी टी20 टीम में फिट किया जाए। गिल की प्रतिभा और भविष्य को देखते हुए उन्हें मौका देने का निर्णय लिया गया। इसका सीधा असर सैमसन पर पड़ा। उन्हें ओपनिंग से हटाकर मध्यक्रम में भेज दिया गया। एशिया कप के दौरान कभी वह नंबर पाँच पर उतरे तो कभी नंबर छह पर बल्लेबाजी करते नजर आए। टी20 क्रिकेट में बल्लेबाजी क्रम का बदलाव किसी भी बल्लेबाज की लय को प्रभावित कर सकता है और सैमसन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उनके प्रदर्शन में वह निरंतरता नहीं दिखी जिसकी उनसे उम्मीद की जा रही थी।

हालाँकि,गिल को लगातार मौके देने के बावजूद वह टी20 प्रारूप में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके। इसके बाद टीम प्रबंधन ने एक बार फिर बदलाव किया और सैमसन को फिर से ओपनिंग की जिम्मेदारी सौंप दी,लेकिन इसी बीच एक और मोड़ आया जिसने सैमसन की राह फिर मुश्किल कर दी।

न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली गई टी20 सीरीज में सैमसन का बल्ला खामोश रहा। इस सीरीज में दूसरी ओर इशान किशन ने शानदार प्रदर्शन किया। किशन ने चार मुकाबलों में 231 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते हुए 215 रन बना डाले। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने टीम प्रबंधन को प्रभावित किया और उन्हें अभिषेक शर्मा के साथ सलामी जोड़ीदार बना दिया गया। इसका मतलब था कि सैमसन को एक बार फिर अपनी जगह कुर्बान करनी पड़ी।

कई क्रिकेटरों के लिए ऐसे हालात निराशा पैदा कर सकते थे। बार-बार टीम संयोजन की वजह से स्थान बदलना किसी भी खिलाड़ी के आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकता है। लेकिन सैमसन ने अलग रास्ता चुना। उन्होंने इंतजार किया,मेहनत जारी रखी और सही मौके का धैर्यपूर्वक इंतजार किया।

टी20 विश्व कप 2026 के शुरुआती मुकाबलों में सैमसन प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं थे। वह बेंच पर बैठकर टीम का समर्थन करते रहे। ऐसा लग रहा था कि शायद इस बड़े टूर्नामेंट में उन्हें ज्यादा मौका नहीं मिलेगा,लेकिन क्रिकेट में किस्मत कब बदल जाए,यह कोई नहीं जानता।

सुपर-8 चरण में टीम इंडिया को एक बदलाव करना पड़ा। उस समय मध्यक्रम के भरोसेमंद बल्लेबाज रिंकू सिंह उपलब्ध नहीं थे। ऐसे में टीम प्रबंधन ने सैमसन को प्लेइंग इलेवन में मौका देने का फैसला किया। यही वह क्षण था जिसका सैमसन लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।

जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने भले ही बहुत बड़ी पारी नहीं खेली,लेकिन 15 गेंदों में 24 रन बनाकर यह दिखा दिया कि वह लय में हैं और बड़े मंच के लिए तैयार हैं। उनकी बल्लेबाजी में वही आत्मविश्वास दिखाई दिया जो उनके स्वाभाविक खेल की पहचान है।

इसके बाद आया वह मुकाबला जिसने सैमसन की कहानी को पूरी तरह बदल दिया। वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए मैच में उन्होंने 97 रनों की नाबाद पारी खेली। यह पारी सिर्फ रन बनाने तक सीमित नहीं थी,बल्कि इसमें परिस्थिति के अनुसार बल्लेबाजी,तेज स्ट्राइक रेट और शानदार शॉट चयन सब कुछ शामिल था। इस पारी की बदौलत भारत ने मजबूत स्कोर खड़ा किया और सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली।

लेकिन सैमसन की असली परीक्षा अभी बाकी थी। सेमीफाइनल में सामने थी मजबूत इंग्लैंड की टीम। बड़े मुकाबलों में दबाव बेहद ज्यादा होता है,लेकिन सैमसन ने इसे अपनी ताकत बना लिया। उन्होंने 42 गेंदों में 89 रनों की धमाकेदार पारी खेली। उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। उन्होंने मैदान के हर कोने में शॉट लगाए और इंग्लैंड के गेंदबाजों को पूरी तरह दबाव में डाल दिया।

इस पारी के बाद क्रिकेट जगत में सैमसन की जमकर तारीफ हुई। कई विशेषज्ञों ने कहा कि यह पारी इस बात का प्रमाण है कि सैमसन बड़े मैचों के खिलाड़ी हैं। जब मंच बड़ा होता है और दबाव ज्यादा होता है,तब वह अपने खेल का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं।

सैमसन खुद भी इस यात्रा को बेहद खास मानते हैं। उन्होंने कहा कि वेस्टइंडीज के खिलाफ खेली गई पारी उनके करियर की सबसे यादगार शामों में से एक थी। लंबे समय तक इंतजार करने के बाद जब उन्हें मौका मिला,तो उन्होंने खुद से वादा किया था कि इसे किसी भी कीमत पर जाने नहीं देंगे।

अब जब भारत फाइनल में पहुँच चुका है,तो उम्मीद की जा रही है कि सैमसन एक बार फिर अहम भूमिका निभा सकते हैं। उनकी मौजूदा फॉर्म और आत्मविश्वास टीम के लिए बड़ी ताकत बन चुका है। क्रिकेट की यही खूबसूरती है कि कभी-कभी जो खिलाड़ी लंबे समय तक इंतजार करता है,वही सबसे बड़े मंच पर सबसे चमकदार प्रदर्शन करता है।

संजू सैमसन की यह कहानी भी कुछ ऐसी ही है—बार-बार कुर्बानी देने वाले खिलाड़ी की, जिसने हार नहीं मानी और आखिरकार अपने बल्ले से पूरी दुनिया को जवाब दे दिया। अब सभी की नजरें फाइनल मुकाबले पर हैं,जहाँ यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सैमसन अपनी शानदार फॉर्म को जारी रखते हुए भारत को एक और विश्व कप जीत दिलाने में निर्णायक भूमिका निभा पाएँगे।