सिडनी,2 जनवरी (युआईटीवी)- ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी बाएँ हाथ के सलामी बल्लेबाज़ उस्मान ख्वाजा ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला करके एक युग के शांत समापन का संकेत दे दिया है। सिडनी में 4 जनवरी से शुरू होने वाला एशेज सीरीज का पाँचवां और अंतिम टेस्ट उनके करियर का आखिरी अंतर्राष्ट्रीय मुकाबला होगा। शुक्रवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में ख्वाजा ने जब यह घोषणा की,तो उनके साथ उनका परिवार भी मौजूद था। भावुक लेकिन संतुलित अंदाज़ में उन्होंने कहा कि सिडनी टेस्ट के बाद वह क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास ले रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि क्रिकेट ने उन्हें उनके सपनों से कहीं अधिक दिया। यादें, दोस्तियाँ और जीवन के ऐसे सबक,जिन्होंने मैदान से बाहर भी उन्हें एक बेहतर इंसान बनने में मदद की।
ख्वाजा ने खासतौर पर अपने माता-पिता और पत्नी के त्याग का ज़िक्र किया,जिन्होंने उनके लंबे क्रिकेट करियर के दौरान बिना शोर-शराबे के लगातार सहयोग दिया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलने पर जहाँ खुद उन्हें कभी-कभी शक होता था,वहीं उनके पिता को हमेशा विश्वास था कि उनका बेटा इस स्तर तक पहुँचेगा। इसी भरोसे के लिए उन्होंने सार्वजनिक रूप से आभार जताया। पाकिस्तान में जन्मे और बाद में ऑस्ट्रेलिया जाकर बसने वाले उस्मान ख्वाजा ऑस्ट्रेलिया की तरफ से खेलने वाले पहले पाकिस्तानी मूल के क्रिकेटर रहे। यह यात्रा केवल खेल से जुड़ी उपलब्धियों की नहीं थी,बल्कि विविधता,स्वीकृति और मेहनत के उस संदेश की भी थी,जिसे ख्वाजा ने अपने शांत स्वभाव और निरंतर प्रदर्शन से परिभाषित किया।
उम्र,बदलती टीम संरचना और एशेज सीरीज में उतार-चढ़ाव भरे प्रदर्शन ने शायद उनके निर्णय को आकार दिया। चल रही एशेज सीरीज के चार मैचों में से तीन में उन्होंने हिस्सा लिया,जबकि ब्रिसबेन टेस्ट उन्हें चोट के कारण छोड़ना पड़ा। पाँच पारियों में उनके स्कोर 2, 82, 40, 0 और 29 रहे। पिछले 15 टेस्ट पारियों में केवल एक अर्धशतक आना यह संकेत था कि अब युवा खिलाड़ियों के लिए रास्ता खोलने का समय आ गया है। फिर भी सिडनी टेस्ट में उनका लक्ष्य रहेगा कि वह एक बड़ी पारी के साथ अपने करियर को सम्मानजनक विदाई दें और संभवतः दर्शकों और साथियों के दिलों में एक ऐसी आखिरी तस्वीर छोड़ें,जो उनके करियर के सार को प्रतिबिंबित करे।
A hometown Test match for Usman Khawaja’s last ride as an international cricketer ❤️
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— ICC (@ICC) January 2, 2026
2011 में टेस्ट डेब्यू और 2013 में वनडे पदार्पण के साथ शुरू हुआ उनका अंतर्राष्ट्रीय सफर निरंतरता और धैर्य का उदाहरण रहा। 87 टेस्ट में 43.39 की औसत से 6,206 रन, जिनमें 16 शतक और 28 अर्धशतक शामिल हैं,इस बात का प्रमाण हैं कि ख्वाजा बड़े मौकों पर टिककर खेलने वाले बल्लेबाज़ थे। उनका सर्वोच्च टेस्ट स्कोर 232 रहा—एक ऐसा आँकड़ा,जो बताता है कि एक बार सेट हो जाने पर उन्हें आउट करना कितना मुश्किल हो जाता था। सीमित ओवरों में भी उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। 40 वनडे में 1,554 रन बनाए,जिनमें दो शतक और 12 अर्धशतक शामिल रहे। हालाँकि,टी20 अंतर्राष्ट्रीय में उन्हें लगातार मौके नहीं मिले,फिर भी नौ मैचों में 241 रन और एक अर्धशतक उनके नाम है। आखिरी वनडे उन्होंने 2019 में और आखिरी टी20 मुकाबला 2016 में खेला,जिसके बाद उनका फोकस मुख्य रूप से टेस्ट क्रिकेट पर रहा—एक ऐसा फॉर्मेट जिसमें उन्होंने खुद को पूरी तरह निखारा।
ख्वाजा का करियर आँकड़ों से अधिक उन परिस्थितियों और संदर्भों के कारण याद किया जाएगा,जिनमें उन्होंने प्रदर्शन किया। कई बार उन्हें टीम से अंदर-बाहर होना पड़ा,आलोचना का सामना करना पड़ा और अपनी तकनीक के साथ लगातार काम करना पड़ा,लेकिन हर वापसी के साथ वह अधिक परिपक्व,अधिक धैर्यवान और अधिक फोकस्ड दिखाई दिए। उनकी बल्लेबाज़ी की खासियत थी शांति—ऐसी शांति जो दबाव भरे सत्रों में ऑस्ट्रेलियाई पारी को स्थिरता देती थी। चाहे सबकॉन्टिनेंट की धीमी पिचें हों या इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की उछालभरी परिस्थितियाँ,ख्वाजा ने अक्सर अनुकूलन की क्षमता दिखाई और बड़ी पारियों के लिए खुद को तैयार रखा।
उनकी कहानी ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के लिए विविधता और समावेशन का प्रतीक भी बनी। एक प्रवासी परिवार से आने वाले ख्वाजा ने न केवल मैदान पर जगह बनाई,बल्कि ड्रेसिंग रूम में भी अपने व्यवहार से सम्मान अर्जित किया। वह युवा खिलाड़ियों के लिए एक मेंटर की तरह रहे—खासकर उन क्रिकेटरों के लिए जो विभिन्न सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों से आते हैं और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर खुद को साबित करना चाहते हैं। उनके जीवन और करियर से यह संदेश निकलता है कि अवसर मिलने पर किस तरह धैर्य,मेहनत और विनम्रता से सफलता गढ़ी जा सकती है।
सिडनी टेस्ट उनके लिए केवल आखिरी मैच नहीं,बल्कि एक भावनात्मक अध्याय का समापन होगा। दर्शक,साथी खिलाड़ी और कोचिंग स्टाफ उन्हें उस क्रिकेटर के रूप में याद करना चाहेंगे,जिसने हमेशा टीम को प्राथमिकता दी और अपनी भूमिका को समझदारी से निभाया। यह भी दिलचस्प रहेगा कि ख्वाजा भविष्य में क्रिकेट से किस रूप में जुड़े रहते हैं—क्या वह कमेंट्री,कोचिंग या युवा खिलाड़ियों के मार्गदर्शन जैसे क्षेत्रों में कदम रखते हैं। उनका अनुभव,मानसिक मजबूती और शांत स्वभाव उन्हें किसी भी भूमिका में मूल्यवान बना सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में उस्मान ख्वाजा का सफर भले ही सिडनी में खत्म हो रहा हो,लेकिन उनके योगदान की गूँज लंबे समय तक सुनाई देगी। उन्होंने साबित किया कि बड़ा नाम बनने के लिए हमेशा शोर मचाना ज़रूरी नहीं। निरंतरता,ईमानदारी और सम्मान के साथ खेलना ही किसी को खास बना देता है। जैसे-जैसे एशेज का यह आखिरी मुकाबला नजदीक आएगा,ऑस्ट्रेलियाई ड्रेसिंग रूम और दर्शकों के मन में एक ही भाव होगा—आभार। क्योंकि उस्मान ख्वाजा ने न सिर्फ रन बनाए,बल्कि एक ऐसी विरासत छोड़ी,जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
