कोलकाता,8 अक्टूबर (युआईटीवी)- कोलकाता के एस्प्लेनेड इलाके में चल रहे जूनियर डॉक्टरों का आमरण अनशन मंगलवार को भी जारी रहा और आज अनशन का चौथा दिन है। जूनियर डॉक्टरों की इस हड़ताल का प्रमुख उद्देश्य चिकित्सा प्रणाली में सुधार और उनकी माँगे पूरी करवाना है। महापंचमी के मौके पर सीनियर और जूनियर डॉक्टरों ने मिलकर पूरे दिन विभिन्न विरोध कार्यक्रमों का आयोजन किया।
सात जूनियर डॉक्टर एस्प्लेनेड में आमरण अनशन कर रहे हैं, जबकि पूरे पश्चिम बंगाल राज्य में अन्य जूनियर डॉक्टरों ने मंगलवार को सुबह 9 बजे से सांकेतिक 12 घंटे की भूख हड़ताल की। इस सांकेतिक भूख हड़ताल में वरिष्ठ डॉक्टरों,नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के प्रतिनिधि भी जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में शामिल हुए।
इन विरोध प्रदर्शनों के बीच मंगलवार की शाम 4:30 बजे से एक मेगा रैली भी आयोजित की जाएगी,जो कॉलेज स्क्वायर से शुरू होकर एस्प्लेनेड में स्थित अनशन मंच तक पहुँचेगी। इस रैली में चिकित्सा जगत के सभी वर्गों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो एकजुट होकर अपनी समस्याओं और माँगों को सरकार के सामने रखने का प्रयास करेंगे।
जूनियर डॉक्टरों ने आम लोगों से भी इस रैली और विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने जनता से कहा है कि वे इस सांकेतिक भूख हड़ताल में समर्थन व्यक्त करें और एकजुटता दिखाएँ, ताकि सरकार उनकी समस्याओं और माँगों को गंभीरता से ले सके। पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट (डब्ल्यूबीजेडीएफ) के एक प्रतिनिधि ने बताया कि,”हम समाज के सभी वर्गों से मिले समर्थन के कारण ही अपने विरोध को इस हद तक आगे बढ़ाने में सक्षम हुए हैं। इसलिए हम लोगों से आग्रह करते हैं कि वे इस विरोध प्रदर्शन में हमारा साथ दें।”
शनिवार शाम से ही जूनियर डॉक्टरों ने अपना विरोध एक अनूठे ढंग से शुरू किया है। कुछ डॉक्टरों ने आमरण अनशन की शुरुआत की,जबकि अन्य डॉक्टरों ने अपनी चिकित्सा सेवाओं को बंद करने का निर्णय वापस ले लिया और अपने कर्तव्यों पर लौट गए। इस अनशन की शुरुआत में छह जूनियर डॉक्टर (तीन महिलाएँ और तीन पुरुष) ने भूख हड़ताल शुरू की थी और रविवार की शाम को उनका सातवाँ साथी भी इस अनशन में शामिल हो गया।
यह विरोध प्रदर्शन डॉक्टरों की न केवल अपनी माँगों को लेकर है,बल्कि पूरे चिकित्सा क्षेत्र के सुधार और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी है। जूनियर डॉक्टरों की प्रमुख माँगे हैं कि अस्पतालों में सुविधाएँ बढ़ाई जाएँ, डॉक्टरों और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उनकी शैक्षणिक एवं वेतन संबंधी समस्याओं को जल्द से जल्द हल किया जाए।
सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन चिकित्सा समुदाय का यह कदम सरकार पर दबाव डालने के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डॉक्टरों के इस विरोध प्रदर्शन ने समाज के कई वर्गों का ध्यान आकर्षित किया है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही कोई सकारात्मक परिणाम निकलकर सामने आएगा।
जूनियर डॉक्टरों का यह अनशन तब तक जारी रहेगा जब तक कि सरकार उनकी माँगों को सुनकर ठोस कदम नहीं उठाती।
