विप्रो के शीर्ष कर्मी की बर्खास्तगी पर ऋषद प्रेमजी बोले : ’10 मिनट में लिया फैसला’

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर (युआईटीवी/आईएएनएस)- विप्रो के अध्यक्ष ऋषद प्रेमजी ने बुधवार को खुलासा किया कि संगठन के शीर्ष 20 कर्मचारियों में से एक को ईमानदारी के बड़े मुद्दे को लेकर दरवाजा दिखाया गया था। यहां नैसकॉम प्रोडक्ट कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए प्रेमजी ने सैकड़ों कर्मचारियों की अचनक बर्खास्तगी पर हुए हंगामे का जिक्र करते हुए कहा, “फैसला लेने में सिर्फ 10 मिनट लगे।”

उन्होंने कहा, “वह कर्मचारी कंपनी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। कठिन समय में कठिन निर्णय लेना पड़ता है।”

उन्होंने कहा, “ईमानदारी से संबंधित नीति ब्लैक एंड ह्वाइट है। ईमानदारी के उल्लंघन और उत्पीड़न पर नीति स्पष्ट है। वह कर्मचारी कंपनी में नहीं रहेगा, यदि नीति का उल्लंघन करता है।”

उन्होंने एक अन्य वरिष्ठ कर्मचारी को छह साल पहले बर्खास्त किए जाने के मामले का भी हवाला दिया।

उन्होंने कहा, “वह कंपनी से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ था और उसने क्लीन रिलीविंग लेटर प्राप्त करने के लिए हर संभव प्रयास किया। उसने संगठन पर बहुत दबाव डाला, जबकि उसे कंपनी की ईमानदारी नीति के बारे में स्पष्ट रूप से बताया गया था।”

ऋषद प्रेमजी ने स्टार्टअप्स से कड़े फैसले लेने का भी आह्वान किया।

उन्होंने कहा, “उन्हें मूल्यवान व्यवसाय के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। व्यवसाय को टिकाऊ बनाने की यात्रा लंबी और जटिल है। प्रक्रिया धीमी है।”

यह देखते हुए कि यूनिकॉर्न का दर्जा पाने का जुनून है, उन्होंने कहा कि संस्थापकों को सही लोगों को चुनना चाहिए।

उन्होंने कहा, “सबसे सफल लोग अधिक खतरनाक होते हैं। वे सफलता की यात्रा पर 1,000 शवों को छोड़ देते हैं।”

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