ब्रुसेल्स,28 फरवरी (युआईटीवी)- मिडिल ईस्ट में तेजी से बिगड़ते सुरक्षा हालात ने एक बार फिर वैश्विक चिंता को गहरा कर दिया है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव, अमेरिकी सैन्य सक्रियता और संभावित क्षेत्रीय टकराव की आशंकाओं के बीच कई यूरोपीय देशों ने अपने नागरिकों के लिए सख्त ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। ब्रिटेन,फ्रांस,जर्मनी, इटली,पोलैंड,नीदरलैंड,फिनलैंड,स्वीडन,सर्बिया और साइप्रस जैसे देशों ने न सिर्फ अपने नागरिकों को ईरान की यात्रा से बचने की सलाह दी है,बल्कि जो लोग वहाँ मौजूद हैं,उनसे जल्द-से-जल्द देश छोड़ने का आग्रह भी किया है। इसके साथ ही इजरायल,लेबनान, इराक,वेस्ट बैंक और गाजा जैसे संवेदनशील इलाकों के लिए भी चेतावनियाँ जारी की गई हैं।
ब्रिटिश सरकार ने शुक्रवार को घोषणा की कि उसने ईरान में स्थित अपने दूतावास के कुछ स्टाफ को अस्थायी रूप से वापस बुला लिया है। हालाँकि,दूतावास पूरी तरह बंद नहीं किया गया है,लेकिन वह फिलहाल रिमोट मोड में काम करेगा। लंदन ने अपने नागरिकों को स्पष्ट रूप से ईरान की किसी भी तरह की यात्रा न करने की सलाह दी है। ब्रिटिश विदेश मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा हालात बेहद अस्थिर हैं और किसी भी समय स्थिति और गंभीर हो सकती है। अधिकारियों ने यह भी माना कि यदि क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ता है,तो कांसुलर सहायता सीमित हो सकती है।
फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने भी अपने नागरिकों के लिए कड़ी एडवाइजरी जारी की है। पेरिस ने इजरायल,यरुशलम और वेस्ट बैंक की यात्रा से बचने की सलाह दी है। फ्रांसीसी प्रशासन ने चेतावनी दी है कि ईरान से जुड़ी मौजूदा परिस्थितियों के क्षेत्रीय परिणाम हो सकते हैं,जिनका असर आसपास के देशों पर भी पड़ सकता है। फ्रांस ने संभावित फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी की आशंका जताते हुए कहा है कि जो नागरिक पहले से इन क्षेत्रों में मौजूद हैं वे सतर्क रहें,भीड़भाड़ वाले इलाकों से बचें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
इटली ने भी इसी तरह का रुख अपनाया है। रोम ने अपने नागरिकों से कहा है कि जो लोग पर्यटन या गैर-जरूरी कारणों से ईरान में हैं,वे तुरंत वापस लौटने की योजना बनाएँ। इतालवी विदेश मंत्रालय ने पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है। इटली ने विशेष रूप से इराक और लेबनान की यात्रा से सख्ती से मना किया है,जहाँ पहले से ही सुरक्षा हालात नाजुक माने जाते हैं।
जर्मनी ने अपनी ट्रैवल गाइडेंस को अपडेट करते हुए पूरे इजरायल के लिए यात्रा न करने की सलाह जारी की है। पहले यह चेतावनी केवल कुछ सीमित इलाकों पर लागू थी,लेकिन अब बर्लिन ने इसे पूरे देश तक विस्तार दे दिया है। जर्मन विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सुरक्षा स्थिति तेजी से बदल रही है और मिसाइल या ड्रोन हमलों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
पोलैंड के विदेश मंत्रालय ने अपने नागरिकों से ईरान,इजरायल और लेबनान को तुरंत छोड़ने का आग्रह किया है। वारसॉ ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट में सिविलियन एयरस्पेस के बंद होने की आशंका है,जिससे फ्लाइट्स या तो रद्द हो सकती हैं या लंबे समय तक बाधित रह सकती हैं। पोलिश अधिकारियों ने कहा कि यदि स्थिति और बिगड़ती है,तो निकासी अभियान चलाना मुश्किल हो सकता है।
नीदरलैंड की सरकार ने भी कड़ा रुख अपनाया है। डच विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मिडिल ईस्ट में मौजूदा तनाव के कारण इजरायल में सुरक्षा की स्थिति अत्यंत अनिश्चित है। उसने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “आपकी स्थिति चाहे जो भी हो,वहाँ यात्रा न करें। यह बहुत खतरनाक है।” डच प्रशासन ने इजरायल-गाजा,लेबनान और मिस्र की सीमाओं के पास विशेष रूप से यात्रा न करने की चेतावनी दी है। मंत्रालय ने कहा है कि ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा बना हुआ है और हालात अचानक बिगड़ सकते हैं।
फिनलैंड ने पहले ही फरवरी में अपनी ट्रैवल एडवाइजरी अपडेट करते हुए ईरान की सभी यात्राओं से बचने की सलाह दी थी। साथ ही उसने यमन और लीबिया को तुरंत छोड़ने का निर्देश भी जारी किया था। स्वीडन ने भी अपने नागरिकों को ईरान से दूर रहने को कहा है और स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति वहाँ रहने का फैसला करता है,तो वह सरकार द्वारा प्रायोजित किसी भी निकासी की उम्मीद न करे। सर्बिया ने भी ईरान में मौजूद अपने नागरिकों से जल्द-से-जल्द देश छोड़ने का आग्रह किया है।
साइप्रस के विदेश मंत्रालय ने भी अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि वह मिडिल ईस्ट में हो रहे घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रहा है। निकोसिया ने अपने नागरिकों को याद दिलाया है कि ईरान की सभी यात्राओं से बचा जाए और जो लोग वहाँ मौजूद हैं,वे वापस लौट आएँ । इजरायल के लिए गैर-जरूरी यात्राओं से बचने और फिलिस्तीनी इलाकों,विशेष रूप से गाजा की सभी यात्राओं से दूर रहने की सलाह दोहराई गई है।
इन चेतावनियों के पीछे क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती सैन्य गतिविधियाँ भी एक बड़ा कारण हैं। स्विट्जरलैंड के जिनेवा में ईरान और अमेरिका के बीच कई दौर की कूटनीतिक बातचीत हुई है,लेकिन इसके बावजूद तनाव कम होता नहीं दिख रहा। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने बार-बार ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य हस्तक्षेप की चेतावनी दी है। इसी क्रम में संयुक्त राज्य अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने दो एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और एफ-35 स्टील्थ फाइटर समेत 150 से अधिक लड़ाकू विमानों की तैनाती की है। इसके अलावा जॉर्डन और इजरायल में स्थित सैन्य ठिकानों को भी मजबूत किया गया है।
अमेरिका ने एहतियाती कदम उठाते हुए बेरूत स्थित अपने दूतावास से गैर-जरूरी कर्मचारियों को वापस बुला लिया है। वाशिंगटन का कहना है कि यह कदम केवल एहतियात के तौर पर उठाया गया है,लेकिन इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि स्थिति को गंभीरता से लिया जा रहा है। क्षेत्र में संभावित ड्रोन और मिसाइल हमलों की आशंका को देखते हुए कई एयरलाइंस ने अपने रूट्स में बदलाव किया है या उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान और इजरायल के बीच सीधा टकराव होता है,तो इसका असर केवल इन दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा। लेबनान में सक्रिय हिज्बुल्लाह, गाजा में हमास और क्षेत्र में मौजूद विभिन्न सशस्त्र समूहों की भूमिका भी स्थिति को और जटिल बना सकती है। इसके अलावा वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है,क्योंकि मिडिल ईस्ट विश्व तेल आपूर्ति का एक बड़ा केंद्र है। खाड़ी क्षेत्र में किसी भी सैन्य टकराव से तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है,जिसका असर यूरोप और एशिया की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।
यूरोपीय देशों की ताजा एडवाइजरी यह दर्शाती है कि वे किसी भी अप्रत्याशित हालात के लिए पहले से तैयार रहना चाहते हैं। पिछले वर्षों में मिडिल ईस्ट में हुए संघर्षों के दौरान कई देशों को अपने नागरिकों की आपातकालीन निकासी करनी पड़ी थी,जो एक जटिल और महँगी प्रक्रिया साबित हुई थी। इस बार सरकारें जोखिम को कम से कम रखना चाहती हैं।
हालाँकि,अब तक क्षेत्र में पूर्ण युद्ध की स्थिति नहीं बनी है,लेकिन बयानबाजी और सैन्य तैयारियों ने चिंता बढ़ा दी है। कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है,परंतु जमीनी हालात अनिश्चित बने हुए हैं। यही कारण है कि यूरोपीय देशों ने अपने नागरिकों को स्पष्ट संदेश दिया है कि वे जोखिम न लें और सुरक्षित स्थानों पर लौट आएं।
आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाएगी,यह काफी हद तक ईरान,इजरायल और अमेरिका के कदमों पर निर्भर करेगा। यदि कूटनीति सफल होती है तो तनाव कम हो सकता है,लेकिन यदि किसी भी पक्ष की ओर से आक्रामक कार्रवाई होती है,तो व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल यूरोप की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है और इसी रणनीति के तहत एक के बाद एक देश सख्त ट्रैवल चेतावनी जारी कर रहे हैं।
