कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (तस्वीर क्रेडिट@ManishJaiky)

भारत विरोधी एजेंडा चलाने में व्यस्त रहे कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ‘सियासी जंग’ हारे,आज दे सकते हैं इस्तीफा

ओटावा,6 जनवरी (युआईटीवी)- कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो सोमवार को लिबरल पार्टी के नेता पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर सकते हैं। यह खबर रविवार को ‘द ग्लोब एंड मेल’ ने तीन विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से दी है। हालाँकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि ट्रूडो इस्तीफा कब देंगे,लेकिन सूत्रों का अनुमान है कि वह बुधवार को होने वाली एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कॉकस बैठक से पहले वह इस फैसले का ऐलान करेंगे। इस संदर्भ में कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय ने किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से साफ़ तौर से इंकार कर दिया है।

यह मामला कनाडा की राजनीतिक स्थिति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। लिबरल पार्टी इस समय गंभीर संकट से गुजर रही है और इससे पार्टी के भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं। मौजूदा सर्वेक्षणों के मुताबिक,अगर लिबरल पार्टी का प्रदर्शन इसी तरह खराब रहा,तो अक्टूबर के अंत तक होने वाले चुनाव में वे कंजर्वेटिव पार्टी से बुरी तरह हार सकते हैं। यह स्थिति पार्टी के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। ऐसे में यह निश्चित माना जा रहा है कि ट्रूडो का इस्तीफा पार्टी के लिए एक नई चुनौती पेश करेगा और उनके इस्तीफे के बाद जल्द चुनाव की माँग तेज हो सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक,प्रधानमंत्री ट्रूडो ने इस विषय पर वित्त मंत्री डोमिनिक लेब्लांक से चर्चा की है कि क्या वह लिबरल पार्टी के अंतरिम नेता और प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभालने के लिए तैयार होंगे। हालाँकि,इस बारे में एक सूत्र का कहना है कि यदि लेब्लांक नेतृत्व करने के लिए दौड़ने की योजना बनाते हैं,तो यह अव्यवहारिक हो सकता है। इस स्थिति में यह सवाल उठता है कि पार्टी का अगला नेता कौन होगा और क्या ट्रूडो के इस्तीफे से पार्टी की दिशा में कोई बदलाव आएगा।

ट्रूडो इस समय अपने राजनीतिक करियर के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। घरेलू मोर्चे पर उनकी सरकार और पार्टी की लोकप्रियता तेजी से गिर रही है। जनता के बीच उनके कामकाज को लेकर असंतोष बढ़ रहा है और यह स्थिति पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। यही नहीं,विदेश नीति में भी ट्रूडो को गंभीर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है,जो उनके इस्तीफे के फैसले में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

विदेशी मोर्चे पर ट्रूडो की परेशानियाँ तब शुरू हुईं,जब उन्होंने 2023 में भारत के खिलाफ आधारहीन आरोप लगाए। कनाडा के प्रधानमंत्री ने 18 सितंबर 2023 को संसद में यह बयान दिया था कि कनाडाई सुरक्षा एजेंसियाँ ​​भारत सरकार के एजेंटों और खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बीच संभावित संबंधों की जाँच कर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि यह आरोप विश्वसनीय हैं,लेकिन इस आरोप को भारत ने खारिज कर दिया और कनाडा की तरफ से कोई ठोस सबूत भी पेश नहीं किए गए।

निज्जर की हत्या 18 जून 2023 को ब्रिटिश कोलंबिया में एक गुरुद्वारा की पार्किंग में की गई थी और इस घटना ने दोनों देशों के रिश्तों में दरार डाल दी। कनाडा के प्रधानमंत्री के बयान ने भारत के साथ रिश्तों को और तनावपूर्ण बना दिया और देश में उनकी सरकार की विदेश नीति को लेकर सवाल उठने लगे।

इसके अलावा,ट्रूडो को अमेरिका के साथ भी कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर व्यापारिक दबाव बनाने के लिए आक्रामक तेवर अपनाए हैं। उन्होंने लगातार ओटावा को टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी है और इस बार उनके तेवर इतने तीव्र हो गए हैं कि वह ट्रूडो को कनाडा राज्य का गर्वनर कहकर अपमानित कर रहे हैं। ट्रंप ने यह भी ऐलान किया है कि वह जनवरी 2025 में अपने पदभार ग्रहण करने के पहले दिन ही ऐसे आदेशों पर हस्ताक्षर करेंगे, जिनके तहत मेक्सिको और कनाडा से आने वाले सभी सामानों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा।

यह स्थिति ट्रूडो के लिए और भी मुश्किल हो गई है,क्योंकि कनाडा की आर्थिक स्थिति और व्यापारिक रिश्ते अमेरिका और अन्य देशों के साथ पहले से ही जटिल हैं। ट्रंप के इस कदम से कनाडा की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ने की संभावना है और ट्रूडो के नेतृत्व पर उँगली उठाई जा रही है।

इन तमाम मुद्दों और चुनौतियों के बीच,ट्रूडो का इस्तीफा पार्टी और देश के लिए एक बड़े राजनीतिक परिवर्तन की ओर इशारा करता है। उनके नेतृत्व के अंत से लिबरल पार्टी को नई दिशा मिल सकती है,लेकिन साथ ही यह भी संभावना है कि पार्टी को एक कठिन राजनीतिक लड़ाई का सामना करना पड़े। यह स्थिति कनाडा के भविष्य और राजनीतिक परिदृश्य के लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।

जस्टिन ट्रूडो का इस्तीफा कनाडा की राजनीति में एक बड़ी हलचल पैदा कर सकता है। उनके इस्तीफे के बाद लिबरल पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन के साथ-साथ नए चुनावों की माँग भी उठ सकती है,जो देश की राजनीतिक दिशा को निर्धारित करेगा।