मॉस्को,22 नवंबर (युआईटीवी)- रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में रूस ने पहली बार इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम ) का इस्तेमाल किया है। यह मिसाइल अपनी लंबी दूरी की क्षमता और परमाणु हमले में सक्षम होने के कारण बेहद घातक मानी जाती है। इस हमले के कारण रूस और यूक्रेन के बीच जारी तनाव अब एक नए और खतरनाक चरण में प्रवेश कर चुका है।
हाल ही में, यूक्रेन द्वारा रूस पर मिसाइल हमला करने के जवाब में,रूस ने गुरुवार,21 नवंबर को यूक्रेन के निप्रो शहर पर इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल RS-26 रूबेज़ का इस्तेमाल किया। यह पहली बार है जब रूस ने इस युद्ध में आईसीबीएम का प्रयोग किया है।
RS-26 रूबेज़ रूस की एक अत्याधुनिक अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है,जो 6000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है। यह मिसाइल पारंपरिक और परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता रखती है। रूस ने इसे अपने अस्त्रखान क्षेत्र से निप्रो शहर पर दागा। मिसाइल की क्षमता और इसका इस्तेमाल इस बात को स्पष्ट करता है कि रूस अब अपने सैन्य अभियानों में और आक्रामक हो गया है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस हमले की पुष्टि की और इसे यूक्रेन द्वारा रूसी ठिकानों पर दागी गई अमेरिकी और ब्रिटिश मिसाइलों का जवाब बताया। उन्होंने कहा कि यह हमला केवल एक चेतावनी है और अगर यूक्रेन ने विदेशी मिसाइलों का उपयोग जारी रखा,तो रूस और भी बड़े हमले करेगा। पुतिन ने यह भी कहा कि भविष्य में इस तरह के हमलों से पहले नागरिकों को पहले से चेतावनी दी जाएगी ताकि वे सुरक्षित स्थानों पर जा सकें।
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेन्स्की ने इस हमले की कड़ी निंदा की और इसे एक खतरनाक कदम बताया। उन्होंने दुनिया के सभी देशों से इस हमले की निंदा करने और रूस पर दबाव बनाने की अपील की। ज़ेलेन्स्की ने कहा कि इस तरह के हमले न केवल यूक्रेन के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा हैं।
अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम ) की खासियत यह है कि यह हजारों किलोमीटर दूर के लक्ष्यों को भी आसानी से निशाना बना सकती है। रूस द्वारा इस तरह की मिसाइलों का उपयोग उसकी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन और यूक्रेन के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से रूस-यूक्रेन युद्ध और अधिक गंभीर हो सकता है और यह अंतर्राष्ट्रीय शांति को प्रभावित कर सकता है।
आईसीबीएम एक अत्याधुनिक मिसाइल तकनीक है,जिसे अंतरमहाद्वीपीय दूरी तक सटीक हमला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और इसकी मारक क्षमता इसे युद्ध के परिदृश्य में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है।
यूक्रेन के खिलाफ इस मिसाइल के इस्तेमाल से रूस ने युद्ध को एक नए और खतरनाक चरण में पहुंचा दिया है। आईसीबीएम के उपयोग से यह संकेत मिलता है कि रूस अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन कर रहा है और साथ ही यह एक चेतावनी भी हो सकती है।
रूस के इस कदम ने दुनियाभर में परमाणु युद्ध की आशंका को बढ़ा दिया है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। अमेरिका,ब्रिटेन और नाटो सदस्य देशों ने इस मुद्दे पर नज़र बनाए रखी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह तनाव इसी तरह बढ़ता रहा,तो यह स्थिति वैश्विक स्तर पर स्थिरता को प्रभावित कर सकती है।
इस घटनाक्रम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। आईसीबीएम का उपयोग न केवल यूक्रेन बल्कि आसपास के देशों और वैश्विक शांति के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस कदम से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है, और यह क्षेत्रीय स्थिरता को भी प्रभावित कर सकता है।
रूस न केवल अपने सैन्य अड्डों को मजबूत कर रहा है, बल्कि आईसीबीएम जैसी घातक मिसाइलों का उपयोग कर अपनी ताकत और प्रभाव का प्रदर्शन भी कर रहा है। इस हमले के बाद रूस यह दिखाने में सफल रहा है कि वह किसी भी स्तर पर जाकर अपने हितों की रक्षा करने के लिए तैयार है।
रूस के इस कदम ने दुनिया को यह याद दिलाया है कि युद्ध में परमाणु हथियारों की संभावना कितनी खतरनाक हो सकती है। वैश्विक समुदाय ने इस स्थिति पर पैनी नजर बनाई हुई है, क्योंकि यह फैसला युद्ध के प्रभाव को और अधिक गंभीर बना सकता है।
इस हमले ने रूस-यूक्रेन युद्ध को और जटिल बना दिया है। जहाँ एक ओर रूस ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है,वहीं दूसरी ओर यूक्रेन ने अंतर्राष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश की है। इस स्थिति में सभी की नजरें अब यह देखने पर हैं कि आगे क्या कदम उठाए जाएँगे।
रूस द्वारा आईसीबीएम का इस्तेमाल और यूक्रेन की प्रतिक्रिया दोनों ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण हैं। आने वाले समय में यह तय करेगा कि यह युद्ध और कितनी गंभीरता से बढ़ेगा।

