नई दिल्ली,24 जनवरी (युआईटीवी)- रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को खत्म करने के लिए लंबे समय से कूटनीतिक कोशिशें चल रही हैं,लेकिन जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। एक ओर संघर्ष जारी है,तो दूसरी ओर शांति की संभावनाओं को तलाशने के लिए बड़े स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय संपर्क तेज हो गए हैं। इसी कड़ी में अब एक अहम पहल सामने आई है। रूसी मीडिया के मुताबिक रूस,यूक्रेन और अमेरिका के बीच पहली त्रिपक्षीय बातचीत शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में होने जा रही है। इसे रूस-यूक्रेन युद्ध के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह जानकारी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूतों के बीच हुई एक लंबी और अहम मुलाकात के बाद सामने आई है। क्रेमलिन के एक वरिष्ठ सहयोगी ने पुष्टि की है कि सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर तीनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच एक विशेष कार्य समूह की बैठक अबू धाबी में होगी। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है,जब युद्ध को लगभग दो साल से ज्यादा का वक्त हो चुका है और किसी ठोस समाधान की उम्मीद अब भी अधूरी है।
राष्ट्रपति पुतिन ने हाल ही में अमेरिका के मिडिल ईस्ट दूत स्टीव विटकॉफ,ट्रंप के दामाद और करीबी सलाहकार जेरेड कुशनर तथा फेडरल एक्विजिशन सर्विस के कमिश्नर जोश ग्रुएनबाम से मुलाकात की थी। यह बैठक करीब चार घंटे तक चली,जिसे दोनों पक्षों ने गंभीर और व्यापक चर्चा करार दिया है। इस दौरान रूस की ओर से राष्ट्रपति पुतिन के सहयोगी यूरी उशाकोव और निवेश मामलों के विशेष दूत किरिल दिमित्रिव भी मौजूद रहे।
क्रेमलिन के वरिष्ठ अधिकारी यूरी उशाकोव ने पत्रकारों से टेलीफोनिक बातचीत में इस मुलाकात को “सार्थक,कंस्ट्रक्टिव और बेहद स्पष्ट” बताया। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध, क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य की संभावनाओं पर खुलकर चर्चा हुई। उशाकोव के मुताबिक,इसी बैठक के बाद यह तय हुआ कि सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर एक त्रिपक्षीय कार्य समूह का गठन किया जाएगा,जो शुक्रवार को अबू धाबी में पहली बार बैठक करेगा।
उशाकोव ने यह भी बताया कि रूसी सैन्य खुफिया एजेंसी जीआरयू के प्रमुख एडमिरल इगोर कोस्त्युकोव के नेतृत्व में एक रूसी प्रतिनिधिमंडल को इस त्रिपक्षीय बैठक के लिए खास निर्देश दिए गए हैं। राष्ट्रपति पुतिन ने व्यक्तिगत रूप से टीम को दिशा-निर्देश दिए हैं,जिससे यह साफ है कि क्रेमलिन इस बातचीत को कितनी गंभीरता से ले रहा है। इसके अलावा,स्टीव विटकॉफ और किरिल दिमित्रिव अबू धाबी में रूस और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर अलग से बातचीत भी करेंगे,जिससे संकेत मिलता है कि शांति प्रयासों के साथ-साथ आर्थिक रिश्तों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
रूसी पक्ष ने एक बार फिर साफ किया है कि मॉस्को और कीव के बीच शांति तभी संभव है,जब क्षेत्रीय विवादों का समाधान किया जाए। उशाकोव ने कहा कि रूस यूक्रेनी संकट को राजनीतिक और कूटनीतिक तरीकों से सुलझाने में रुचि रखता है,लेकिन अगर ऐसा नहीं हो पाता है,तो रूस युद्ध के मैदान में अपने लक्ष्यों को हासिल करना जारी रखेगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि फिलहाल सैन्य मोर्चे पर रूसी सेना की पहल बनी हुई है,जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इस बीच,अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी व्यक्तिगत स्तर पर शांति प्रयासों में सक्रिय नजर आ रहे हैं। गुरुवार को उन्होंने स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई,जब अंतर्राष्ट्रीय मंच पर रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर चिंताएँ लगातार बढ़ रही हैं। जेलेंस्की से बातचीत के बाद ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से कहा कि वे रूस और यूक्रेन के बीच शांति कायम होने की उम्मीद कर रहे हैं।
हालाँकि,ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच सीमाओं और जमीन से जुड़े मुद्दे बेहद जटिल हैं। उन्होंने कहा कि यही विवाद इस युद्ध को लंबा खींच रहे हैं और इन्हें सुलझाए बिना स्थायी समाधान मुश्किल है। ट्रंप के बयान से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार है,लेकिन अंतिम फैसला दोनों देशों की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा।
अबू धाबी में होने वाली त्रिपक्षीय बातचीत को इसलिए भी अहम माना जा रहा है,क्योंकि यह पहली बार है,जब रूस,यूक्रेन और अमेरिका एक ही मंच पर सीधे तौर पर सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा करेंगे। अब तक बातचीत ज्यादातर द्विपक्षीय या परोक्ष रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक भले ही तुरंत किसी बड़े समझौते तक न पहुँचे,लेकिन इससे संवाद का एक औपचारिक और ठोस ढाँचा जरूर तैयार हो सकता है।
युद्ध के बीच शांति की यह पहल ऐसे समय पर सामने आई है,जब यूक्रेन में हालात लगातार कठिन बने हुए हैं और यूरोप समेत पूरी दुनिया इस संघर्ष के असर से जूझ रही है। ऊर्जा संकट,वैश्विक महँगाई और सुरक्षा चिंताओं के बीच अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजरें अबू धाबी बैठक पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह त्रिपक्षीय बातचीत सिर्फ एक औपचारिक पहल साबित होती है या वास्तव में रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में कोई ठोस रास्ता खोल पाती है।
