रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

रूस-अमेरिका परमाणु तनाव में फिर बढ़ोतरी: पुतिन ने दिए परमाणु परीक्षणों की तैयारी के आदेश

मास्को,6 नवंबर (युआईटीवी)- दुनिया एक बार फिर से परमाणु हथियारों की दौड़ की ओर बढ़ती दिख रही है। रूस और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। बुधवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने शीर्ष रक्षा और सुरक्षा अधिकारियों को संभावित परमाणु हथियार परीक्षणों की तैयारी पर ठोस प्रस्ताव तैयार करने का आदेश दिया। यह आदेश ऐसे समय पर दिया गया है,जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ दिनों पहले बयान दिया था कि अमेरिका परमाणु परीक्षणों को फिर से शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

रूस के सरकारी मीडिया नेटवर्क ‘आरटी टीवी’ ने इस महत्वपूर्ण बैठक का वीडियो भी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया है। वीडियो में रक्षा मंत्री आंद्रे बेलौसोव को राष्ट्रपति पुतिन को इस मुद्दे पर ब्रीफ करते हुए सुना जा सकता है। बैठक के दौरान पुतिन ने स्पष्ट कहा कि रूस ने अब तक व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) के तहत अपने सभी दायित्वों का कड़ाई से पालन किया है,लेकिन उन्होंने चेतावनी के लहजे में कहा कि यदि अमेरिका या कोई अन्य परमाणु शक्ति इस संधि का उल्लंघन करती है और परमाणु परीक्षण शुरू करती है,तो रूस भी उसी राह पर चलने में हिचकिचाएगा नहीं।

राष्ट्रपति पुतिन ने कहा, “मैं विदेश मंत्रालय,रक्षा मंत्रालय,विशेष सेवाओं और संबंधित नागरिक एजेंसियों को निर्देश दे रहा हूँ कि वे इस मुद्दे पर आवश्यक जानकारी एकत्र करें,उसका गहन विश्लेषण करें और रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में परमाणु परीक्षणों की तैयारी की संभावना पर ठोस प्रस्ताव तैयार करें।” यह बयान इस बात का संकेत है कि मास्को अब केवल कूटनीतिक चेतावनियों से आगे बढ़कर व्यावहारिक कदमों की दिशा में सोच रहा है।

बैठक के दौरान रक्षा मंत्री आंद्रे बेलौसोव ने पुतिन को बताया कि अमेरिका के हालिया बयानों और गतिविधियों ने वैश्विक रणनीतिक स्थिरता पर गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। बेलौसोव ने कहा कि वाशिंगटन के संभावित कदमों का जवाब देने के लिए रूस को भी तुरंत तैयारियाँ शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “अमेरिका जिस तरह से परमाणु परीक्षणों पर विचार कर रहा है,वह वैश्विक संतुलन को अस्थिर कर सकता है। इसलिए रूस को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परमाणु परीक्षणों की तैयारी तुरंत शुरू करना उचित होगा।”

पुतिन ने जवाब में दोहराया कि रूस लंबे समय से सीटीबीटी संधि का पालन कर रहा है और वह इसे जारी रखना चाहता है,लेकिन उन्होंने साफ किया कि यह पालन ‘एकतरफा’ नहीं हो सकता। उनके अनुसार,यदि कोई अन्य देश,विशेष रूप से अमेरिका,इस समझौते को तोड़ता है,तो रूस के पास भी समान प्रतिक्रिया देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

रूसी समाचार एजेंसी ‘तास’ की रिपोर्ट के अनुसार,पुतिन के इस बयान से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक विवादित आरोप लगाया था कि रूस और चीन गुप्त रूप से परमाणु विस्फोट कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को ऐसे संकेत मिले हैं कि दोनों देश छोटे पैमाने पर परीक्षण कर रहे हैं,जो अंतर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है। हालाँकि,मॉस्को और बीजिंग दोनों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

रूस के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के आरोपों को “राजनीतिक प्रोपेगेंडा” बताते हुए कहा कि मॉस्को ने सीटीबीटी के हर प्रावधान का पालन किया है और कभी किसी गुप्त परीक्षण का संचालन नहीं किया। चीन ने भी वाशिंगटन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। बीजिंग के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका खुद संधियों से पीछे हटने का इतिहास रखता है और अब वही दूसरों पर उंगली उठा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और अमेरिका के बीच यह परमाणु बयानबाजी केवल सुरक्षा रणनीति का हिस्सा नहीं है,बल्कि यह दोनों देशों की आंतरिक राजनीति और शक्ति संतुलन से भी जुड़ी हुई है। जहाँ अमेरिका में राष्ट्रपति चुनावी माहौल के बीच ट्रंप अपने “सख्त नेता” की छवि को मजबूत करना चाहते हैं,वहीं पुतिन रूस की सैन्य शक्ति और संप्रभुता का प्रदर्शन करना चाहते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटनाक्रम ने चिंता बढ़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव कार्यालय ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। यूएन के प्रवक्ता ने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि सभी परमाणु शक्तियाँ सीटीबीटी संधि के मूल सिद्धांतों का सम्मान करेंगी और वैश्विक शांति एवं सुरक्षा को खतरे में डालने वाले किसी भी कदम से बचेंगी।”

सीटीबीटी,जिसे 1996 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाया गया था,का उद्देश्य विश्वभर में सभी प्रकार के परमाणु विस्फोटों पर रोक लगाना है। हालाँकि,यह संधि तब तक प्रभावी नहीं हो सकती,जब तक सभी 44 आवश्यक सदस्य देश इसे अनुमोदित न कर दें। अमेरिका ने इस संधि पर हस्ताक्षर तो किए हैं,लेकिन अब तक इसे अनुमोदित नहीं किया है। वहीं रूस ने इसे अनुमोदित किया था,लेकिन अब हाल के घटनाक्रम के बाद वह इसके पालन पर पुनर्विचार कर रहा है।

रूस और अमेरिका के बीच बढ़ते इस परमाणु तनाव ने शीत युद्ध की यादें ताजा कर दी हैं। वैश्विक समुदाय को चिंता है कि यदि दोनों देश फिर से परमाणु परीक्षण शुरू करते हैं,तो यह कदम अन्य परमाणु शक्तियों जैसे चीन,उत्तर कोरिया और पाकिस्तान को भी प्रेरित कर सकता है। इससे अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा वातावरण और अधिक अस्थिर हो जाएगा।

फिलहाल दुनिया की निगाहें क्रेमलिन और व्हाइट हाउस दोनों पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह परमाणु तनाव केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है या आने वाले दिनों में धरातल पर वास्तविक परीक्षणों में तब्दील होता है। अगर ऐसा हुआ,तो यह शीत युद्ध के बाद की सबसे बड़ी वैश्विक सुरक्षा चुनौती बन चुनौती बन सकती है,जो पूरी दुनिया को एक बार फिर परमाणु भय के साए में धकेल देगी।