सबरीमाला सोना चोरी कांड (तस्वीर क्रेडिट@dyatlov75)

सबरीमाला सोना चोरी कांड: मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी गिरफ्तार,देवस्वम बोर्ड ने अभियंता को किया निलंबित

नई दिल्ली,17 अक्टूबर (युआईटीवी)- केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर से चोरी हुए सोने के मामले में केरल पुलिस की विशेष जाँच टीम (एसआईटी) को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से सुर्खियों में बने इस सोना चोरी कांड में एसआईटी ने शुक्रवार तड़के करीब ढाई बजे मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी को गिरफ्तार कर लिया। सूत्रों के अनुसार,आरोपी को आज रन्नी अदालत में पेश किया जाएगा,जहाँ एसआईटी उसे रिमांड पर लेने की माँग करेगी,ताकि पूरे मामले की गहराई से जाँच की जा सके।

मंदिर से चोरी हुआ यह सोना श्रद्धालुओं की आस्था से गहराई से जुड़ा हुआ था,जिसके बाद राज्यभर में इस घटना ने तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न की थी। सबरीमाला मंदिर,जो भगवान अयप्पा को समर्पित है,हर साल लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र बनता है। ऐसे में मंदिर की संपत्ति और अलंकरण में हुई चोरी ने न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत किया,बल्कि देवस्वम बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए।

इस मामले में जाँच के शुरुआती दिनों में त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (टीडीबी) ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी अभियंता के. सुनील कुमार को निलंबित कर दिया था। बताया जा रहा है कि सुनील कुमार पर मंदिर से संबंधित निर्माण और रखरखाव कार्यों की देखरेख की जिम्मेदारी थी और जाँच में उनके नाम का संदर्भ आने के बाद बोर्ड ने तत्काल कार्रवाई की। टीडीबी के अध्यक्ष प्रशांत ने कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और चोरी में शामिल सभी लोगों को सजा दिलवाने के लिए देवस्वम बोर्ड पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

बोर्ड ने न केवल सुनील कुमार को निलंबित किया,बल्कि उन सेवानिवृत्त अधिकारियों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है,जिन पर मामले से संबंधित अनियमितताओं का संदेह है। इन अधिकारियों को 10 दिनों के भीतर अपने जवाब दाखिल करने को कहा गया है। बोर्ड ने इस कार्रवाई को मंदिर की पवित्रता और जनता के विश्वास की रक्षा के लिए आवश्यक कदम बताया है।

मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी,जो अब पुलिस की गिरफ्त में है, बेंगलुरु के रामपुरम इलाके का रहने वाला है। जाँच से पता चला है कि वह पहले सबरीमाला मंदिर में पुजारी का सहायक हुआ करता था। अपने इस पद पर रहते हुए उसने मंदिर के अंदरूनी हिस्सों,खासकर गर्भगृह और मूर्तियों की सजावट से जुड़ी संरचनाओं को गहराई से जाना था। पुलिस के अनुसार,इसी जानकारी का लाभ उठाते हुए उसने सोने की परतें चोरी करने की योजना बनाई।

रिपोर्टों के मुताबिक,उन्नीकृष्णन मंदिर छोड़ने के बाद भी त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड से जुड़ा रहा। उसने कई धार्मिक आयोजनों और मंदिर से जुड़े कामों को प्रायोजित भी किया था। इसी पुराने संबंध के कारण उसे मंदिर परिसर में आने-जाने की सुविधा भी मिल जाती थी। पुलिस की शुरुआती जाँच में यह बात सामने आई है कि उन्नीकृष्णन ने गर्भगृह के लकड़ी के पैनलों और द्वारपालक मूर्तियों पर जड़ी सोने की परतों को सावधानीपूर्वक निकाल लिया था। इस काम को उसने लंबे समय तक सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया,जिससे चोरी का संदेह शुरुआती दिनों में किसी को नहीं हुआ।

एसआईटी के सूत्रों का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब जाँच तेज कर दी गई है। यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इस चोरी में कोई और व्यक्ति या कर्मचारी भी शामिल था। पुलिस का मानना है कि इतनी बारीकी से की गई चोरी अकेले संभव नहीं थी और इसके पीछे एक छोटा नेटवर्क काम कर रहा हो सकता है।

इस बीच,देवस्वम बोर्ड ने कहा है कि वह इस घटना से गहराई से व्यथित है। अध्यक्ष प्रशांत ने बताया कि बोर्ड के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों और कर्मचारियों पर हमलों को लेकर भी चिंता जताई गई है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोग बिना पूरी जानकारी के बोर्ड के खिलाफ माहौल बना रहे हैं,जबकि बोर्ड स्वयं पारदर्शिता और धार्मिक परंपराओं के पालन के लिए प्रतिबद्ध है।

राज्य सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है और पुलिस को जाँच में किसी भी तरह की ढिलाई न बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि सरकार सबरीमाला जैसे पवित्र स्थल पर हुई चोरी को केवल एक आपराधिक मामला नहीं,बल्कि धार्मिक आस्था पर चोट के रूप में देख रही है।

उधर,सबरीमाला के भक्तों और स्थानीय लोगों ने आरोपी की गिरफ्तारी के बाद राहत की सांस ली है। उनका कहना है कि यह कदम न केवल न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण है,बल्कि यह भी दर्शाता है कि राज्य प्रशासन धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है।

अब पूरे राज्य की निगाहें एसआईटी की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि इस चोरी के पीछे केवल उन्नीकृष्णन की लालच थी या फिर यह किसी बड़े गिरोह की साजिश का हिस्सा थी,लेकिन इतना निश्चित है कि सबरीमाला सोना चोरी कांड ने एक बार फिर मंदिर प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर गहन मंथन की आवश्यकता को उजागर कर दिया है।