सलीम खान अस्पताल में भर्ती (तस्वीर क्रेडिट@AnilYadavmedia1)

सलीम खान अस्पताल में भर्ती,लीलावती के आईसीयू में निगरानी में,फिल्म जगत ने की जल्द स्वस्थ होने की कामना

मुंबई,18 फरवरी (युआईटीवी)- हिंदी सिनेमा के दिग्गज पटकथा लेखक और अभिनेता सलमान खान के पिता सलीम खान को मंगलवार को मुंबई के लीलावती अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। जानकारी के मुताबिक उन्हें शरीर में सूजन (स्वेलिंग) की शिकायत थी,जिसके बाद डॉक्टरों ने एहतियातन उन्हें निगरानी में रखने का फैसला लिया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए है।

तबीयत बिगड़ने की खबर मिलते ही परिवार के सदस्य अस्पताल पहुँच गए। सलमान खान को शूटिंग बीच में छोड़ सीधे अस्पताल जाते देखा गया। बताया जा रहा है कि वे मढ़ इलाके में चल रही एक फिल्म की शूटिंग में व्यस्त थे,लेकिन पिता की तबीयत की जानकारी मिलते ही तुरंत रवाना हो गए। बेटी अलवीरा खान भी अस्पताल पहुँचीं। परिवार के करीबी सूत्रों का कहना है कि डॉक्टरों की सलाह पर सलीम खान को कुछ समय के लिए आईसीयू में रखा गया है,ताकि उनकी स्थिति पर करीबी निगरानी रखी जा सके और आवश्यक जाँचें की जा सकें।

सलीम खान का नाम हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में उस लेखक के रूप में दर्ज है,जिन्होंने नायक की छवि और सिनेमा की भाषा दोनों को नई दिशा दी। उनका करियर अभिनय से शुरू हुआ था। 1960 के दशक में उन्होंने कई फिल्मों में छोटे-छोटे किरदार निभाए,लेकिन वह पहचान नहीं मिली जिसकी उन्हें तलाश थी। इसी दौर में उन्हें एहसास हुआ कि उनकी असली ताकत लेखन में है। यह निर्णय उनके जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ।

पटकथा लेखन की दुनिया में सलीम खान की किस्मत तब बदली जब उनकी जोड़ी गीतकार जावेद अख्तर के साथ बनी। यह जोड़ी ‘सलीम-जावेद’ के नाम से मशहूर हुई और हिंदी सिनेमा में एक नए दौर की शुरुआत की। दोनों ने मिलकर ऐसी कहानियाँ और संवाद रचे,जिन्होंने दर्शकों की भावनाओं को सीधे छुआ और बॉक्स ऑफिस पर अभूतपूर्व सफलता हासिल की। उनकी फिल्मों में समाज के गुस्से,संघर्ष,अन्याय के खिलाफ विद्रोह और उम्मीद की किरण जैसे तत्व प्रमुख रहे।

सलीम-जावेद की लिखी फिल्मों में जंजीर,दीवार,शोले और डॉन जैसी कल्ट क्लासिक्स शामिल हैं। इन फिल्मों ने न सिर्फ मनोरंजन किया,बल्कि सामाजिक यथार्थ को भी बड़े पर्दे पर सशक्त तरीके से पेश किया। ‘जंजीर’ और ‘दीवार’ के जरिए उन्होंने अभिनेता अमिताभ बच्चन को ‘एंग्री यंग मैन’ की पहचान दिलाई,जो आगे चलकर 1970 और 80 के दशक की सबसे प्रभावशाली सिनेमाई छवि बन गई।

‘शोले’ के संवाद आज भी लोकप्रिय संस्कृति का हिस्सा हैं। ‘डॉन’ की कहानी और किरदारों ने अपराध और थ्रिलर शैली को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। सलीम खान की लेखनी में सादगी,धार और जनमानस की समझ का अद्भुत संगम था। वे किरदारों को केवल नायक या खलनायक के रूप में नहीं,बल्कि मानवीय जटिलताओं के साथ गढ़ते थे। यही वजह है कि उनकी लिखी कहानियाँ दशकों बाद भी प्रासंगिक लगती हैं।

सलीम खान ने अपने लेखन से हिंदी सिनेमा के व्यावसायिक ढाँचे को भी प्रभावित किया। मजबूत पटकथा और दमदार संवादों के महत्व को उन्होंने नए सिरे से स्थापित किया। उनकी रचनात्मक ताकत ने इंडस्ट्री को यह एहसास कराया कि एक अच्छी कहानी ही फिल्म की असली रीढ़ होती है। उनके योगदान को कई पुरस्कारों और सम्मानों से भी नवाजा गया है,लेकिन उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण दर्शकों का प्रेम और सम्मान रहा है।

आज जब वे अस्पताल में भर्ती हैं,तो फिल्म जगत में चिंता का माहौल है। कई कलाकारों और फिल्मकारों ने उनकी सेहत को लेकर शुभकामनाएँ भेजी हैं। सोशल मीडिया पर भी प्रशंसक उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। सलीम खान का व्यक्तित्व केवल एक लेखक का नहीं,बल्कि एक मार्गदर्शक का भी रहा है। उन्होंने अपने अनुभव और दृष्टि से कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है।

परिवार के लिए यह समय स्वाभाविक रूप से भावनात्मक है,लेकिन डॉक्टरों के अनुसार स्थिति नियंत्रण में है। अस्पताल प्रशासन ने फिलहाल गोपनीयता बनाए रखते हुए विस्तृत चिकित्सकीय जानकारी साझा नहीं की है। उम्मीद की जा रही है कि उचित देखभाल और आराम से वे जल्द ही स्वस्थ होकर घर लौटेंगे।

हिंदी सिनेमा के इतिहास में सलीम खान का नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा। उनकी कहानियों ने जिस तरह समाज की धड़कनों को पर्दे पर उतारा,वह विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी। इस मुश्किल घड़ी में पूरा फिल्म उद्योग और उनके प्रशंसक उनके साथ खड़े हैं और उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की दुआ कर रहे हैं।