सूडानी संघर्ष

एल ओबेद की घेराबंदी को सूडानी सशस्त्र बलों ने किया समाप्त,अल-गिटैना पर फिर से नियंत्रण हासिल किया

खार्तूम,24 फरवरी (युआईटीवी)- सूडानी सशस्त्र बलों (एसएएफ) ने हाल ही में उत्तरी कोर्डोफन राज्य की राजधानी एल ओबेद की घेराबंदी को समाप्त करने और व्हाइट नाइल राज्य के अल-गिटैना शहर पर फिर से नियंत्रण हासिल करने की घोषणा की है। एसएएफ के प्रवक्ता नबील अब्दुल्ला ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि एसएएफ की अल-सैय्यद (मोबाइल फोर्स) ने एल ओबेद का मार्ग खोलने में सफलता प्राप्त की और शहर में स्थित अल-हजाना फोर्स के साथ मिलकर नियंत्रण स्थापित किया।

अब्दुल्ला ने यह भी बताया कि व्हाइट नाइल राज्य में सेना की इकाइयों ने मिलिशिया फोर्स को नष्ट कर दिया और अल-गिटैना शहर को पूरी तरह अपने कब्जे में ले लिया है। यह सैन्य अभियान सूडान के भीतर चल रहे संघर्षों का हिस्सा है,जिसमें सशस्त्र बल और अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्स (आरएसएफ) के बीच भीषण संघर्ष जारी है।

सूडान में यह संघर्ष पिछले साल अप्रैल से चल रहा है,जब आरएसएफ और सूडानी सशस्त्र बलों के बीच हिंसा भड़क उठी थी। यह संघर्ष सूडान की राजनीति और सैन्य नियंत्रण को लेकर गहरे विवादों का परिणाम है। अब तक इस संघर्ष में हजारों लोग मारे गए हैं और लाखों लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं। कई अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने सूडान में संघर्ष विराम की अपील की है,लेकिन अब तक इस संघर्ष का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

एल ओबेद,जो कि सूडान के व्यापार और कृषि के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है, पिछले कुछ महीनों से आरएसएफ के कब्जे में था। यह शहर दक्षिण सूडान से पूर्वी सूडान के पोर्ट सूडान तक जाने वाली तेल पाइपलाइन के रास्ते में स्थित है, जिससे इसकी रणनीतिक महत्वता और भी बढ़ जाती है। एल ओबेद की घेराबंदी समाप्त होने के बाद,एसएएफ ने इसे फिर से अपने नियंत्रण में लिया है,जो उनके लिए एक महत्वपूर्ण सैन्य विजय मानी जा रही है।

इसके अलावा,सेना ने हाल ही में घोषणा की थी कि उसने बहरी शहर के काफ़ौरी क्षेत्र पर भी पूरी तरह से नियंत्रण हासिल कर लिया है,जो पहले आरएसएफ का आखिरी गढ़ था। इससे यह स्पष्ट होता है कि एसएएफ ने अपने सैन्य अभियान को और अधिक प्रभावी बना लिया है और आरएसएफ के खिलाफ अपनी स्थिति मजबूत कर ली है।

इस संघर्ष में दोनों पक्षों के बीच भयंकर संघर्ष चल रहा है और यह युद्ध सूडान की अर्थव्यवस्था पर भारी असर डाल चुका है। कई क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचा बुरी तरह से प्रभावित हुआ है और सूडान की अर्थव्यवस्था में भी गिरावट आई है। सूडान के भीतर हिंसा और असुरक्षा के कारण लाखों लोग अपने घरों से पलायन करने को मजबूर हुए हैं और पड़ोसी देशों में शरण लेने के लिए बाध्य हो गए हैं। यह युद्ध न केवल सूडान के लिए,बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक बड़ा मानवीय संकट बन चुका है।

अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने संघर्ष के समाधान के लिए कई प्रयास किए हैं,लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने कई बार संघर्ष विराम की अपील की है,लेकिन सूडान की सरकार और आरएसएफ के बीच स्थिति लगातार उलझी हुई है। दोनों पक्षों के बीच शांति वार्ता शुरू करने की कोशिशें होती रही हैं,लेकिन जटिलताओं और विश्वास की कमी के कारण कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आ पाया है।

संघर्ष ने सूडान के नागरिकों की जिंदगी को कठिन बना दिया है और हर दिन नए संकट सामने आ रहे हैं। सेना और आरएसएफ के बीच लड़ाई से न केवल लोगों की जान जा रही है,बल्कि उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कई लोग अपनी जिंदगियों को बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं और यह प्रक्रिया निरंतर बढ़ रही है।

सूडान के नागरिकों की स्थिति और बढ़ते मानवीय संकट को ध्यान में रखते हुए, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को जल्द ही इस संघर्ष का स्थायी समाधान खोजने की आवश्यकता है। केवल सैन्य कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं हो सकता है और शांति और सामूहिक प्रयासों की जरूरत है,ताकि सूडान में स्थायित्व और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

इस समय,सूडान में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है और शांति की कोई ठोस संभावना नहीं दिख रही है। हालाँकि,एसएएफ द्वारा की जा रही सैन्य कार्रवाइयाँ और क्षेत्रों पर नियंत्रण हासिल करने के बावजूद,यह संघर्ष लंबे समय तक चलने का अनुमान है और इससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।